BPSC TRE 4.0
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राजकुमार शुक्ल के विशेष अनुरोध पर महात्मा गांधी चंपारण आए थे, जहाँ 'तीनकथा पद्धति' के अंतर्गत यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों से उनकी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करने का अनुबंध कराया जाता था, जिसके विरुद्ध यह सत्याग्रह भारत में गांधीजी का पहला सफल सविनय प्रयोग बना।
- 2. चंपारण जाँच समिति (Champarana Agrarian Committee) के एक सदस्य के रूप में ब्रिटिश सरकार द्वारा महात्मा गांधी को भी इस आयोग का सदस्य मनोनीत किया गया था, तथा इस समिति की संस्तुतियों के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित किया गया, जिसके तहत तीनकथा प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया और अवैध रूप से वसूले गए धन का एक हिस्सा किसानों को वापस लौटाया गया।
- 3. चंपारण सत्याग्रह की सफलता के दौरान महात्मा गांधी के साथ बराज किशोर प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह, आचार्य कृपलानी और मधुलि जैसे स्थानीय प्रबुद्ध वकीलों और नेताओं ने महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान किया, जिससे बिहार में राष्ट्रीय राजनीति की एक मजबूत नींव पड़ी।
- 4. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के आगमन के समय बिहार में विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया, और इसी काल में सदाकत आश्रम से मजहरुल हक के संपादन में 'द मदरलैंड' अखबार निकाला गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। चंपारण सत्याग्रह (1917) भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महात्मा गांधी का पहला सफल सत्याग्रह था। राजकुमार शुक्ल के आमंत्रण पर गांधीजी चंपारण गए और वहाँ तीनकथा प्रणाली (3/20 भाग पर नील की खेती) के खिलाफ किसानों को न्याय दिलाया। चंपारण जाँच समिति के सदस्यों में महात्मा गांधी स्वयं भी एक प्रमुख सदस्य थे, जिनकी रिपोर्ट के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1917' पारित हुआ और यह प्रथा समाप्त हुई। इस आंदोलन में डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिंह आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा। असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में शिक्षा के प्रसार और राष्ट्रवादी पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए बिहार नेशनल कॉलेज और 'द मदरलैंड' अखबार की शुरुआत हुई। इस तरह के महत्वपूर्ण प्रश्नों और अध्ययन सामग्री के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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सुभाषचंद्र बोस और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA / आज़ाद हिंद फौज) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1939 के त्रिपुरी कांग्रेस अधिवेशन में पट्टाभि सीतारमैया को पराजित कर सुभाषचंद्र बोस दूसरी बार कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए थे, किंतु कार्यसमिति के गठन के विवाद के कारण उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया और मई 1939 में कांग्रेस के भीतर ही 'फॉरवर्ड ब्लॉक' (Forward Bloc) नामक वामपंथी संगठन की स्थापना की।
2. जर्मनी से बर्लिन रेडियो के माध्यम से प्रसारण करते हुए सुभाषचंद्र बोस को सर्वप्रथम 'नेताजी' की मानद उपाधि से एडॉल्फ हिटलर के सहयोगियों और जर्मन अधिकारियों द्वारा संबोधित किया गया था, और उन्होंने वहीं से भारतीय स्वतंत्रता के लिए 'जय हिंद' का नारा लोकप्रिय बनाया था।
3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' की सर्वोच्च कमान जुलाई 1943 में औपचारिक रूप से सुभाषचंद्र बोस को सौंप दी गई, जिन्होंने सिंगापुर के कैथेड्रल हॉल में 'दिल्लीचलो' का प्रसिद्ध नारा दिया और 21 अक्टूबर 1943 को सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) के गठन की घोषणा की।
4. आज़ाद हिंद फौज के सैनिकों पर ब्रिटिश सरकार द्वारा लाल किले (रेड फोर्ट) में ऐतिहासिक मुकदमे चलाए गए, जिनका बचाव करने वाली कांग्रेस की कानूनी बचाव समिति के प्रमुख वकील भूलाभाई देसाई थे, जिसमें जवाहरलाल नेहरू, तेज बहादुर सप्रू, के.एन. काटजू और असफल डिफेंस के बावजूद यह मुकदमा राष्ट्रीय एकता का एक महान प्रतीक बन गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान प्रकाशित होने वाले समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और उनके संपादकों/संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. अमृत बाजार पत्रिका (Amrita Bazar Patrika) - शिशिर कुमार घोष एवं मोतीलाल घोष
2. बॉम्बे क्रॉनिकल (The Bombay Chronicle) - फिरोजशाह मेहता
3. इंडिपेंडेंट (The Independent) - मोतीलाल नेहरू
4. कॉमनवील (Commonweal) - गोपाल कृष्ण गोखले
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
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आनुवंशिकी और विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रेगर जॉन मेंडल ने मटर के पौधे (पाइसम सेटिवम) पर अपने प्रयोगों के आधार पर वंशागति के दो मुख्य नियमों — पृथक्करण का नियम (Law of Segregation) और स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment) — का प्रतिपादन किया, जिसमें स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम एकसंकर संकरण (Monohybrid Cross) पर आधारित है।
2. हार्डी-वेनबर्ग साम्य् (Hardy-Weinberg Equilibrium) के सिद्धांत के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाले जनसंख्या में जीन आवृत्तियाँ और एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों दर पीढ़ियाँ स्थिर रहती हैं, बशर्ते कि उस पर उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवासन और आनुवंशिक विचलन जैसे विकासवादी कारक कार्य न कर रहे हों।
3. लैमार्कवाद (Lamarckism) का मूल सिद्धांत 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of Acquired Characters) है, जिसके अनुसार जीवनकाल में जीवों द्वारा अर्जित शारीरिक परिवर्तन अगली पीढ़ी में वंशागत होते हैं, जिसका खंडन वीज़मैन (Weismann) द्वारा अपने जर्मप्लासम सिद्धांत (Germplasm Theory) के माध्यम से किया गया था।
4. समजात अंग (Homologous Organs) वे अंग होते हैं जिनकी उत्पत्ति और मूल संरचना समान होती है किंतु उनके कार्य भिन्न होते हैं, जो अपसारी विकास (Divergent Evolution) का एक स्पष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और सिंचाई प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण नहर प्रणाली है, जिसके अंतर्गत डेहरी-ऑन-सोन से निकलने वाली पूर्वी और पश्चिमी नहरें मुख्य रूप से रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद और पटना जिलों के कृषि क्षेत्रों को सिंचित करती हैं।
2. गंडक परियोजना भारत और नेपाल की एक संयुक्त परियोजना है, जिसके तहत वाल्मीकिनगर (बिहार) के समीप एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे निकलने वाली तिरहुत नहर और सारण मुख्य नहर प्रणाली इस क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई धमनियां हैं।
3. कोसी परियोजना, जिसे 'बिहार का शोक' कही जाने वाली नदी पर बनाया गया है, के अंतर्गत हनुमाननगर (नेपाल) में एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे पूर्वी कोसी मुख्य नहर और पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली के माध्यम से उत्तर-पूर्वी बिहार के विस्तृत भू-भाग को सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा प्रदान की जाती है।
4. बड़ुआ और दुर्गावती जलाशय परियोजनाएं दक्षिण बिहार के पठारी और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों (जैसे कैमूर और बांका) में वर्षा जल के संचयन और स्थानीय स्तर पर कृषि के लिए सिंचाई की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से निर्मित प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजनाएं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है?
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सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
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