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Indian Polity
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा प्रस्तुत और संविधान सभा द्वारा स्वीकृत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objective Resolution) ही परिवर्धित होकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसे 26 जनवरी 1950 को संविधान के लागू होने के साथ ही अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया था।
  2. 2. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट निर्णय दिया था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग (Integral Part) है और संसद इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन कर सकती है।
  3. 3. 'केशवानंद भारती वाद' (1973) के ऐतिहासिक निर्णय में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व के मत को बदलते हुए यह अभिनिर्धारित किया कि प्रस्तावना संविधान का अंग है, तथा इसमें निहित 'मूल ढांचा' (Basic Structure) को छोड़कर संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संशोधन किया जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि संविधान की प्रस्तावना को 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत, अधिनियमित और आत्मार्पित किया गया था, न कि 26 जनवरी 1950 को (26 जनवरी 1950 को संविधान पूर्ण रूप से लागू हुआ था)। कथन 2 गलत है क्योंकि 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि प्रस्तावना संविधान का अंग **नहीं** है। इसके बाद 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में न्यायालय ने अपने इस निर्णय को पलटते हुए कहा कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है। अतः कथन 3 पूरी तरह सही है। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
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