BPSC TRE 4.0
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बिहार की राजनीति एवं प्रशासनिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बिहार विधान परिषद (Legislative Council) के सदस्यों का निर्वाचन एक निर्वाचक मंडल द्वारा होता है, जिसमें एक-तिहाई सदस्य स्थानीय संस्थाओं के निर्वाचकों द्वारा, एक-तिहाई विधानसभा सदस्यों द्वारा, एक-बारहवां भाग अध्यापकों द्वारा तथा एक-बारहवां भाग स्नातकों द्वारा चुने जाते हैं, और शेष एक-तिहाई सदस्यों को राज्यपाल द्वारा साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारिता आंदोलन और समाज सेवा के क्षेत्र से मनोनीत किया जाता है।
- 2. बिहार के प्रशासनिक ढांचे में जब किसी जिले में विधि-व्यवस्था की गंभीर स्थिति उत्पन्न होती है, तो पुलिस प्रशासन पर नियंत्रण और दिशा-निर्देशन के लिए 'जिला दंडाधिकारी' (District Magistrate - DM) सर्वोच्च प्राधिकारी होता है, जिसके पास पुलिस अधिनियम के तहत पुलिस बल के उपयोग और दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 144 लागू करने की अनन्य शक्ति होती है।
- 3. राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) का पद बिहार सरकार के प्रशासनिक संवर्ग में सबसे वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का होता है, और यह पद मंत्रिमंडल सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख होने के साथ-साथ राज्य के सभी विभागों के बीच नीतिगत समन्वय स्थापित करने का मुख्य केंद्र बिंदु होता है।
- 4. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल संविधान के अनुच्छेद 316 के प्रावधानों के तहत 6 वर्ष की अवधि अथवा 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो) तक निर्धारित किया गया है, तथा अपने पद से हटने के बाद वे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या सदस्य के रूप में नियुक्ति के पात्र होते हैं, किंतु किसी अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष नहीं बन सकते।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इस प्रश्न के विश्लेषण के अनुसार, कथन 1 असत्य है क्योंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 171 के अनुसार विधान परिषद में राज्यपाल द्वारा मनोनीत सदस्यों की कुल संख्या का **एक-छठवां भाग (1/6)** होती है, न कि एक-तिहाई। कथन 4 भी असत्य है क्योंकि BPSC के अध्यक्ष या सदस्य अपने कार्यकाल की समाप्ति के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष या अन्य राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति के पात्र हो सकते हैं, किंतु वे भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य नियोजन के पात्र नहीं होते। इसके विपरीत, कथन 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं; जिला दंडाधिकारी (DM) के पास विधि-व्यवस्था बनाए रखने की सर्वोच्च शक्ति होती है और मुख्य सचिव राज्य प्रशासनिक तंत्र का प्रमुख होता है। ऐसे ही महत्वपूर्ण प्रश्नों और संपूर्ण तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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बिहार के प्रमुख किसान आंदोलनों और उनके नेतृत्वकर्ताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1922-23 में मुंगेर जिले में 'किसान सभा' का गठन मुहम्मद जुबैर और श्रीकृष्ण सिंह के प्रयासों से किया गया था, जिसका उद्देश्य जमींदारों द्वारा किसानों से अवैध रूप से वसूले जाने वाले 'हक-हकूक' और लगान के विरुद्ध कानूनी और संगठित प्रतिरोध खड़ा करना था।
2. स्वामी विद्यानंद ने वर्ष 1919-20 के दौरान दरभंगा और मधुबनी क्षेत्र के किसानों को संगठित कर जमींदारी जुल्मों, गो-चर भूमि पर अवैध कब्जे और बेगार प्रथा के खिलाफ एक शक्तिशाली आंदोलन चलाया था।
3. वर्ष 1934 में पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में आयोजित एक बैठक के दौरान 'बिहार प्रांतीय किसान सभा' के बैनर तले स्वामी सहजानंद सरस्वती की अध्यक्षता में 'अखिल भारतीय किसान समिति' की रूपरेखा तैयार की गई थी, जिसके परिणामस्वरूप वर्ष 1936 में लखनऊ में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन हुआ।
4. बकाश्त भूमि की वापसी के लिए चलाए गए संघर्ष के दौरान कार्यानंद शर्मा ने मुंगेर के बड़हिया टाल क्षेत्र में एक शक्तिशाली किसान आंदोलन का नेतृत्व किया था, जिसमें किसानों ने 'न लगान देंगे, न बेगार करेंगे' का नारा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार की बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और सिंचाई प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सोन नदी घाटी परियोजना बिहार की सबसे पुरानी और महत्वपूर्ण नहर प्रणाली है, जिसके अंतर्गत डेहरी-ऑन-सोन से निकलने वाली पूर्वी और पश्चिमी नहरें मुख्य रूप से रोहतास, भोजपुर, औरंगाबाद और पटना जिलों के कृषि क्षेत्रों को सिंचित करती हैं।
2. गंडक परियोजना भारत और नेपाल की एक संयुक्त परियोजना है, जिसके तहत वाल्मीकिनगर (बिहार) के समीप एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे निकलने वाली तिरहुत नहर और सारण मुख्य नहर प्रणाली इस क्षेत्र की प्रमुख सिंचाई धमनियां हैं।
3. कोसी परियोजना, जिसे 'बिहार का शोक' कही जाने वाली नदी पर बनाया गया है, के अंतर्गत हनुमाननगर (नेपाल) में एक बराज का निर्माण किया गया है, जिससे पूर्वी कोसी मुख्य नहर और पश्चिमी कोसी नहर प्रणाली के माध्यम से उत्तर-पूर्वी बिहार के विस्तृत भू-भाग को सिंचाई और बाढ़ सुरक्षा प्रदान की जाती है।
4. बड़ुआ और दुर्गावती जलाशय परियोजनाएं दक्षिण बिहार के पठारी और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों (जैसे कैमूर और बांका) में वर्षा जल के संचयन और स्थानीय स्तर पर कृषि के लिए सिंचाई की आवश्यकता को पूरा करने के उद्देश्य से निर्मित प्रमुख मध्यम सिंचाई परियोजनाएं हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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रॉलेट एक्ट (1919), खिलाफत आंदोलन तथा असहयोग आंदोलन के कालक्रम, घटनाओं और उनके वैचारिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1919 में पारित 'रॉलेट एक्ट' (अराजक और क्रांतिकारी अपराध अधिनियम) के तहत ब्रिटिश सरकार को बिना वारंट के किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को गिरफ्तार करने और बिना मुकदमा चलाए जेल में रखने का असीमित अधिकार मिल गया था, जिसके विरोध में महात्मा गांधी ने 'रॉलेट सत्याग्रह' के तहत अखिल भारतीय स्तर पर 'सत्याग्रह सभा' की स्थापना की और 6 अप्रैल 1919 को देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया।
2. वर्ष 1919-20 के दौरान तुर्की के खलीफा के अधिकारों और सुन्नी इस्लामिक धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए भारत में शुरू किए गए 'खिलाफत आंदोलन' की केंद्रीय खिलाफत समिति के अखिल भारतीय सम्मेलन (दिल्ली, नवंबर 1919) के अध्यक्ष के रूप में महात्मा गांधी को चुना गया था, जिन्होंने इसे हिंदू-मुस्लिम एकता के एक अद्वितीय अवसर के रूप में देखा।
3. सितंबर 1920 में कलकत्ता में हुए कांग्रेस के विशेष अधिवेशन में असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव का जमकर विरोध किया गया था, तथा चित्तरंजन दास (C.R. Das), मदन मोहन मालवीय और एनी टेंट ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया था, जबकि लाला लाजपत राय ने इस अधिवेशन की अध्यक्षता की थी।
4. फरवरी 1922 में चौरी-चौरा (गोरखपुर जिला) में हुई हिंसक घटना के कारण महात्मा गांधी ने बारदोली में कांग्रेस की बैठक बुलाकर तत्काल प्रभाव से असहयोग आंदोलन को वापस लेने की घोषणा कर दी, जिसके बाद मोतीलाल नेहरू और चित्तरंजन दास ने गांधीजी के इस निर्णय से असंतुष्ट होकर कांग्रेस के भीतर ही 'स्वराज पार्टी' की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार की राजनीति एवं प्रशासनिक परिदृश्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार विधान परिषद (Legislative Council) एक स्थायी सदन है, जिसका सृजन या उत्सादन भारतीय संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत संसद द्वारा संबंधित राज्य की विधानसभा के विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के आधार पर किया जाता है।
2. बिहार के प्रशासनिक ढांचे में सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी 'मुख्य सचिव' (Chief Secretary) होता है, जो राज्य के मंत्रिमंडल सचिवालय का प्रमुख होने के साथ-साथ सभी प्रशासनिक विभागों के बीच समन्वय स्थापित करता है।
3. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है, किंतु उन्हें उनके पद से हटाने की शक्ति केवल भारत के राष्ट्रपति के पास होती है, जो संविधान के अनुच्छेद 317 के प्रावधानों के तहत निहित है।
4. जिला स्तर पर 'जिला मजिस्ट्रेट' (District Magistrate) के रूप में कार्य करते समय आईएएस अधिकारी कानून-व्यवस्था और राजस्व प्रशासन दोनों का नियंत्रण संभालता है, तथा इस पद का सृजन सर्वप्रथम लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में बंगाल प्रेसिडेंसी में किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है?
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