BaalVikas
Menu
BPSC TRE 4.0
Asked 2 months ago · Viewed 24 times

बिहार की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और सिंचाई प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण नहर प्रणाली है, जिसके अंतर्गत डेहरी-ऑन-सोन से निकलने वाली पूर्वी और पश्चिमी नहरें मुख्य रूप से रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद और पटना जिलों के कृषि क्षेत्रों को सिंचित करती हैं।
  2. 2. गंडक परियोजना भारत और नेपाल की एक संयुक्त परियोजना है, जिसके तहत वाल्मीकिनगर (बिहार) के समीप एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे निकलने वाली तिरहुत नहर और सारण मुख्य नहर प्रणाली इस क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई धमनियां हैं।
  3. 3. कोसी परियोजना, जिसे 'बिहार का शोक' कही जाने वाली नदी पर बनाया गया है, के अंतर्गत हनुमाननगर (नेपाल) में एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे पूर्वी कोसी मुख्य नहर और पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली के माध्यम से उत्तर-पूर्वी बिहार के विस्तृत भू-भाग को सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा प्रदान की जाती है।
  4. 4. बड़ुआ और दुर्गावती जलाशय परियोजनाएं दक्षिण बिहार के पठारी और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों (जैसे कैमूर और बांका) में वर्षा जल के संचयन और स्थानीय स्तर पर कृषि के लिए सिंचाई की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से निर्मित प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजनाएं हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन बिहार की सिंचाई एवं नदी घाटी परियोजनाओं के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। सोन नहर प्रणाली बिहार की सबसे प्राचीन नहर परियोजना है जिसकी शुरुआत 1874 में हुई थी। गंडक परियोजना भारत और नेपाल की संयुक्त परियोजना है। कोसी परियोजना बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है, तथा बड़ुआ और दुर्गावती परियोजनाएं दक्षिण बिहार के पठारी क्षेत्रों की प्रमुख सिंचाई योजनाएं हैं। इस तरह के अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नों और अध्ययन सामग्री के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।
Share:
अगला प्रश्न → आनुवंशिकी और विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ग्रेगर… ← पिछला प्रश्न बिहार के प्रमुख किसान आंदोलनों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के…

Related Questions

→ भारतीय संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना), संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान की उद्देशिका में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए हैं, और चूंकि उद्देशिका न्यायपालिका द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) नहीं है, इसलिए इसमें संशोधन करने की संसद की शक्ति पर अनुच्छेद 368 के अंतर्गत भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार 'भारत, अर्थात् इंडिया, राज्यों का संघ है', जिसमें 'राज्यों का संघ' (Union of States) शब्दावली का चयन डॉ. बी.आर. अंबेडकर के अनुसार इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए किया गया था कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और न ही किसी राज्य को संघ से अलग होने का अधिकार है। 3. नए राज्यों के प्रवेश या स्थापना की संसद की शक्ति (अनुच्छेद 2) और नए राज्यों के निर्माण तथा वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन की शक्ति (अनुच्छेद 3) के अंतर्गत संसद द्वारा साधारण बहुमत (सामान्य विधायी प्रक्रिया) से पारित कानून के माध्यम से भारतीय भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपा जा सकता है, जिसके लिए अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन की कोई आवश्यकता नहीं होती है। 4. वर्ष 1960 के 'बेरुबारी यूनियन मामले' में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि उद्देशिका संविधान का भाग नहीं है, जिसे बाद में वर्ष 1973 के ऐतिहासिक 'केशवानंद भारती वाद' में पलटते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उद्देशिका संविधान का अभिन्न अंग है और इसमें निहित 'मूल ढांचा' (Basic Structure) को संसद द्वारा संशोधित नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना। 2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया। 3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी। 4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के दौरान बिहार में हुए किसान आंदोलनों एवं सभाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1919-20 में मधुबनी और दरभंगा क्षेत्र में स्वामी विद्यानंद के नेतृत्व में किसानों ने 'रामायण' की चौपाइयों का पाठ कर जमींदारों के अवैध उत्पीड़न, बेगार प्रथा और गो-चर भूमि पर कब्ज़े के खिलाफ एक शक्तिशाली आंदोलन चलाया था। 2. वर्ष 1929 में स्वामी सहजानंद सरस्वती द्वारा 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' की स्थापना की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य जमींदारों द्वारा कृषकों पर किए जा रहे अन्यायों के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ना और बेदखली के अधिकारों का विरोध करना था। 3. वर्ष 1936 में लखनऊ में आयोजित अखिल भारतीय किसान सभा के पहले सम्मेलन में स्वामी सहजानंद सरस्वती को इसका अध्यक्ष चुना गया था, जबकि एन.जी. रंगा को इसका महासचिव बनाया गया था। 4. बकाश्त भूमि (ऐसी भूमि जिसे जमींदारों ने किसानों द्वारा लगान न चुका पाने के कारण छीन लिया था लेकिन जो जोत-कोड़ के अधिकार के अंतर्गत किसानों के पास ही थी) की वापसी के लिए बिहार में 'बकाश्त संघर्ष' चलाया गया, जिसका नेतृत्व मुख्य रूप से प्रांतीय किसान सभा और कार्यानंद शर्मा ने किया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार की राजनीति एवं प्रशासनिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बिहार विधान परिषद (Legislative Council) के सदस्यों का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जिसमें एक-तिहाई सदस्य स्थानीय संस्थाओं के निर्वाचकों द्वारा, एक-तिहाई विधानसभा सदस्यों द्वारा, एक-बारहवां भाग अध्यापकों द्वारा तथा एक-बारहवां भाग स्नातकों द्वारा चुने जाते हैं, और शेष एक-तिहाई सदस्यों को राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत किया जाता है। 2. बिहार के प्रशासनिक ढांचे में जब किसी जिले में विधि-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो पुलिस प्रशासन पर नियंत्रण और दिशा-निर्देशन के लिए 'जिला दंडाधिकारी' (District Magistrate - DM) सर्वोच्च प्राधिकारी होता है, जिसके पास पुलिस अधिनियम के तहत पुलिस बल के उपयोग और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू करने की अनन्य शक्ति होती है। 3. राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) का पद बिहार सरकार के प्रशासनिक संवर्ग में सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का होता है, और यह पद मंत्रिमंडल सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख होने के साथ-साथ राज्य के सभी विभागों के बीच नीतिगत समन्वय स्थापित करने का मुख्य केंद्र बिंदु होता है। 4. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल संविधान के अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के तहत 6 वर्ष की अवधि अथवा 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित किया गया है, तथा अपने पद से हटने के बाद वे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्ति के पात्र होते हैं, किंतु किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष नहीं बन सकते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? → बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है? → सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.