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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता प्राप्त कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है और इसके लिए सरकार द्वारा किसी औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं होती है।
- 2. नागरिकता अधिनियम, 1955 (समय-समय पर संशोधित) के अनुसार, यदि कोई प्रवासी व्यक्ति भारत की नागरिकता 'देशीकरण' (Naturalisation) के माध्यम से प्राप्त करना चाहता है, तो उसे आवेदन करने से ठीक पहले के 12 महीनों की निरंतर अवधि के साथ-साथ पिछले 14 वर्षों में से कुल कम से कम 11 वर्ष भारत में बिताना अनिवार्य है।
- 3. वर्ष 2019 के नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (CAA) के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से संबंधित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के अवैध प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने हेतु देशीयकरण के लिए आवश्यक भारत में निवास की न्यूनतम अवधि को 11 वर्षों से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
भारतीय संविधान के भाग II में अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता का विस्तृत प्रावधान किया गया है। अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी देश की नागरिकता ग्रहण करता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाती है। नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत देशीयकरण (Naturalisation) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने की सामान्य शर्त के रूप में आवेदक को पिछले 14 वर्षों में से कम से कम 11 वर्ष भारत में निवास करना आवश्यक होता है। इसके अतिरिक्त, नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 द्वारा छह विशिष्ट अल्पसंख्यक समुदायों के लिए इस निवास अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है। विषय की अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर जाएं।
Related Questions
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भारतीय संविधान के ऐतिहासिक विकास के क्रम में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित अधिनियमों और उनके विशिष्ट प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया तथा उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, और इसी अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 1774 में कलकत्ता में एक उच्चतम न्यायालय की स्थापना की गई जिसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे थे।
2. पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 द्वारा कंपनी के राजनैतिक और वाणिज्यिक कार्यों के बीच अंतर किया गया तथा नियंत्रण बोर्ड (Board of Control) के माध्यम से ब्रिटिश सरकार का कंपनी के नागरिक, सैन्य और राजस्व संबंधी मामलों पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया, जिससे भारत में 'द्वैध शासन' की शुरुआत हुई।
3. चार्टर अधिनियम, 1813 के द्वारा भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक एकाधिकार को पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया, किंतु चीन के साथ व्यापार और चाय के व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार अगले 20 वर्षों के लिए सुरक्षित रखा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की विभिन्न शक्तियों, विशेषकर उसकी अंतर्निहित शक्तियों (Inherent Powers), समीक्षा क्षेत्राधिकार और राष्ट्रपति की सलाहकारिता अधिकारिता (अनुच्छेद 143) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत उच्चतम न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसा 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने का विशेष विवेक अधिकार प्राप्त है, जिसके आदेश या डिक्री का प्रवर्तन पूरे भारत में होगा, और संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के प्रावधान इस शक्ति के प्रयोग में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं कर सकते हैं।
2. अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा मांगे गए परामर्श पर विचार करने के लिए उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ (Constitutional Bench) का गठन करना अनिवार्य होता है, जिसमें कम से कम पांच न्यायाधीश होने चाहिए, तथा न्यायालय द्वारा दी गई सलाहकार राय राष्ट्रपति के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होती है।
3. उच्चतम न्यायालय के 'पुनरावलोकन क्षेत्राधिकार' (Review Jurisdiction) के तहत संविधान के अनुच्छेद 137 के अधीन वह अपने द्वारा सुनाए गए किसी निर्णय या आदेश का पुनरावलोकन कर सकता है, किंतु इस प्रकार का पुनरावलोकन आवेदन केवल तभी स्वीकार किया जा सकता है जब संसद द्वारा इस निमित्त कोई नया अधिनियम पारित किया गया हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के निर्माण और संविधान सभा (Constituent Assembly) की कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान सभा के गठन के लिए जुलाई-अगस्त 1946 में हुए चुनावों में कुल 389 सीटों में से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 208 सीटें और मुस्लिम लीग को 73 सीटें प्राप्त हुई थीं, तथा इस सभा में ब्रिटिश भारत के प्रांतों के साथ-साथ रियासतों और मुख्य आयुक्त के क्षेत्रों को भी उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया गया था।
2. संविधान सभा की प्रथम बैठक 9 दिसंबर 1946 को आयोजित की गई थी जिसमें मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया था, और सभा के सबसे वरिष्ठ सदस्य डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा को फ्रांस की पद्धति के अनुरूप सभा का अस्थायी अध्यक्ष चुना गया था, जबकि बाद में 11 दिसंबर 1946 को डॉ. राजेंद्र प्रसाद को स्थायी अध्यक्ष तथा एच.सी. मुखर्जी और वी.टी. कृष्णमाचारी दोनों को सभा का उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया था।
3. संविधान सभा द्वारा संविधान के निर्माण के लिए कुल 22 मुख्य समितियों का गठन किया गया था, जिनमें से प्रारूप समिति (Drafting Committee) सबसे महत्वपूर्ण थी, जिसका गठन 29 अगस्त 1947 को किया गया था और इसमें अध्यक्ष डॉ. बी.आर. अंबेडकर सहित कुल 8 सदस्य शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा के संवैधानिक उपबंधों, राजनीतिक दलों की मान्यता से संबंधित प्रावधानों तथा संविधान की विभिन्न अनुसूचियों और भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा से संबंधित उपबंध किए गए हैं, जिसमें अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि संविधान लागू होने के पंद्रह वर्ष की अवधि तक (अर्थात 1965 तक) सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग जारी रहेगा, जिसे संसद ने 'राजभाषा अधिनियम, 1963' के माध्यम से अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया।
2. संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था) के अंतर्गत दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रश्नों का निर्धारण करने की अंतिम शक्ति सदन के सभापति या अध्यक्ष को दी गई है, और उच्चतम न्यायालय ने 'किहोटो होलोहन वाद' (1992) में यह स्पष्ट किया था कि पीठासीन अधिकारी (Speaker/Chairman) द्वारा इस संबंध में लिया गया निर्णय पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर है और इसे किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
3. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और किसी भी राजनीतिक दल को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार अलग-अलग राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और साथ ही लोकसभा की कम से कम चार सीटें जीते।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) के संवैधानिक प्रावधानों, क्षेत्राधिकार और प्रतिवेदनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 320 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग से अखिल भारतीय सेवाओं, केंद्रीय सेवाओं और राज्य सेवाओं के सभी भर्ती मामलों में परामर्श किया जाना अनिवार्य है, और यदि सरकार आयोग के परामर्श के बिना कोई निर्णय लेती है, तो प्रभावित अभ्यर्थी इस आधार पर न्यायालय में रिट याचिका दायर कर सकता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 323 के तहत संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अपना वार्षिक प्रतिवेदन भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) अपना प्रतिवेदन संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्रस्तुत करता है, जिसे राज्यपाल राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाता है।
3. अनुच्छेद 321 के अंतर्गत संसद या राज्य विधानमंडल (यथास्थिति) विधि द्वारा संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग को उस आयोग के कृत्यों के अतिरिक्त लोक सेवाओं से संबंधित अन्य विषयों पर भी अतिरिक्त कार्य सौंपने के लिए अधिकृत कर सकता है, बशर्ते वह निगम या स्थानीय प्राधिकरण किसी सार्वजनिक संस्थान से संबंधित हो।
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