बिहार में हाल ही में लागू की गई प्रशासनिक, आर्थिक और लोक कल्याणकारी योजनाओं तथा डिजिटल पहलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011' के अंतर्गत नागरिकों को तय समय-सीमा के भीतर आवश्यक सेवाएँ प्रदान करने की वैधानिक गारंटी दी जाती है, और इसके सफल क्रियान्वयन के लिए 'सर्विस प्लस' पोर्टल के माध्यम से जाति, आय और निवास प्रमाण पत्रों के ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई है।
- 2. बिहार सरकार द्वारा राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए 'बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति' (खाद्य प्रसंस्करण एवं टेक्सटाइल) के तहत निवेशकों को पूँजीगत सब्सिडी और स्टांप ड्यूटी में विशेष छूट प्रदान की जा रही है, तथा इसी क्रम में राज्य में इथेनॉल उत्पादन को भी प्राथमिकता दी गई है।
- 3. राज्य के विद्यालयों में विद्यार्थियों और शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति तथा प्रशासनिक अनुश्रवण (Monitoring) को सुदृढ़ करने के लिए बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (BEPC) द्वारा 'ई-शिक्षाकोष' (e-Shikshakosh) पोर्टल और मोबाइल ऐप का संचालन किया जा रहा है।
- 4. 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' का संचालन समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जाता है, जिसके अंतर्गत उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को ₹10 लाख तक का शिक्षा ऋण बिना किसी ब्याज के उपलब्ध कराया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। 'बिहार लोक सेवाओं का अधिकार अधिनियम, 2011' देश में अपनी तरह का एक अनूठा कानून था जिसके तहत नागरिकों को समयबद्ध सेवाएँ मिलती हैं और 'सर्विस प्लस' इसका प्रमुख डिजिटल माध्यम है। राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों एवं इथेनॉल संवर्धन नीति ने निवेश को बढ़ावा दिया है, तथा 'ई-शिक्षाकोष' पोर्टल स्कूलों की डिजिटल निगरानी के लिए कार्यरत है। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना' का संचालन योजना एवं विकास विभाग (या वित्त निगम के माध्यम से शिक्षा विभाग) द्वारा किया जाता है और इसमें ऋण राशि अधिकतम ₹4 लाख तक होती है, जिसपर सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 4% तथा महिलाओं, दिव्यांगों व ट्रांसजेंडरों के लिए 1% साधारण ब्याज लिया जाता है। इस प्रकार की उच्च स्तरीय तैयारी के लिए आप बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट कर सकते हैं।