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Indian Polity
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संविधान संशोधन विधेयक राष्ट्रपति के पास जाने पर क्या कर सकते हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
24वें संशोधन द्वारा राष्ट्रपति स्वीकृति के लिए बाध्य हैं।
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भारत के पहले राष्ट्रपति कौन थे?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) को ही कुछ संशोधनों के पश्चात भारतीय संविधान की प्रस्तावना के रूप में स्वीकार किया गया था, और यह प्रस्तावना अमेरिकी संविधान से प्रेरित होकर सबसे पहले लिखित संविधान में प्रस्तावना को शामिल करने की परंपरा का अनुसरण करती है।
2. 'बेरूबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग है, और संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते संविधान का मूल ढांचा प्रभावित न हो।
3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने पूर्व के निर्णय को बदलते हुए यह प्रतिपादित किया कि प्रस्तावना संविधान का अंग है और इसमें संशोधन किया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्च न्यायालयों (High Courts) की प्रशासनिक नियंत्रण शक्ति, रिट अधिकारिता और अधीनस्थ न्यायपालिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 227 के अधीन प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने प्रादेशिक क्षेत्राधिकार के भीतर सभी न्यायालयों और अधिकरणों (Tribunals) के अधीक्षण (Superintendence) की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति न्यायिक अधीक्षण के साथ-साथ प्रशासनिक अधीक्षण को भी समाहित करती है, जिसे राज्य के विधि द्वारा भी छीना नहीं जा सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अनुसार, किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति का अधिकार सीधे राज्यपाल के पास निहित है, किंतु राज्यपाल इस शक्ति का प्रयोग संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श किए बिना भी अपनी मंत्रिपरिषद की सलाह पर कर सकता है।
3. अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता (Writ Jurisdiction) केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह किसी अन्य विधिक उद्देश्य (Other Purpose) के लिए भी प्रयोग की जा सकती है, और यह उच्च न्यायालय का मूल तथा विवेकपरक क्षेत्राधिकार है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा तथा राज्यसभा की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 107 के अनुसार संसद के प्रत्येक सदन में विधेयकों को पुनः स्थापित करने और पारित कराने की प्रक्रिया का उपबंध है, जिसके तहत लोकसभा में लंबित कोई विधेयक लोकसभा के विघटन से व्यपगत (Lapse) हो जाता है, किंतु यदि कोई विधेयक राज्यसभा में लंबित है और लोकसभा द्वारा पारित नहीं किया गया है, तो लोकसभा के विघटन के बावजूद वह व्यपगत नहीं होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 108 के अंतर्गत दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाने का प्रावधान केवल साधारण विधेयकों और वित्तीय विधेयकों (Financial Bills Category-I) के मामलों में है, तथा संयुक्त बैठक की अध्यक्षता लोकसभा अध्यक्ष द्वारा की जाती है, और यदि वे अनुपस्थित हों तो राज्यसभा के सभापति द्वारा इसकी अध्यक्षता की जाती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 111 के अनुसार जब कोई विधेयक संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित कर दिया जाता है तब वह राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है, और राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति रोक सकते हैं (Pocket Veto) या विधेयक को पुनर्विचार के लिए वापस भेज सकते हैं, किंतु यदि संसद दोनों सदनों द्वारा उसे पुनः संशोधित या बिना संशोधन के पारित कर देती है, तो राष्ट्रपति उस पर अपनी अनुमति देने के लिए संवैधानिक रूप से बाध्य होते हैं (धन विधेयकों को छोड़कर)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के माध्यम से शहरी स्थानीय शासन (नगरपालिकाओं) को संवैधानिक दर्जा प्रदान किया गया। इस संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243-P से 243-ZG तक के प्रावधान शामिल हैं, तथा बारहवीं अनुसूची में नगरपालिकाओं की विधायी शक्तियों से संबंधित कुल 18 कार्यात्मक विषयों को सूचीबद्ध किया गया है।
2. अधिनियम के अनुसार नगरपालिकाओं के तीन प्रकार (नगर पंचायत, नगरपालिका परिषद और नगर निगम) का गठन किया जाना अनिवार्य है, किंतु 10 लाख या उससे अधिक जनसंख्या वाले महानगर क्षेत्र के लिए केवल 'नगर निगम' का गठन ही एकमात्र विकल्प है।
3. नगरपालिकाओं के सभी पदों के लिए प्रत्यक्ष निर्वाचन वार्डों की प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे जनता द्वारा होता है, किंतु इसके अतिरिक्त राज्य विधानमंडल विधि द्वारा संसद या राज्य विधानसभा के सदस्यों और लोकसभा/राज्यसभा सदस्यों को नगरपालिका की बैठकों में विशेष मताधिकार के साथ पदेन सदस्य के रूप में नामित कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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