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Indian Polity
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भारत के निर्वाचन आयोग और चुनाव सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और उतने ही अन्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जितने राष्ट्रपति समय-समय पर निर्धारित करता है, तथा वर्ष 1993 के पश्चात से यह एक बहु-सदस्यीय निकाय बन गया है जिसमें किसी भी निर्णय के मतभेद की स्थिति में बहुमत के आधार पर निर्णय लिया जाता है, न कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त की वीटो शक्ति से।
- 2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33 के अनुसार कोई भी व्यक्ति लोकसभा या विधानसभा चुनाव में अधिकतम तीन निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव लड़ सकता है, जिसे बाद में संशोधित करके अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्र कर दिया गया था।
- 3. निर्वाचन आयुक्तों की सेवा शर्तें और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों से हटाया जा सकता है जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति के बिना किसी भी स्थिति में उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार निर्वाचन आयोग एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों से मिलकर बनता है (यदि राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किए जाएं)। 1993 से यह एक बहु-सदस्यीय निकाय है और इसके निर्णय बहुमत के आधार पर लिए जाते हैं। कथन 2 गलत है: लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 33(7) के तहत कोई भी उम्मीदवार अब अधिकतम दो निर्वाचन क्षेत्रों से ही चुनाव लड़ सकता है (पहले इसकी सीमा अधिक थी)। कथन 3 गलत है: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह हटाया जाता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति अनिवार्य होती है, ऐसा संविधान में उपबंधित है। अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पढ़ें।
Related Questions
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों (Pardoning Powers) और वीटो शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत राष्ट्रपति को सैन्य न्यायालय (Court Martial) द्वारा दिए गए दंड के मामले में तथा सभी मामलों में जहाँ दंड या दंडादेश मृत्युदंड (Death Sentence) होता है, क्षमादान देने की पूर्ण शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का प्रयोग करते समय राष्ट्रपति के लिए केंद्रीय मंत्रिपरिषद की सलाह मानना पूरी तरह अनिवार्य होता है, सिवाय उस स्थिति के जहाँ दया याचिका खारिज कर दी गई हो।
2. राष्ट्रपति की क्षमादान शक्तियों में 'परिहार' (Remission) का अर्थ दंड की प्रकृति को बदले बिना उसकी अवधि को कम करना है, जबकि 'विराम' (Respiration/Remission नहीं अपितु Reprieve/Remission) का अर्थ किसी विशेष परिस्थिति, जैसे कि अपराधी की शारीरिक अपंगता या महिला अपराधी के गर्भवती होने के कारण मूल दंड के स्थान पर कम कठोर दंड देना है।
3. अनुच्छेद 111 के अंतर्गत जब कोई साधारण विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने के पश्चात राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति रोक सकता है और अपनी 'जेब वीटो' (Pocket Veto) शक्ति का प्रयोग करते अनिश्चित काल के लिए विधेयक को अपने पास रख सकता है, क्योंकि संविधान में ऐसी स्थिति के लिए राष्ट्रपति द्वारा विधेयक पर निर्णय लेने हेतु किसी भी समय-सीमा (Time Limit) का निर्धारण नहीं किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment) की प्रक्रिया किस अनुच्छेद में वर्णित है?
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'सर्वोच्च न्यायालय को एक अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) का दर्जा देता है?
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73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज व्यवस्था किस अनुसूची में शामिल की गई?
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों (Emergency Provisions) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को राष्ट्रीय आपातकाल के आधार के रूप में संविधान से हटाकर उसके स्थान पर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द को जोड़ा गया था, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित अनुरोध पर ही राष्ट्रपति द्वारा की जा सकती है।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 के माध्यम से यह उपबंध किया गया कि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 352 के तहत संपूर्ण देश में या उसके किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा उसके मंत्रिपरिषद की लिखित सलाह के बिना ही अपने एकांतिक विवेक से की जा सकती है, और इस उद्घोषणा को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती है।
3. मौलिक अधिकारों पर आपातकाल के प्रभाव के संबंध में, 44वें संशोधन द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि अनुच्छेद 20 (अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण) और अनुच्छेद 21 (प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण) द्वारा प्रदत्त अधिकारों को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी निलंबित या छीना नहीं जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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