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Indian Polity
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ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल के दौरान भारत में संवैधानिक विकास की प्रक्रिया में पारित विभिन्न अधिनियमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' पदनाम दिया गया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन किया गया, जिसके प्रथम गवर्नर-जनरल वॉरेन हेस्टिंग्स थे।
- 2. 1813 के चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया, किंतु चाय, चीनी और पूर्वी देशों के साथ व्यापार पर उसका एकाधिकार अगले 20 वर्षों के लिए बना रहा।
- 3. 1853 के चार्टर अधिनियम के द्वारा पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को पृथक किया गया, तथा इसके तहत विधान परिषद में छह नए पार्षदों को जोड़ा गया जिन्हें 'विधान पार्षद' (Legislative Councillors) कहा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट द्वारा बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' कहा गया और उसकी सहायता के लिए 4 सदस्यीय कार्यकारी परिषद का प्रावधान किया गया था। वॉरेन हेस्टिंग्स इस पद पर आसीन होने वाले पहले व्यक्ति थे। कथन 2 गलत है: 1813 के चार्टर अधिनियम द्वारा कंपनी के भारत के साथ व्यापारिक एकाधिकार को समाप्त कर दिया गया (यानी अन्य ब्रिटिश नागरिकों को भी व्यापार की अनुमति दी गई), किंतु चाय, चीन के साथ व्यापार और पूर्वी देशों के साथ चाय के व्यापार पर कंपनी का एकाधिकार बना रहा; पूर्ण एकाधिकार की समाप्ति 1833 के चार्टर एक्ट द्वारा हुई थी। कथन 3 सही है: 1853 के चार्टर अधिनियम ने पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और प्रशासनिक कार्यों को अलग किया और केंद्रीय विधान परिषद में 6 नए सदस्य जोड़े। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल पर विजिट करें।
Related Questions
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भारतीय उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) की अधिकारिता, शक्तियों और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के अंतर्गत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, और यदि इस परामर्श के तहत कोई ऐसा विवाद या प्रश्न जो किसी पूर्व-संविधान संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य इसी प्रकार की लिखत से उत्पन्न हुआ है, उच्चतम न्यायालय को भेजा जाता है, तो न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य (Mandatory) होता है।
2. संविधान के अनुच्छेद 136 के अधीन उच्चतम न्यायालय को भारत के राज्यक्षेत्र के किसी भी न्यायालय या अधिकरण द्वारा किसी वाद या मामले में दिए गए किसी भी निर्णय, डिक्री, निर्धारण, दंडादेश या आदेश की अपील के लिए विशेष लीव (Special Leave to Appeal) प्रदान करने की विवेकाधीन शक्ति प्राप्त है, और इस शक्ति का विस्तार सैन्य न्यायालयों (Military Tribunals or Courts Martial) के निर्णयों पर भी होता है।
3. अनुच्छेद 145 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी भी विधि के अधीन, राष्ट्रपति के अनुमोदन से, न्यायालय की पद्धति और प्रक्रिया को विनियमित करने के लिए नियम बनाने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें मामलों की सुनवाई के लिए न्यूनतम न्यायाधीशों की संख्या (Constitutional Bench) निर्धारित करना भी शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) और राज्य लोक सेवा आयोगों (SPSC) के कार्यों, उनके क्षेत्राधिकार, स्वायत्तता तथा वार्षिक प्रतिवेदनों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 320 के खंड (3) के अंतर्गत यह उपबंध किया गया है कि सिविल सेवाओं में नियुक्तियों के लिए और सिविल सेवाओं तथा पदों के लिए भर्ती की पद्धतियों से संबंधित सभी विषयों पर संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग से परामर्श किया जाएगा, किंतु यदि आयोग के परामर्श के विरुद्ध सरकार कोई निर्णय लेती है, तो उस परामर्श की अवहेलना करने के कारणों को सदन के समक्ष रखना अनिवार्य नहीं है।
2. संविधान के अनुच्छेद 321 के अनुसार, संसद या राज्य का विधानमंडल, क्रमशः संघ लोक सेवा आयोग या राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यों के दायरे का विस्तार करके उन्हें किसी स्थानीय प्राधिकारी, निगम या अन्य लोक निकाय (Public Institution) के अधीन आने वाली सेवाओं की नियुक्तियों से संबंधित मामलों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में शामिल करने के लिए विधि बना सकता है।
3. संविधान के अनुच्छेद 323 के प्रावधानों के तहत संघ लोक सेवा आयोग प्रत्येक वर्ष राष्ट्रपति को अपने द्वारा किए गए कार्यों की रिपोर्ट प्रस्तुत करता है, और राष्ट्रपति उस रिपोर्ट को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखवाता है, जिसमें उन मामलों का विवरण भी शामिल होता है जिनमें आयोग के परामर्श को स्वीकार नहीं किया गया था और उसके कारण क्या थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के अंतर्गत उपराष्ट्रपति की निर्वाचन पद्धति, पद की शक्तियों और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद के संवैधानिक उपबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 66 के अनुसार उपराष्ट्रपति का निर्वाचन संसद के दोनों सदनों (निर्वाचित और मनोनीत दोनों सदस्यों) के सदस्यों से मिलकर बनने वाले निर्वाचक गण के सदस्यों द्वारा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है, जिसमें राज्य विधानसभाओं के सदस्यों को कोई भूमिका नहीं होती है।
2. संविधान के अनुच्छेद 75(1A) के अनुसार प्रधानमंत्री सहित मंत्रिपरिषद के सदस्यों की कुल संख्या लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के पंद्रह प्रतिशत से अधिक नहीं होगी, और यह प्रतिबंध केवल केंद्र सरकार पर लागू होता है, राज्य सरकारों के मंत्रिपरिषद की संख्या पर इसका कोई संवैधानिक प्रभाव नहीं है।
3. केंद्रीय मंत्रिपरिषद के सामूहिक उत्तरदायित्व के सिद्धांत (Collective Responsibility) के तहत यदि लोकसभा द्वारा किसी एक कैबिनेट मंत्री के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया जाता है, तो पूरी मंत्रिपरिषद को त्यागपत्र देना पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा संविधान में भाग IX जोड़ा गया है जिसका शीर्षक 'पंचायते' है, और इसके अनुच्छेद 243-G के अंतर्गत पंचायतों की शक्तियां, प्राधिकार और उत्तरदायित्व निर्धारित किए गए हैं जिसके तहत उन्हें आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने का कार्य सौंपा गया है।
2. अधिनियम के अनुसार प्रत्येक राज्य में पंचायतों के सभी स्तरों पर सीटों का आरक्षण अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए उनकी जनसंख्या के अनुपात में अनिवार्य रूप से किया जाता है, तथा महिलाओं के लिए सभी स्तरों पर कुल सीटों का कम से कम एक-तिहाई (33%) भाग आरक्षित होना अनिवार्य है, जिसमें महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें SCs और STs के लिए आरक्षित सीटों के भीतर भी उप-आरक्षित हो सकती हैं।
3. पंचायतों के कार्यकाल के संदर्भ में यह प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक पंचायत का कार्यकाल अपनी पहली बैठक के लिए नियत तारीख से पांच वर्ष का होता है, और यदि किसी पंचायत को समय से पूर्व विघटित कर दिया जाता है, तो विघटन की तिथि से छह महीने की अवधि के भीतर चुनाव कराया जाना अनिवार्य है, किंतु यदि बची हुई अवधि छह महीने से कम है, तो नई पंचायत का गठन करना आवश्यक नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय संविधान के 73वें संशोधन अधिनियम, 1992 के अंतर्गत पंचायती राज संस्थाओं (भाग IX) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा प्रत्येक राज्य में पंचायतों के लिए तीन-स्तरीय (ग्राम, मध्यवर्ती और जिला स्तर) संरचना अनिवार्य की गई है, किंतु जिन राज्यों की जनसंख्या 20 लाख से अधिक नहीं है, उन्हें मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत का गठन करने से छूट दी गई है।
2. पंचायती राज संस्थाओं के सभी स्तरों पर प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से भरी जाने वाली कुल सीटों का कम से कम एक-तिहाई (33 प्रतिशत) भाग महिलाओं के लिए आरक्षित होना अनिवार्य है, तथा यह आरक्षण महिलाओं के लिए केवल सामान्य सीटों तक ही सीमित है और इसे पंचायतों के अध्यक्षों (Chairpersons) के पदों पर लागू नहीं किया जा सकता है।
3. अधिनियम के अनुच्छेद 243-G के अनुसार, राज्य का विधानमंडल पंचायतों को ऐसी शक्तियाँ और प्राधिकार प्रदान कर सकता है जो आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएँ तैयार करने तथा ग्यारहवीं अनुसूची में सूचीबद्ध 29 विषयों के क्रियान्वयन से संबंधित हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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