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Indian Polity
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भारतीय संविधान के भाग IV-क के अंतर्गत वर्णित 'मूल कर्तव्यों' (Fundamental Duties) के प्रावधानों, उनके विधिक आयामों तथा स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मूल कर्तव्यों का विचार तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित होकर भारतीय संविधान में जोड़ा गया था, तथा मूल रूप से स्वर्ण सिंह समिति ने कर अदायगी (Payment of Taxes) को भी नागरिकों का एक कर्तव्य बनाने की संस्तुति की थी, जिसे संविधान संशोधन अधिनियम में शामिल नहीं किया गया था।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 51-क के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करे और उसे अक्षुण्ण रखे, तथा यह विशिष्ट कर्तव्य मूल कर्तव्यों की सूची में सबसे पहला (क्रम संख्या 'क') स्थान रखता है।
  3. 3. यद्यपि मूल कर्तव्यों की प्रकृति न्यायोचित (Non-justiciable) है, तथापि संसद को यह संवैधानिक शक्ति प्राप्त है कि वह विधि बनाकर इनके उल्लंघन या अवहेलना के लिए यथारूप दंड या शास्ति (Penalty) आरोपित कर सकती है, जैसा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम जैसे कानूनों के माध्यम से किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: मूल कर्तव्यों को तत्कालीन सोवियत संघ के संविधान से लिया गया था। स्वर्ण सिंह समिति ने नागरिकों द्वारा करों के भुगतान को भी मूल कर्तव्यों में शामिल करने की संस्तुति की थी, जिसे 42वें संविधान संशोधन में स्वीकार नहीं किया गया था। कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 51-क के तहत भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करने का कर्तव्य पहले स्थान पर नहीं, बल्कि इसका उल्लेख खंड (c) में है। अनुच्छेद 51-क(a) के अंतर्गत संविधान का पालन करने और उसके आदर्शों, राष्ट्रध्वज तथा राष्ट्रगान का आदर करने का कर्तव्य सबसे पहले आता है। कथन 3 सही है: यद्यपि मूल कर्तव्य स्वयं न्यायालय द्वारा सीधे प्रवर्तनीय नहीं हैं (non-justiciable), किंतु संसद के पास विधाई शक्ति है कि वह इनके क्रियान्वयन के लिए उपयुक्त दंडात्मक विधियाँ बना सकती है। भारतीय संविधान और राजव्यवस्था के विस्तृत अध्ययन के लिए आप भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जा सकते हैं।
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