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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के भाग-III (मूल अधिकार), भाग-IV (नीति निर्देशक तत्व) और भाग-IVक (मूल कर्त्तव्य) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को और अनुच्छेद 226 के अंतर्गत उच्च न्यायालयों को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट (Writs) जारी करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) के दौरान अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छोड़कर अन्य किसी भी मूल अधिकार के प्रवर्तन के लिए न्यायालय जाने के अधिकार को राष्ट्रपति द्वारा निलंबित किया जा सकता है।
- 2. राज्य के नीति निर्देशक तत्व (DPSP) 'आयरिश संविधान' से प्रेरित हैं और संविधान के अनुच्छेद 37 के अनुसार इन्हें देश की शासन व्यवस्था में मौलिक स्थान प्राप्त है तथा कानून बनाते समय इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य होगा, भले ही ये न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय (Justiciable) न हों।
- 3. सरदार स्वर्ण सिंह समिति की अनुशंसा पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया था, तथा वर्तमान में संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत कुल 11 मूल कर्तव्य शामिल हैं, जिनमें 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए शिक्षा का अवसर प्रदान करना 86वें संविधान संशोधन, 2002 द्वारा जोड़ा गया था।
- 4. नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत आने वाले 'समान नागरिक संहिता' (Uniform Civil Code) का उल्लेख अनुच्छेद 44 में किया गया है, जो कि एक न्यायोचित (Justiciable) अधिकार है और इसे लागू करने के लिए राज्य सरकारें बाध्य हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। अनुच्छेद 32 और 226 रिट अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं और राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 20 व 21 को छोड़कर अन्य मूल अधिकारों का निलंबन किया जा सकता है। नीति निर्देशक तत्व (DPSP) आयरिश संविधान से लिए गए हैं, अनुच्छेद 37 के तहत गैर-प्रवर्तनीय हैं किंतु शासन में मौलिक हैं। सरदार स्वर्ण सिंह समिति की सिफारिश पर 42वें संशोधन द्वारा मूल कर्तव्य जोड़े गए और 86वें संशोधन (2002) द्वारा 11वाँ मूल कर्तव्य जोड़ा गया। कथन 4 असत्य है क्योंकि अनुच्छेद 44 में वर्णित 'समान नागरिक संहिता' नीति निर्देशक तत्वों का भाग है, जो कि गैर-प्रवर्तनीय (Non-justiciable) है, न कि न्यायोचित। अधिक तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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साइमन कमीशन भारत कब आया?
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भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास और औपनिवेशिक शिक्षा नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चार्ल्स वुड का शिक्षा पर प्रेषित घोषणा-पत्र (Wood's Despatch, 1854), जिसे 'भारतीय शिक्षा का मैग्ना कार्टा' कहा जाता है, ने जन-साधारण की शिक्षा के उत्तरदायित्व को कंपनी सरकार का मुख्य कर्तव्य माना और प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा तथा उच्च शिक्षा के स्तर पर अंग्रेजी माध्यम के प्रयोग की सिफारिश की थी।
2. लॉर्ड मैकाले के मिनट (1835) और आंग्ल-प्राच्य विवाद (Anglican-Orientalist Controversy) के पश्चात विलियम बेंटिंक की सरकार ने अंग्रेजी शिक्षा अधिनियम पारित किया, जिसका मुख्य उद्देश्य यूरोपीय साहित्य और विज्ञान का प्रसार करना तथा पाश्चात्य शिक्षा के माध्यम से प्रशासन के लिए सस्ते लिपिक तैयार करना था।
3. हंटर शिक्षा आयोग (1882) का मुख्य गठन प्राथमिक शिक्षा की प्रगति की समीक्षा करना था, और इस आयोग ने प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण नवनिर्मित जिला बोर्डों और नगरपालिका बोर्डों (स्थानीय निकायों) को सौंपने की जोरदार वकालत की थी।
4. सैडलर विश्वविद्यालय आयोग (1917-19) ने कलकत्ता विश्वविद्यालय की समस्याओं की जांच के साथ-साथ स्कूली शिक्षा की अवधि 12 वर्ष करने की सिफारिश की थी, और साथ ही यह भी सुझाव दिया था कि विश्वविद्यालयों पर सरकारी नियंत्रण को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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विश्व की प्रमुख जलसंधियों और महासागरीय गर्तों की भौगोलिक अवस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सुंडा जलसंधि (Sunda Strait) - जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ती है और यह सुमात्रा तथा जावा द्वीप के बीच स्थित है।
2. सुब्रह्मण्यम गर्त (Sunda Trench) - यह हिंद महासागर का सबसे गहरा गर्त है, जो जावा द्वीप के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है।
3. मैगलन जलसंधि (Magellan Strait) - यह प्रशांत महासागर और अटलांटिक महासागर को जोड़ती है तथा दक्षिण अमेरिका के मुख्य भूभाग और टिएरा डेल फ्युगो द्वीप समूह को अलग करती है।
4. प्यूर्टो रिको गर्त (Puerto Rico Trench) - यह आर्कटिक महासागर का सबसे गहरा गर्त है, जो कैरिबियन सागर के उत्तरी छोर पर स्थित है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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बिहार में 1974 के 'छात्र आंदोलन' और 'जयप्रकाश नारायण (जेपी) आंदोलन' के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और इसके वैचारिक-राजनीतिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1974 में छात्रों द्वारा बिहार की खाद्यान्न संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किए गए इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया, तो उन्होंने छात्र संघर्ष समिति के इस प्रस्ताव को एक शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और इसका दायरा केवल बिहार तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर तानाशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ संघर्ष का रूप लेगा।
2. जेपी आंदोलन के दौरान पटना के गांधी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक रैली में जयप्रकाश नारायण ने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और नैतिक क्षेत्रों में बुनियादी परिवर्तन लाने के लिए सात क्रांतियों का एक व्यापक वैचारिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसे 'संपूर्ण क्रांति' का नाम दिया गया।
3. इस आंदोलन के चरम पर पहुँचने के बाद, केंद्र सरकार द्वारा आपातकाल (Emergency) की घोषणा किए जाने से ठीक पहले, जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संसद मार्च और देश भर में नागरिक स्वतंत्रता की बहाली के लिए चलाए गए अभियान ने भारतीय राजनीति में पहली बार एक ऐसी गैर-कांग्रेसवादी लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर वर्ष 1977 में केंद्र में पहली बार जनता पार्टी की गैर-कांग्रेसी सरकार के गठन की मार्ग प्रशस्त किया।
4. जेपी आंदोलन के दौरान बिहार विधानसभा के विघटन की मांग को लेकर चलाए गए अभियान में यह प्रावधान किया गया था कि आंदोलनकारी विधायक यदि जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते हैं, तो उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देने के लिए जनता द्वारा विवश किया जाएगा, जिसे 'राजनीतिक उत्तरदायित्व और प्रत्याह्वान' (Recall) का लोकतांत्रिक सिद्धांत कहा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास और विशेष रूप से तुगलक तथा लोदी राजवंशों के शासनकाल में केंद्रीय एवं प्रांतीय प्रशासन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में केंद्रीय मंत्रिपरिषद को 'मजलिस-ए-खलवत' कहा जाता था, तथा उसके काल में कृषि विभाग के रूप में 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य लगान वसूलना नहीं बल्कि योजनाबद्ध तरीके से बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना था।
2. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में वंशानुगत प्रशासन को बढ़ावा देते हुए जागीरदारी और इक्ता प्रणाली को पुनः वंशानुगत बना दिया, साथ ही उसने सैनिकों और अधिकारियों को नगद वेतन देने की प्रथा को पूरी तरह समाप्त कर दिया और उसके स्थान पर 'वजह' (राजस्व अनुदान) देने की व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया।
3. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने तुर्क और ताजिक सरदारों के विपरीत अफगान सरदारों की तुष्टिनिति और समानता के सिद्धांत को अपनाया, जिसके तहत वह सुल्तान की गद्दी पर न बैठकर दरबारियों के बीच कालीन पर बैठता था और सरदारों को 'मंसूर-ए-अली' कहता था।
4. सिकंदर लोदी ने प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए आगरा शहर की स्थापना (वर्ष 1504) की और उसे अपनी राजधानी बनाया, तथा उसने भूमि की पैमाइश के लिए 'गज-ए-सिकंदरी' का प्रचलन शुरू किया जो 39 अंगुल का होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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