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Indian Polity
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73वें संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज व्यवस्था किस अनुसूची में शामिल की गई?

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73वें संशोधन द्वारा पंचायती राज से संबंधित विषयों को 11वीं अनुसूची में शामिल किया गया।
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSCs) की स्वतंत्रता, उनके सदस्यों की सेवा शर्तों तथा उनके प्रतिवेदन (Reports) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 318 के अंतर्गत संघ लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तों के नियम निर्धारित करने की शक्ति राष्ट्रपति में निहित है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग के मामले में यह शक्ति केवल संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्राप्त है। 2. संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उसके पद से केवल राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही हटाया जा सकता है, भले ही वह राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य क्यों न हो, और इस प्रक्रिया में सिद्ध कदाचार के मामले में उच्चतम न्यायालय की प्रतिवेदन (Report) राष्ट्रपति के लिए अनिवार्य रूप से बाध्यकारी होती है। 3. संघ लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है, जिसे राष्ट्रपति संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जबकि राज्य लोक सेवा आयोग अपना वार्षिक प्रतिवेदन संबंधित राज्य के राज्यपाल को प्रस्तुत करता है, और राज्यपाल उसे राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखवाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी एवं प्रशासनिक संबंधों तथा अंतर-राज्यीय परिषद् (Inter-State Council) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 263 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह एक अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना कर सकता है, जिसका मुख्य कार्य राज्यों के बीच उत्पन्न विवादों की जाँच करना, उन विषयों पर सलाह देना जिनमें राज्यों का समान हित हो, तथा बेहतर नीति समन्वय हेतु संस्तुति करना है, और यह परिषद् एक स्थायी संवैधानिक निकाय है। 2. सरकारी आयोग (Sarkaria Commission, 1983-88) की सिफारिशों के आधार पर वर्ष 1990 में राष्ट्रपति के आदेश द्वारा अंतर-राज्यीय परिषद् की स्थापना की गई थी, जिसके अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं तथा सभी राज्यों के मुख्यमंत्री और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होते हैं। 3. अनुच्छेद 258 के अंतर्गत राष्ट्रपति, किसी राज्य की सरकार की सहमति से, उस सरकार को या उसके अधिकारियों को ऐसे कृत्यों को सौंप सकता है जो संघ की कार्यकारी शक्ति के अंतर्गत आते हैं, किंतु ऐसा करने के लिए संबंधित राज्य के विधानमंडल से विशेष बहुमत द्वारा अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13(2) के अनुसार, राज्य ऐसी कोई विधि नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है, और इस प्रकार बनाई गई प्रत्येक विधि शून्य होगी, बशर्ते वह उल्लंघन की मात्रा तक शून्य हो (आच्छादन का सिद्धांत - Doctrine of Eclipse)। 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'ए.के. गोपालन वाद (1950)' में अनुच्छेद 21 के अंतर्गत 'कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया' (Procedure Established by Law) की संकीर्ण व्याख्या को स्वीकार किया गया था, किंतु बाद में 'मेनका गांधी वाद (1978)' में न्यायालय ने इसे पलटते हुए अमेरिकी संविधान के समरूप 'विधि की उचित प्रक्रिया' (Due Process of Law) के सिद्धांतों को अनिवार्य रूप से शामिल करते हुए इसके दायरे का अभूतपूर्व विस्तार किया। 3. अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय को और अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता का दायरा (Territorial and Subject-matter Jurisdiction) मूल अधिकारों के प्रवर्तन के मामले में उच्चतम न्यायालय की तुलना में अधिक व्यापक और विस्तृत है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान में 'संशोधन' (Amendment) की प्रक्रिया किस अनुच्छेद में है? भारतीय संसद की विधाई प्रक्रिया और वित्तीय विधेयकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 117 के खंड (1) के अंतर्गत ऐसा कोई भी वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-I), जिसमें अनुच्छेद 110 में उल्लिखित मामलों के साथ-साथ अन्य विषय भी शामिल हों, राज्यसभा में पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है और उसे केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है, तथा इसे राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना पुनःस्थापित नहीं किया जा सकता है। 2. अनुच्छेद 117 के खंड (3) के अधीन आने वाले वित्तीय विधेयक (Financial Bill Category-II), जो केवल भारत की संचित निधि से व्यय आकर्षित करते हैं, को संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत किया जा सकता है, किंतु राष्ट्रपति की संस्तुति के बिना संसद का कोई भी सदन ऐसे विधेयक को पारित नहीं कर सकता है। 3. लोकसभा द्वारा पारित किसी साधारण विधेयक या वित्तीय विधेयक के संबंध में दोनों सदनों के बीच गतिरोध उत्पन्न होने पर राष्ट्रपति अनुच्छेद 108 के तहत संयुक्त बैठक (Joint Sitting) आहूत कर सकता है, और इस संयुक्त बैठक की अध्यक्षता अनिवार्य रूप से राज्यसभा के सभापति द्वारा की जाती है, जिनका पद देश के उपराष्ट्रपति के पास होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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