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Indian Polity
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राज्य की कार्यपालिका के संदर्भ में राज्यपाल की विवेकीय शक्तियों, अध्यादेश निर्माण तथा मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद की कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को अपने कृत्यों का निर्वहन करने के लिए सहायता और सलाह देने हेतु एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा, किंतु यदि किसी विषय पर यह प्रश्न उठता है कि वह विषय राज्यपाल के विवेक का विषय है या नहीं, तो इस संबंध में राज्यपाल का निर्णय अंतिम होगा और उसकी वैधता को इस आधार पर किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत नहीं किया जाएगा कि उसे अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए था या नहीं।
  2. 2. अनुच्छेद 213 के अनुसार राज्यपाल द्वारा प्रख्यापित अध्यादेश की शक्ति राज्य विधानमंडल के अधिनियम के समान ही होती है, किंतु यदि ऐसा अध्यादेश किसी ऐसे विषय पर है जिसके लिए राज्य विधानमंडल में विधेयक प्रस्तुत करने हेतु संविधान के तहत राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक होती, तो राज्यपाल ऐसा अध्यादेश राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित किए बिना अपनी स्वविवेक से प्रख्यापित नहीं कर सकता।
  3. 3. अनुच्छेद 167 के अंतर्गत मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे, और राज्यपाल द्वारा माँगे जाने पर प्रशासनिक मामलों तथा विधान के प्रस्तावों की जानकारी दे, किंतु राज्यपाल अपनी स्वविवेक शक्ति का प्रयोग करते हुए मंत्रिपरिषद के किसी निर्णय को स्वतः संज्ञान लेकर रद्द या निरस्त कर सकता है, भले ही उस निर्णय को मंत्रिमंडल का बहुमत प्राप्त हो।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 163(2) के अनुसार, यदि इस बात पर कोई प्रश्न उठता है कि कोई विषय राज्यपाल के विवेक का विषय है या नहीं, तो राज्यपाल द्वारा इस संबंध में किया गया निर्णय अंतिम होता है और उसकी वैधता को किसी भी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि उसे अपने विवेक का प्रयोग करना चाहिए था या नहीं। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 213 के तहत राज्यपाल कुछ विशेष मामलों (जैसे वे विषय जिनके लिए राज्य विधानमंडल में विधेयक प्रस्तुत करने हेतु राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति आवश्यक हो) में राष्ट्रपति के विचार के बिना अध्यादेश प्रख्यापित नहीं कर सकता। कथन 3 असत्य है: अनुच्छेद 167 के तहत मुख्यमंत्री का यह कर्तव्य है कि वह राज्यपाल को जानकारी दे, किंतु राज्यपाल मंत्रिपरिषद के किसी बहुमत प्राप्त निर्णय को स्वतः संज्ञान लेकर अपनी मर्जी से रद्द या निरस्त नहीं कर सकता; राज्यपाल संवैधानिक प्रमुख होता है और उसे सामान्यतः मंत्रिपरिषद की सलाह पर ही कार्य करना होता है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर अध्ययन करें।
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