BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
8 views

भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्य की कार्यपालिका (राज्यपाल और मुख्यमंत्री) की शक्तियों, कृत्यों और उनके संवैधानिक अंतर्संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 163 के तहत राज्यपाल को सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा, और राज्यपाल द्वारा अपने स्वविवेक से किए जाने वाले कृत्यों को छोड़कर अन्य कृत्यों के निर्वहन में इस सलाह के अनुसार कार्य करना अनिवार्य है, तथा राज्यपाल द्वारा दी गई सलाह की किसी न्यायालय में जाँच की जा सकती है।
  2. 2. राज्य के महाधिवक्ता (Advocate-General) की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है और वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है, तथा उसे राज्य की विधानसभा या विधानपरिषद की बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, किंतु उसे मतदान करने का कोई संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है।
  3. 3. अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री का यह संवैधानिक कर्तव्य है कि वह राज्य के प्रशासन से संबंधित मंत्रिपरिषद के सभी विनिश्चय राज्यपाल को संसूचित करे और राज्यपाल द्वारा माँगी गई ऐसी जानकारी दे, तथा यदि राज्यपाल ऐसा अपेक्षा करे तो किसी ऐसे विषय को जिस पर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया है, किंतु मंत्रिपरिषद ने विचार नहीं किया है, परिषद के समक्ष विचार के लिए रखे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 163(3) के अनुसार इस बात की किसी न्यायालय में जाँच नहीं की जाएगी कि मंत्रियों ने राज्यपाल को कोई सलाह दी या नहीं और यदि दी तो क्या दी। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 165 के तहत महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा होती है और उसे सदन में बोलने का अधिकार है किंतु मत देने का नहीं। कथन 3 सत्य है; अनुच्छेद 167 मुख्यमंत्री के दायित्वों को स्पष्ट करता है जिसके तहत वह मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी राज्यपाल को देता है। विस्तृत अध्ययन के लिए भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पर विजिट करें।
Share:

Related Questions

भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत निर्वाचन आयोग को संसद, राज्य legislatures, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति प्रदान की गई है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया तथा उसके सेवा शर्तें उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती हैं। 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 126 के अनुसार चुनाव प्रचार समाप्त होने के समय (अर्थात मतदान समाप्त होने के लिए नियत समय से ठीक पहले के 48 घंटों की अवधि) के दौरान किसी भी सार्वजनिक सभा, जुलूस या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से चुनावी प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध होता है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'लोक जनहित फाउंडेशन बनाम भारत संघ' मामले में दिए गए निर्देशों के तहत चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों के लिए यह अनिवार्य कर दिया है कि वे अपने उम्मीदवारों के चयन के समय उनके आपराधिक पृष्ठभूमि (Criminal Antecedents) का विवरण स्थानीय समाचार पत्रों और टीवी चैनलों में प्रकाशित करवाएं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) और चुनाव सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, और मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से हटाने की प्रक्रिया तथा आधार वही होते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के होते हैं, जबकि अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय पदमुक्त किया जा सकता है। 2. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 77 के अनुसार, राजनीतिक दलों द्वारा लोकसभा या विधानसभा चुनावों के लिए अपने 'स्टार प्रचारकों' की सूची नामांकन की अंतिम तिथि से सात दिन के भीतर संबंधित राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सौंपनी अनिवार्य होती है। 3. सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक निर्णयों और चुनाव सुधारों के तहत, वर्ष 2013 में लोकहित फाउंडेशन मामले के बाद से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) के साथ 'वीवीपैट' (VVPAT) प्रणाली को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया, जिससे मतदाताओं को यह सत्यापित करने का अवसर मिलता है कि उनका मत उनके द्वारा चुने गए उम्मीदवार को ही गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधानसभा' और 'विधान परिषद' की शक्तियों, विधाई प्रक्रियाओं तथा उनके आपसी संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के अनुसार, किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, और विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से सार्वभौमिक मताधिकार के आधार पर किया जाता है। 2. धन विधेयक (Money Bill) के मामले में राज्य की विधान परिषद की स्थिति अत्यंत सीमित होती है; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक को जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन के अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर वापस करना होता है, और यदि वह ऐसा नहीं करती है तो वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे विधानसभा ने पारित किया था। 3. साधारण विधेयक (Ordinary Bill) के संबंध में विधान परिषद किसी विधेयक को प्रथम बार में अधिकतम 3 महीने और दूसरी बार में अधिकतम 1 महीने—अर्थात कुल 4 महीने तक ही रोक सकती है, तथा दोनों सदनों के बीच गतिरोध को समाप्त करने के लिए संसद की तरह राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का संवैधानिक प्रावधान संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के पहले राष्ट्रपति? भारतीय संविधान की प्रस्तावना (उद्देशिका) और उसके ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की प्रस्तावना पंडित जवाहरलाल नेहरू द्वारा 13 दिसंबर 1946 को संविधान सभा में प्रस्तुत और 22 जनवरी 1947 को स्वीकार किए गए 'उद्देश्य प्रस्ताव' (Objectives Resolution) पर आधारित है, और इसे संविधान के लागू होने के पश्चात केवल एक बार (42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा) संशोधित किया गया है जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए। 2. 'बेरुबारी यूनियन वाद (1960)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से अभिनिर्धारित किया था कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का एक अभिन्न अंग (Integral Part) है, तथा संसद अनुच्छेद 368 के तहत इसमें संशोधन करते हुए इसके किसी भी मूल भाग को हटा सकती है। 3. 'केशवानंद भारती वाद (1973)' और 'एल.आई.सी. ऑफ इंडिया वाद (1995)' में उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्ववर्ती निर्णय को पलटते हुए यह व्यवस्था दी कि प्रस्तावना संविधान का एक आंतरिक और अभिन्न अंग है, और यद्यपि यह देश की विधायिका को कोई नई शक्ति प्रदान नहीं करती और न ही उसकी शक्तियों पर कोई प्रतिबंध लगाती है, तथापि यह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का एक अनिवार्य हिस्सा है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.