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बिहार में 1974 के 'छात्र आंदोलन' और 'जयप्रकाश नारायण (जेपी) आंदोलन' के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य और इसके वैचारिक-राजनीतिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मार्च 1974 में छात्रों द्वारा बिहार की खाद्यान्न संकट, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के खिलाफ शुरू किए गए इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए जब जयप्रकाश नारायण (जेपी) ने 'संपूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया, तो उन्होंने छात्र संघर्ष समिति के इस प्रस्ताव को एक शर्त पर स्वीकार किया कि आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक रहेगा और इसका दायरा केवल बिहार तक सीमित न रहकर राष्ट्रीय स्तर पर तानाशाही प्रवृत्तियों के खिलाफ संघर्ष का रूप लेगा।
  2. 2. जेपी आंदोलन के दौरान पटना के गांधी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक रैली में जयप्रकाश नारायण ने सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक और नैतिक क्षेत्रों में बुनियादी परिवर्तन लाने के लिए सात क्रांतियों का एक व्यापक वैचारिक ढांचा प्रस्तुत किया, जिसे 'संपूर्ण क्रांति' का नाम दिया गया।
  3. 3. इस आंदोलन के चरम पर पहुँचने के बाद, केंद्र सरकार द्वारा आपातकाल (Emergency) की घोषणा किए जाने से ठीक पहले, जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में संसद मार्च और देश भर में नागरिक स्वतंत्रता की बहाली के लिए चलाए गए अभियान ने भारतीय राजनीति में पहली बार एक ऐसी गैर-कांग्रेसवादी लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति को जन्म दिया, जिसने आगे चलकर वर्ष 1977 में केंद्र में पहली बार जनता पार्टी की गैर-कांग्रेसी सरकार के गठन की मार्ग प्रशस्त किया।
  4. 4. जेपी आंदोलन के दौरान बिहार विधानसभा के विघटन की मांग को लेकर चलाए गए अभियान में यह प्रावधान किया गया था कि आंदोलनकारी विधायक यदि जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते हैं, तो उन्हें अपने पद से त्यागपत्र देने के लिए जनता द्वारा विवश किया जाएगा, जिसे 'राजनीतिक उत्तरदायित्व और प्रत्याह्वान' (Recall) का लोकतांत्रिक सिद्धांत कहा गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?

Detailed Explanation

बिहार में 1974 का छात्र आंदोलन और लोकनायक जयप्रकाश नारायण (जेपी) द्वारा संचालित 'संपूर्ण क्रांति' भारतीय राजनीतिक इतिहास का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ था। मार्च 1974 में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के विरुद्ध शुरू हुए छात्र असंतोष को जेपी ने अहिंसक राष्ट्रव्यापी परिवर्तन के रूप में ढाला। उन्होंने राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वैचारिक, शैक्षणिक और नैतिक—इन सात क्षेत्रों में आमूल-चूल परिवर्तन के लिए 'संपूर्ण क्रांति' का सिद्धांत दिया। इस आंदोलन ने लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और तानाशाही प्रवृत्तियों के विरोध में देश की दिशा बदल दी। अधिक अध्ययन सामग्री और परीक्षा की तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें। अतः दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं।
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बिहार के छात्र आंदोलन और जयप्रकाश नारायण (जेपी आंदोलन) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन की शुरुआत मार्च 1974 में 'बिहार छात्र संघर्ष समिति' के गठन के साथ हुई थी, जिसका मुख्य तात्कालिक कारण बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, खाद्यान्न की कमी और शैक्षणिक संस्थानों में व्याप्त भ्रष्टाचार था। 2. जयप्रकाश नारायण ने इस आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए 'सम्पूर्ण क्रांति' (Total Revolution) का आह्वान किया, जिसमें सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक, वैचारिक और शैक्षणिक क्षेत्रों में आमूल-चूल परिवर्तन का लक्ष्य रखा गया था। 3. 5 जून 1974 को पटना के गांधी मैदान में आयोजित ऐतिहासिक रैली में जयप्रकाश नारायण ने इंदिरा गांधी सरकार के विरुद्ध 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है' का नारा दिया था और इसे एक राष्ट्रव्यापी सत्याग्रह के रूप में विस्तारित किया था। 4. जेपी आंदोलन के दौरान ही जनता पार्टी की सरकार का गठन केंद्र में हुआ और बिहार में कर्पूरी ठाकुर के नेतृत्व में गैर-कांग्रेस सरकार बनी, तथा इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा देश में आपातकाल (Emergency) की घोषणा की गई थी, जिसके तहत जयप्रकाश नारायण को गिरफ्तार कर चंडीगढ़ में नजरबंद किया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? संघनन क्या है? 1757 से 1857 के मध्य भारत में ब्रिटिश शासन के विरुद्ध हुए अन्य जन आंदोलनों और जनजातीय विद्रोहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'संथाल विद्रोह' (1855-56) के प्रमुख नेता सिद्धू, कान्हू, चांद और भैरव थे, जिन्होंने राजमहल की पहाड़ियों के क्षेत्र (दामिन-ए-कोह) में महाजनों, साहूकारों और ब्रिटिश अधिकारियों के दमन के विरुद्ध पारंपरिक हथियारों के साथ सशस्त्र संघर्ष किया था। 2. 'पागल पंथी विद्रोह' एक अर्ध-धार्मिक संप्रदाय था, जिसकी स्थापना करम शाह ने की थी, परंतु इस विद्रोह का सर्वाधिक उग्र और व्यापक रूप उनके पुत्र टीटू मीर के नेतृत्व में बंगाल के शेरपुर क्षेत्र में जमींदारों के भारी करों के विरुद्ध देखने को मिला था। 3. 'कोल विद्रोह' (1831-32)छोटा नागपुर क्षेत्र में हुआ एक प्रमुख जनजातीय आंदोलन था, जिसका नेतृत्व बुद्ध भगत, जोआ भगत और मदारा सिंह जैसे नेताओं ने किया था, तथा यह विद्रोह मुख्य रूप से उनकी भूमि पर बाहरी लोगों (दिकुओं) के प्रवेश और लगान वृद्धि के विरोध में था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं? जलियांवाला बाग हत्याकांड कब हुआ था? बंगाल विभाजन एवं स्वदेशी आंदोलन (1905) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन का वास्तविक उद्देश्य राजनीतिक रूप से जागरूक बंगाली राष्ट्रवाद की गति को मंद करना और प्रशासनिक सुविधा के नाम पर हिंदू तथा मुस्लिम बहुसंख्यक क्षेत्रों का विभाजन कर सांप्रदायिक फूट डालना था। 2. 16 अक्टूबर 1905 को जिस दिन बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधी और रवींद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर 'आमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार के साथ-साथ रचनात्मक कार्यों (आत्मनिर्भरता) पर विशेष जोर दिया गया, जिसके अंतर्गत आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल्स एंड फार्मास्युटिकल्स' नामक प्रसिद्ध स्वदेशी उद्योग की स्थापना की थी। 4. स्वदेशी और बहिष्कार प्रस्ताव का कांग्रेस के स्तर पर औपचारिक समर्थन दिसंबर 1905 के बनारस अधिवेशन में मिला, जिसकी अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, जबकि अगले वर्ष (1906) के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' को अपने लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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