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Indian Polity
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भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद 'सर्वोच्च न्यायालय को एक अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) का दर्जा देता है?

Detailed Explanation

अनुच्छेद 129 के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय एक अभिलेख न्यायालय है, जिसके निर्णय भविष्य के मुकदमों के लिए साक्ष्य के रूप में मान्य होते हैं।
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भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण संशोधनों और आपातकालीन उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा का आधार 'आंतरिक अशांति' (Internal Disturbance) शब्द को प्रतिस्थापित कर 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) किया गया, तथा यह भी प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को केवल मंत्रिमंडल (Cabinet) के लिखित अनुमोदन के पश्चात ही राष्ट्रपति द्वारा जारी किया जा सकता है। 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा यह उपबंधित किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता है। 3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन की अधिकतम अवधि, बिना किसी विशेष अनुमोदन या समीक्षा के, लगातार बढ़ाई जाकर कुल 3 वर्ष तक की जा सकती है, किंतु 44वें संशोधन अधिनियम के पश्चात यह अनिवार्य कर दिया गया कि 1 वर्ष के पश्चात इसे आगे बढ़ाने के लिए यह आवश्यक है कि पूरे देश में या संबंधित राज्य के किसी भाग में राष्ट्रीय आपातकाल लागू हो तथा निर्वाचन आयोग यह प्रमाणित करे कि राज्य में विधानसभा के चुनाव कराना कठिन है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? संवैधानिक उपचारों का अधिकार (Right to Constitutional Remedies) किस अनुच्छेद में है? भारतीय संविधान के भाग-III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) शब्द की व्यापक परिभाषा दी गई है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के अलावा अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम और अधिसूचना जैसे प्रत्यायोजित विधान (Delegated Legislation) को भी शामिल किया गया है, किंतु इसके दायरे में संविधान संशोधन अधिनियम (Constitutional Amendment Acts) शामिल नहीं हैं। 2. अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, और यह शक्ति न्यायक्षेत्र (Jurisdiction) के मामले में उच्च न्यायालयों की अनुच्छेद 226 के तहत प्रदत्त रिट अधिकारिता से अधिक व्यापक है, क्योंकि सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के उल्लंघन पर ही नहीं बल्कि अन्य विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर भी रिट जारी कर सकता है। 3. अनुच्छेद 34 संसद को यह अधिकार देता है कि वह देश के किसी भी भू-भाग पर मार्शल लॉ (Military Law) लागू होने की स्थिति में, सरकारी कर्मचारियों या अन्य व्यक्तियों द्वारा शांति या व्यवस्था बनाए रखने के लिए किए गए किसी भी कार्य को वैध बनाने के लिए संसद द्वारा भूतलक्षी प्रभाव (Retrospective Effect) से क्षतिपूर्ति अधिनियम (Indemnity Act) बना सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के भाग III के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों (Fundamental Rights) और उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' (Law) की परिभाषा में संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा बनाए गए अधिनियमों के साथ-साथ अध्यादेश, आदेश, उप-विधि, नियम और रूढ़ि या प्रथा (Custom or usage) को भी शामिल किया गया है, बशर्ते उनका बल विधि जैसा हो। 2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'गोकक बंधु वाद' या 'केशवानंद भारती वाद' जैसे ऐतिहासिक मामलों में यह प्रतिपादित किया है कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किया गया संवैधानिक संशोधन भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' की परिभाषा के दायरे में आता है, जिसके कारण संसद किसी भी मूल अधिकार को संविधान संशोधन के माध्यम से समाप्त या सीमित नहीं कर सकती है। 3. अनुच्छेद 33 संसद को यह शक्ति प्रदान करता है कि वह सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, खुफिया संगठनों और दूरसंचार प्रणालियों से जुड़े कर्मियों के मूल अधिकारों पर राष्ट्रीय सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से विधि द्वारा निर्बंधन या प्रतिबंध लगा सकती है, और ऐसे कानूनों को केवल इस आधार पर असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता कि वे भाग III का उल्लंघन करते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के प्रथम भाग के अंतर्गत 'संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र' (अनुच्छेद 1-4) के वैधानिक और ऐतिहासिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार भारत का नाम 'इंडिया, अर्थात भारत' (India, that is Bharat) राज्यों का एक संघ होगा, जिसमें 'राज्यों का संघ' (Union of States) शब्द का प्रयोग डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए किया गया था कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने (Secession) का अधिकार नहीं है। 2. अनुच्छेद 2 संसद को ऐसी शर्तों और निबंधनों पर जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने या उसके नाम में परिवर्तन करने की शक्ति प्रदान करता है, और इस प्रकार के विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बाद ही संसद में प्रस्तुत किया जा सकता है, साथ ही संबंधित राज्य विधानमंडल का विचार राष्ट्रपति के लिए पूर्ण रूप से बाध्यकारी होता है। 3. अनुच्छेद 4 के अनुसार अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन नए राज्यों के प्रवेश या मौजूदा राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन करने के लिए बनाई गई विधियों को संविधान के अनुच्छेद 368 के प्रयोजन के लिए 'संविधान संशोधन' नहीं माना जाएगा, जिसका अर्थ है कि ऐसे कानून संसद द्वारा साधारण बहुमत (Simple Majority) से पारित किए जा सकते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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