BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Indian Polity
5 views

राज्य विधानमंडल के अंतर्गत 'विधानसभा' और 'विधान परिषद' की शक्तियों, विधाई प्रक्रियाओं तथा उनके आपसी संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 171 के प्रावधानों के अनुसार, किसी राज्य की विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या उस राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, और विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से सार्वभौमिक मताधिकार के आधार पर किया जाता है।
  2. 2. धन विधेयक (Money Bill) के मामले में राज्य की विधान परिषद की स्थिति अत्यंत सीमित होती है; विधानसभा द्वारा पारित धन विधेयक को जब विधान परिषद के पास भेजा जाता है, तो विधान परिषद को उसे बिना किसी संशोधन के अधिकतम 14 दिनों की अवधि के भीतर वापस करना होता है, और यदि वह ऐसा नहीं करती है तो वह विधेयक दोनों सदनों द्वारा उस रूप में पारित मान लिया जाता है जिस रूप में उसे विधानसभा ने पारित किया था।
  3. 3. साधारण विधेयक (Ordinary Bill) के संबंध में विधान परिषद किसी विधेयक को प्रथम बार में अधिकतम 3 महीने और दूसरी बार में अधिकतम 1 महीने—अर्थात कुल 4 महीने तक ही रोक सकती है, तथा दोनों सदनों के बीच गतिरोध को समाप्त करने के लिए संसद की तरह राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक (Joint Sitting) बुलाए जाने का संवैधानिक प्रावधान संविधान में स्पष्ट रूप से किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 171(1) के अनुसार विधान परिषद की कुल सदस्य संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या की एक-तिहाई से अधिक नहीं हो सकती, किंतु न्यूनतम संख्या 40 निर्धारित की गई है। साथ ही, विधान परिषद के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष रूप से नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा होता है (इसके सदस्य स्थानीय निकायों, स्नातकों, शिक्षकों, और विधानसभा सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं तथा कुछ राज्यपाल द्वारा मनोनीत होते हैं)। कथन 2 पूरी तरह सत्य है; संविधान के अनुच्छेद 198 के तहत धन विधेयक केवल विधानसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है और विधान परिषद इसे न तो अस्वीकार कर सकती है और न ही इसमें संशोधन कर सकती है, उसे अधिकतम 14 दिनों के भीतर इसे लौटाना होता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि साधारण विधेयक के मामले में विधान परिषद अधिकतम 4 महीने तक विधेयक को रोक सकती है (प्रथम बार 3 महीने और द्वितीय बार 1 महीना), किंतु सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 197 के तहत राज्य विधानमंडल के सदनों में गतिरोध को सुलझाने के लिए **संयुक्त बैठक (Joint Sitting) का कोई प्रावधान नहीं है**; राज्य विधानसभा की इच्छा ही अंततः सर्वोपरि होती है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें भारतीय संविधान एवं राजव्यवस्था पोर्टल।
Share:

Related Questions

भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त महान्यायवादी को भारत सरकार के विधि अधिकारी के रूप में देश के किसी भी न्यायालय में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में भाग लेने और बोलने का अधिकार है, किंतु विधायी मामलों में उसे किसी भी स्थिति में निर्णायक मत (Casting Vote) देने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं है। 2. अनुच्छेद 148 के अंतर्गत भारत के नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है और उसे उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के समान ही केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन (Address) के आधार पर ही हटाया जा सकता है, न कि राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत। 3. CAG द्वारा तैयार किए गए संघ के लेखा परीक्षण प्रतिवेदनों को राष्ट्रपति द्वारा संसद के दोनों सदनों के पटल पर रखा जाता है, जिसके पश्चात संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) उन प्रतिवेदनों की संवीक्षा करती है, जबकि राज्य के लेखा परीक्षण प्रतिवेदन संबंधित राज्यपाल को सौंपे जाते हैं जो उन्हें राज्य के विधानमंडल के समक्ष रखते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? पंकिल जल (मटमैले पानी) के निसादन के लिए किसका प्रयोग किया जाता है? भारतीय संविधान के अंतर्गत नागरिकता के प्रावधानों (अनुच्छेद 5-11) और नागरिकता अधिनियम, 1955 के संशोधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 9 के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी विदेशी राज्य की नागरिकता अर्जित कर लेता है, तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वतः समाप्त हो जाएगी, और इस संबंध में संसद द्वारा कोई पृथक् कानून बनाने की आवश्यकता नहीं होती है। 2. नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 (CAA) द्वारा पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों के प्रवासियों को नागरिकता प्रदान करने के लिए एक विशेष प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके तहत उन पर विदेशी अधिनियम, 1946 (Foreigners Act, 1946) और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के उपबंध लागू नहीं होंगे, बशर्ते उन्होंने 31 दिसंबर 2014 से पहले भारत में प्रवेश किया हो। 3. संविधान के अनुच्छेद 11 के तहत संसद को यह पूर्ण शक्ति प्रदान की गई है कि वह नागरिकता के अर्जन और समाप्ति तथा नागरिकता से संबंधित अन्य सभी विषयों के संबंध में कोई भी उपबंध कर सकेगी, और संसद द्वारा पारित इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए नागरिकता अधिनियम, 1955 अधिनियमित किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय संविधान के अंतर्गत राज्यों के उच्च न्यायालयों (High Courts) और अधीनस्थ न्यायालयों की संरचना, शक्तियों तथा क्षेत्राधिकार के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 217 के अनुसार उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश को उसके पद से राष्ट्रपति द्वारा केवल सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया (संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित समावेदन) के आधार पर ही हटाया जा सकता है, किंतु इसके लिए संबंधित राज्य के राज्यपाल की पूर्व सहमति अनिवार्य होती है। 2. संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय को रिट (Writ) जारी करने की जो शक्ति प्राप्त है, वह न केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए बल्कि 'अन्य प्रयोजनों' (जैसे कि साधारण विधिक अधिकारों के उल्लंघन पर) के लिए भी प्रयोग की जा सकती है, और इस दृष्टि से उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उच्चतम न्यायालय के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्रदत्त रिट क्षेत्राधिकार की तुलना में अधिक विस्तृत है। 3. संविधान के अनुच्छेद 233 के प्रावधानों के अंतर्गत किसी राज्य में जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति, पोस्टिंग और पदोन्नति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात ही की जाती है, और न्यायिक सेवा के अन्य सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा राज्य लोक सेवा आयोग तथा उच्च न्यायालय से परामर्श के आधार पर नियमों के तहत की जाती है। 4. संविधान के अनुच्छेद 235 के तहत राज्य के सभी अधीनस्थ न्यायालयों पर नियंत्रण, जिसमें जिला न्यायालयों के नीचे के न्यायालयों के अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रमोशन, पदस्थापन और अनुशासनिक नियंत्रण शामिल है, पूर्णतः संबंधित राज्य सरकार (राज्यपाल) के प्रशासनिक क्षेत्राधिकार में निहित होता है, और इसमें उच्च न्यायालय की कोई प्रशासनिक भूमिका नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत में 'आपातकाल' के दौरान किस अनुच्छेद को निलंबित नहीं किया जा सकता?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.