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Indian Polity
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भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के लिए उत्तरदायी है, किंतु राज्यों में पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों के संचालन के लिए अलग से राज्य निर्वाचन आयोगों का प्रावधान किया गया है।
- 2. वर्ष 1993 में संसद द्वारा अधिनियमित 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (सेवा शर्तें) अधिनियम' के माध्यम से निर्वाचन आयोग को एक स्थायी बहु-सदस्यीय निकाय बना दिया गया, जिसमें यह प्रावधान किया गया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद होने पर आयोग का निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जाएगा।
- 3. वर्ष 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा एक चयन समिति की संस्तुति पर की जाती है, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत निर्वाचन आयोग संसद, राज्य विधानमंडल, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करता है। वहीं, 73वें और 74वें संविधान संशोधन के तहत पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनावों के लिए अलग से 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) के गठन का प्रावधान किया गया है। कथन 2 सही है: वर्ष 1993 में निर्वाचन आयोग संशोधन अधिनियम के द्वारा बहु-सदस्यीय आयोग को वैधानिक रूप से स्थायी बना दिया गया और यह स्पष्ट किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य दो आयुक्तों के बीच किसी मतभेद की स्थिति में निर्णय बहुमत (Majority) से लिया जाएगा। कथन 3 सही है: मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) अधिनियम, 2023 के अनुसार, इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा प्रधानमंत्री (अध्यक्ष), लोकसभा में विपक्ष के नेता (या सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता) और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री से बनी चयन समिति की संस्तुति पर की जाती है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को लोकहित में एक अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना करने की शक्ति प्राप्त है, और इस परिषद् का मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, ऐसे विषयों पर सलाह देना जिन पर राज्यों तथा संघ के सामान्य हित हों, तथा बेहतर समन्वय के लिए संस्तुति करना है।
2. अंतर-राज्यीय परिषद् की संरचना के संबंध में संविधान में यह स्पष्ट किया गया है कि इसके अध्यक्ष प्रधानमंत्री होते हैं, तथा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और वे संघ राज्य क्षेत्र (UTs) जहाँ विधानसभाएँ हैं उनके मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं, किंतु राष्ट्रपति शासन के अधीन राज्यों के राज्यपाल इसके स्थायी सदस्य नहीं बन सकते हैं।
3. अनुच्छेद 258 के अंतर्गत राष्ट्रपति, किसी राज्य की सरकार की सहमति से, उस राज्य को या उसके अधिकारियों को ऐसे कृत्यों को सौंप सकते हैं जो संघ की कार्यकारी शक्ति के अंतर्गत आते हैं, तथा संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के माध्यम से भी राज्यों को ऐसे कृत्य और शक्तियाँ प्रदान की जा सकती हैं, भले ही वह विषय राज्य सूची (State List) से संबंधित न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के पास जाने पर क्या कर सकते हैं?
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति किसके नेतृत्व वाली समिति करती है?
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भारतीय संविधान में 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights) किस भाग में वर्णित हैं?
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भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करता है, तथा वर्ष 1993 के पश्चात से यह एक बहु-सदस्यीय निकाय बन गया है जिसमें किसी भी निर्णय के मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है, न कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की वीटो शक्ति से।
2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 के अनुसार कोई भी व्यक्ति लोकसभा या विधानसभा चुनाव में अधिकतम तीन निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ सकता है, जिसे बाद में संशोधित करके अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्र कर दिया गया था।
3. निर्वाचन आयुक्तों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों से हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना किसी भी स्थिति में उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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