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Indian Polity
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भारतीय संविधान के अंतर्गत राजभाषा के संवैधानिक उपबंधों, राजनीतिक दलों की मान्यता से संबंधित प्रावधानों तथा संविधान की विभिन्न अनुसूचियों और भागों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के भाग XVII के अंतर्गत अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा से संबंधित उपबंध किए गए हैं, जिसमें अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी होगी, तथा मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि संविधान लागू होने के पंद्रह वर्ष की अवधि तक (अर्थात 1965 तक) सभी शासकीय प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग जारी रहेगा, जिसे संसद ने 'राजभाषा अधिनियम, 1963' के माध्यम से अनिश्चित काल के लिए आगे बढ़ा दिया।
- 2. संविधान की दसवीं अनुसूची (जिसे 52वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया था) के अंतर्गत दलबदल के आधार पर अयोग्यता के प्रश्नों का निर्धारण करने की अंतिम शक्ति सदन के सभापति या अध्यक्ष को दी गई है, और उच्चतम न्यायालय ने 'किहोटो होलोहन वाद' (1992) में यह स्पष्ट किया था कि पीठासीन अधिकारी (Speaker/Chairman) द्वारा इस संबंध में लिया गया निर्णय पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे से बाहर है और इसे किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।
- 3. भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें बाद में विभिन्न संशोधनों (जैसे 21वें, 71वें और 92वें संविधान संशोधन) के माध्यम से बढ़ाकर वर्तमान में 22 कर दिया गया है, और किसी भी राजनीतिक दल को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा 'राष्ट्रीय दल' (National Party) के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए यह अनिवार्य है कि वह कम से कम चार अलग-अलग राज्यों में लोकसभा या विधानसभा चुनावों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत मत प्राप्त करे और साथ ही लोकसभा की कम से कम चार सीटें जीते।
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के भाग XVII के अनुच्छेद 343 के तहत संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी घोषित की गई है। मूल संविधान में यह व्यवस्था थी कि 15 वर्षों (1965 तक) तक सरकारी कार्यों में अंग्रेजी का प्रयोग जारी रहेगा, जिसे संसद ने राजभाषा अधिनियम, 1963 के जरिए अनिश्चितकाल तक के लिए बढ़ा दिया। कथन 2 गलत है: 'किहोटो होलोहन वाद' (1992) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि दसवीं अनुसूची के तहत पीठासीन अधिकारी द्वारा दलबदल के आधार पर लिया गया निर्णय न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के अधीन है, हालांकि न्यायालय ने यह भी कहा कि पीठासीन अधिकारी के निर्णय लेने से पहले न्यायिक हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। अतः 'न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर है' कहना गलत है। कथन 3 सही है: संविधान की आठवीं अनुसूची में मूल रूप से 14 भाषाएँ थीं, जिन्हें संशोधनों द्वारा 22 किया गया। साथ ही, चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार किसी दल को राष्ट्रीय दल की मान्यता के लिए चार राज्यों में 6% वैध मत और लोकसभा की 4 सीटें (या लोकसभा में 2% सीटें तीन अलग-अलग राज्यों से) प्राप्त होनी चाहिए। विषय की अधिक जानकारी के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
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भारतीय संविधान के भाग II (अनुच्छेद 5-11) के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों और 'भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 9 के स्पष्ट प्रावधान के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, तथा इस विषय पर अंतिम निर्णय लेने की अनन्य शक्ति भारत के उच्चतम न्यायालय के पास निहित है।
2. भारतीय नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत जन्म से नागरिकता (Citizenship by Birth) प्राप्त करने के नियम में संशोधन करते हुए यह अनिवार्य किया गया है कि 3 दिसंबर 2004 के पश्चात भारत में जन्मा वही व्यक्ति भारत का नागरिक होगा जिसके माता-पिता दोनों जन्म के समय भारत के नागरिक हों अथवा उनमें से एक भारत का नागरिक हो और दूसरा जन्म के समय अवैध प्रवासी (Illegal Migrant) न हो।
3. नागरिकता संशोधन अधिनियम, 2019 (CAA) के अंतर्गत अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश करने वाले हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा और उन्हें देशीयकरण (Naturalization) के माध्यम से नागरिकता प्राप्त करने के लिए निर्धारित निवास की सामान्य अवधि को 11 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष कर दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 74वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत नगरपालिकाओं के गठन, संरचना और वार्ड समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 243-Q के अनुसार प्रत्येक राज्य में हर शहरी क्षेत्र के लिए (क) छोटे नगरीय क्षेत्र के लिए नगर परिषद, और (घ) बड़े नगरीय क्षेत्र के लिए नगर निगम का गठन किया जाएगा, किंतु यदि किसी ऐसे शहरी क्षेत्र में या उसके किसी भाग में औद्योगिक स्थापनाएँ विद्यमान हैं, जिन्हें नगरपालिका सेवाएँ प्रदान करने या स्थापित करने के लिए उपयुक्त समझा जाए, तो राज्यपाल लोक अधिसूचना द्वारा ऐसे क्षेत्र को औद्योगिक नगरी (Industrial Township) के रूप में विनिर्दिष्ट कर सकेगा और वहाँ नगरपालिकाओं का गठन करना अनिवार्य नहीं होगा।
2. अनुच्छेद 243-S के प्रावधानों के तहत तीन लाख या उससे अधिक की जनसंख्या वाले प्रत्येक नगरपालिका क्षेत्र के भीतर एक या एक से अधिक वार्डों को मिलाकर एक या अधिक 'वार्ड समितियों' (Ward Committees) का गठन किया जाएगा, जिनकी संरचना और गठन से संबंधित नियम बनाने की शक्ति राज्य के राज्यपाल के पास अनन्य रूप से निहित है।
3. 74वें संविधान संशोधन के माध्यम से संविधान में नौवीं अनुसूची (Ninth Schedule) जोड़ी गई है, जिसके अंतर्गत बारहवीं अनुसूची में उल्लिखित 18 विषयों को नगरपालिकाओं की विधाई शक्तियों के अंतर्गत हस्तांतरित करने का स्पष्ट संवैधानिक प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु इन्हें उनके पद से हटाने की शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास होती है, राज्यपाल के पास नहीं।
2. संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों का कार्यकाल अपने पद ग्रहण करने की तिथि से 6 वर्ष की अवधि या 65 वर्ष की आयु प्राप्त कर लेने तक (इनमें से जो भी पहले हो) होता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (इनमें से जो भी पहले हो) तक होता है।
3. राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष अपने कार्यकाल की समाप्ति के पश्चात संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में अथवा किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होता है, किंतु वह भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन (Employment) का पात्र नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) के इतिहास, दर्शन और संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किया गया 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) ही आगे चलकर भारतीय संविधान की प्रस्तावना बना, जिसमें प्रस्तावना के आरंभिक शब्द 'हम, भारत के लोग' संयुक्त राष्ट्र संघ के घोषणा-पत्र से प्रेरित होकर जोड़े गए थे।
2. प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके माध्यम से इसमें 'समाजवादी' (Socialist), 'पंथनिरपेक्ष' (Secular) और 'अखंडता' (Integrity) शब्दों को जोड़ा गया, और यह संशोधन तत्कालीन स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की संस्तुतियों के आधार पर किया गया था।
3. उच्चतम न्यायालय ने 'एल.आई.सी. ऑफ इंडिया वाद' (1995) में स्पष्ट रूप से यह अभीिमत व्यक्त किया कि प्रस्तावना संविधान का एक आंतरिक और अभिन्न हिस्सा (Integral Part) है, जिसका उपयोग विधियों की व्याख्या करते समय और अस्पष्ट प्रावधानों के अर्थ को स्पष्ट करने के लिए किया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और लोकसभा व राज्यसभा के अंतःसंबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 109 के अनुसार धन विधेयक (Money Bill) केवल लोकसभा में ही पुनर्स्थापित किया जा सकता है और राज्यसभा इसे न तो अस्वीکار कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है, किंतु राज्यसभा को इस विधेयक पर अपनी सिफारिशें देने के लिए अधिकतम 30 दिन की समय-सीमा दी गई है।
2. अनुच्छेद 108 के अंतर्गत राष्ट्रपति को दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत करने की शक्ति प्राप्त है, और यह प्रावधान साधारण विधेयकों तथा वित्तीय विधेयकों (श्रेणी-I) दोनों पर लागू होता है, किंतु संविधान संशोधन विधेयकों या धन विधेयकों के मामले में संयुक्त बैठक बुलाने का कोई प्रावधान नहीं है।
3. जब लोकसभा द्वारा पारित कोई साधारण विधेयक राज्यसभा में भेजा जाता है और राज्यसभा द्वारा उसमें संशोधन किए बिना उसे वापस कर दिया जाता है या राज्यसभा उस पर कोई कार्रवाई नहीं करती, तो उस विधेयक के संबंध में राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त बैठक आहूत करने की शक्ति का प्रयोग तभी किया जा सकता है जब राज्यसभा में विधेयक प्राप्ति की तारीख से छह मास की अवधि व्यतीत हो चुकी हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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