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BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान में प्रदत्त मूल अधिकार, राज्य के नीतिनिदेशक तत्वों (DPSP) और मूल कर्तव्यों के अंतर्संबंधों तथा उनके न्यायिक पुनरावलोकन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. केशवानंद भारती मामले (1973) के पश्चात न्यायपालिका ने यह स्पष्ट किया कि यद्यपि मौलिक अधिकार और नीतिनिदेशक तत्व एक-दूसरे के पूरक हैं, तथापि किसी भी स्थिति में संसद अनुच्छेद 368 के तहत संविधान संशोधन करके नीतिनिदेशक तत्वों को लागू करने के लिए भाग III (मूल अधिकारों) के प्रावधानों को पूर्णतः निष्प्रभावी या समाप्त नहीं कर सकती यदि वह संविधान के 'मूल ढांचा' (Basic Structure) का उल्लंघन करता हो।
- 2. स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़े गए अनुच्छेद 31-C के अंतर्गत यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 39(b) और 39(c) में वर्णित नीतिनिदेशक तत्वों को प्रभावी बनाने के लिए बनाए गए किसी भी कानून को इस आधार पर शून्य घोषित नहीं किया जा सकता कि वह अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है।
- 3. वर्ष 2002 में 86वें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम से जोड़े गए 11वें मूल कर्तव्य (अनुच्छेद 51A(k)) के अंतर्गत 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के माता-पिता या संरक्षक का यह कर्तव्य बनाया गया कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के अवसर प्रदान करें, तथा इसी संशोधन द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21A जोड़कर शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार का दर्जा दिया गया।
- 4. मूल कर्तव्य, जो कि मुख्य रूप से आयरिश संविधान से प्रेरित होकर भारतीय संविधान के भाग IV-A में शामिल किए गए हैं, प्रकृति में न्यायोचित (Justiciable) हैं, अर्थात उनके उल्लंघन की स्थिति में देश के उच्च न्यायालयों या उच्चतम न्यायालय द्वारा रिट (Writ) जारी करके इन्हें प्रवर्तित कराया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। केशवानंद भारती मामले (1973) में उच्चतम न्यायालय ने मूल ढांचे के सिद्धांत का प्रतिपादन किया जिसके तहत संसद मूल अधिकारों में संशोधन तो कर सकती है परंतु संविधान के मूल स्वरूप को नष्ट नहीं कर सकती। 42वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 31-C में संशोधन कर अनुच्छेद 39(b) और (c) के DPSP को अनुच्छेद 14 और 19 के मूल अधिकारों पर प्राथमिकता दी गई। 86वें संशोधन (2002) द्वारा अनुच्छेद 21A (शिक्षा का अधिकार) और अनुच्छेद 51A(k) (मूल कर्तव्य) जोड़े गए। हालांकि, कथन 4 असत्य है क्योंकि मूल कर्तव्य (Fundamental Duties) प्रकृति में गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, अर्थात् इन्हें सीधे अदालतों द्वारा प्रवर्तित नहीं कराया जा सकता है, और ये आयरिश नहीं बल्कि तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) के संविधान से प्रेरित हैं। अधिक अभ्यास और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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प्राचीन भारतीय इतिहास के विभिन्न स्रोतों, महाजनपदों के उदय और मौर्य एवं गुप्त काल की प्रशासनिक व आर्थिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंगूत्तर निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध और जैन ग्रंथ छठी शताब्दी ईसा पूर्व के सोलह महाजनपदों की सूची प्रदान करते हैं, जिनमें 'वज्जी संघ' विश्व के सबसे प्राचीन गणराज्यों (Republics) में से एक माना जाता है, जिसकी राजधानी वैशाली थी।
2. मौर्य प्रशासनिक व्यवस्था में 'अध्यक्ष' विभिन्न विभागों के अधीक्षक (Superintendents) होते थे, तथा कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार कृषि विभाग के प्रमुख को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था, जो राजकीय भूमि (सीता भूमि) की कृषि का प्रबंधन करता था।
3. गुप्तकाल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का 1/6 भाग हुआ करती थी, और इस काल में भूमि अनुदान (Land Grants) देने की प्रथा में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य के सामंतवादी व्यवस्था (Feudalism) के लक्षण स्पष्ट रूप से उभरने लगे थे।
4. सातवाहन वंश के शासकों ने सबसे पहले बड़े पैमाने पर ब्राह्मणों और बौद्ध भिक्षुओं को कर-मुक्त भूमि अनुदान देने की परंपरा शुरू की थी, तथा उनके अभिलेखों में भूमिदान के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारों के हस्तांतरण का भी उल्लेख मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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सुभाषचंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज (INA) के ऐतिहासिक घटनाक्रमों एवं उनके योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आज़ाद हिंद फौज' की संपूर्ण कमान औपचारिक रूप से सुभाषचंद्र बोस को वर्ष 1943 के मध्य में सौंपी गई थी, जिसके पश्चात उन्होंने अक्टूबर 1943 में सिंगापुर में 'अस्थाई स्वतंत्र भारत सरकार' (आर्हुत सरकार) के गठन की घोषणा की थी।
2. आज़ाद हिंद फौज की सैन्य टुकड़ियों ने जापानियों के सहयोग से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर नियंत्रण स्थापित किया था, जिन्हें सुभाषचंद्र बोस ने क्रमशः 'शहीद द्वीप' और 'स्वराज द्वीप' नाम दिया था, तथा आईएनए की मुख्य सेना ने इम्फाल और कोहिमा अभियान के दौरान सबसे पहले मुख्य भारतीय भूमि पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया था।
3. वर्ष 1945 के प्रसिद्ध लाल किले के मुकदमे (Red Fort Trials) में आज़ाद हिंद फौज के शीर्ष अधिकारियों - मेजर जनरल शाहनवाज खान, कर्नल प्रेम सहगल और कर्नल गुरदयाल सिंह ढिल्लों - पर ब्रिटिश सरकार द्वारा देशद्रोह का मुकदमा चलाया गया था, जिनकी प्रतिरक्षा के लिए बनी बचाव समिति (Defense Committee) का नेतृत्व भूलाभाई देसाई ने किया था।
4. आज़ाद हिंद सरकार को धुरी राष्ट्रों (Axis Powers) जिनमें मुख्य रूप से जापान, जर्मनी, इटली तथा उनके सहयोगियों सहित कुल नौ देशों ने औपचारिक मान्यता प्रदान की थी, और सुभाषचंद्र बोस ने इस सरकार के सर्वोच्च कमांडर (Supreme Commander) के रूप में कार्य किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारत के महान्यायवादी (Attorney General for India) और संसद (लोकसभा एवं राज्य सभा) की विधाई प्रक्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 76 के तहत नियुक्त भारत का महान्यायवादी देश का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है, जिसे अपने कर्तव्यों के पालन के दौरान भारत के राज्यक्षेत्र के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार प्राप्त है, तथा उसे संसद के दोनों सदनों या उनकी संयुक्त बैठकों में बोलने और भाग लेने का अधिकार तो है, परंतु उसे किसी भी परिस्थिति में मतदान (Vote) करने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
2. अनुच्छेद 88 के अनुसार, महान्यायवादी को संसद के किसी भी सदन की बैठकों में या उसकी समितियों में (यदि उसे सदस्य के रूप में नामित किया गया हो) बोलने की स्वतंत्रता और विशेषाधिकार प्राप्त होते हैं, और वह एक सांसद की तरह ही संसदीय विशेषाधिकारों और उन्मुक्तियों का हकदार होता है।
3. राज्य सभा एक स्थायी सदन है जो कभी भंग नहीं होता, और इसके सदस्यों का निर्वाचन आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धति के अनुसार एकल संक्रमणीय मत द्वारा राज्य की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाता है, तथा इसके एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष की समाप्ति पर सेवानिवृत्त होते हैं।
4. लोकसभा में बिहार राज्य से कुल 40 सीटें आवंटित हैं, जबकि राज्य सभा में बिहार के लिए 16 सीटें निर्धारित हैं, और लोकसभा के विघटन के साथ ही राज्य सभा भी स्वतः विघटित हो जाती है क्योंकि यह उच्च सदन के रूप में संसद का अभिन्न अंग है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार सरकार द्वारा राज्य में डिजिटल शासन, प्रशासनिक पारदर्शिता और नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू किए गए प्रमुख पोर्टलों और डिजिटल पहलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बिहार सरकार के विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग तथा सामान्य प्रशासन विभाग के सहयोग से विकसित 'बिहार ई-गवर्नेंस पोर्टल' के माध्यम से नागरिकों को जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, भू-अभिलेख और विभिन्न सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं का लाभ ऑनलाइन डिजिटल माध्यम से प्रदान किया जा रहा है।
2. भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण के लिए शुरू किए गए 'बिहार भूमि पोर्टल' (Biharbhoomi) पर नागरिक अपनी जमाबंदी पंजी, भू-नक्शा और खसरा विवरण घर बैठे ऑनलाइन देख सकते हैं, जिससे भूमि विवादों में उल्लेखनीय कमी आई है।
3. राज्य के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति, शिक्षकों के दैनिक कार्यों और मध्याह्न भोजन (Mid-Day Meal) योजना की पारदर्शी निगरानी के लिए शिक्षा विभाग द्वारा 'ई-शिक्षाकोष' (E-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप का सफल संचालन किया जा रहा है।
4. बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन के तहत शुरू किया गया 'लोक सेवा अधिकार अधिनियम' (RTPS) पोर्टल नागरिकों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर जाति, आवासीय, आय प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक लोक सेवाएँ ऑनलाइन प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) के ऐतिहासिक घटनाक्रम और स्वतंत्रता आंदोलन में बिहार की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकठिया प्रणाली' के अंतर्गत प्रत्येक बीघा (20 कट्ठा) भूमि के तीन कट्ठा हिस्से पर नील की अनिवार्य खेती करना कानूनी रूप से अनिवार्य था, जिसके विरुद्ध राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी ने चंपारण का दौरा किया था।
2. चंपारण पहुँचने पर ब्रिटिश प्रशासन द्वारा महात्मा गांधी को जिला छोड़ने का आदेश दिया गया, जिसके उल्लंघन पर उन पर मुकदमा चलाया गया, किंतु जनसमर्थन के दबाव और देशव्यापी विरोध के कारण सरकार को मुकदमे को वापस लेने और गांधीजी को जाँच करने की अनुमति देने के लिए विवश होना पड़ा।
3. इस सत्याग्रह की सफलता के बाद गठित 'चंपारण अग्रूर कमेटी' (Champarun Agrarian Committee) के सदस्यों में महात्मा गांधी भी एक प्रमुख सदस्य के रूप में शामिल थे, और इस समिति की संस्तुति के आधार पर 'चंपारण कृषि अधिनियम, 1918' पारित किया गया, जिसने अंततः तीनकठिया प्रथा को अवैध घोषित कर समाप्त कर दिया।
4. चंपारण सत्याग्रह के दौरान ही बिहार के स्थानीय नेताओं जैसे राजेन्द्र प्रसाद, ब्रजकिशोर प्रसाद, अनुग्रह नारायण सिन्हा, और धरणीधर प्रसाद ने गांधीजी के साथ मिलकर प्रमुख भूमिका निभाई, और इसी आंदोलन की अपार सफलता से प्रभावित होकर रविशंकर शुक्ल ने गांधीजी को 'महात्मा' की उपाधि से सम्मानित किया था।
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