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BPSC TRE 4.0
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के प्रारंभिक वर्षों और उसके अधिवेशनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन (1885) की अध्यक्षता व्योमेश चंद्र बनर्जी ने की थी, जिसमें कुल 72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया था और यह अधिवेशन मूल रूप से पुणे में आयोजित होना तय था, किंतु वहाँ प्लेग फैलने के कारण इसे बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में स्थानांतरित करना पड़ा था।
- 2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन की अध्यक्षता गोपाल कृष्ण गोखले ने की थी, जिसमें बंगाल विभाजन के विरोध में ब्रिटिश वस्तुओं और प्रशासन की नीतियों के खिलाफ स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का औपचारिक समर्थन किया गया था।
- 3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस 'नरम दल' और 'गरम दल' के वैचारिक मतभेदों के कारण दो स्पष्ट गुटों में विभाजित हो गई थी, जिसकी अध्यक्षता रास बिहारी घोष ने की थी, और इस विभाजन के बाद कांग्रेस पर नरमपंथियों का नियंत्रण पुनः स्थापित हो गया था।
- 4. वर्ष 1916 के लखनऊ अधिवेशन की अध्यक्षता अंबिका चरण मजुमदार ने की थी, जिसमें न केवल नरम दल और गरम दल का ऐतिहासिक पुनर्मिलन हुआ, बल्कि कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच 'लखनऊ पैक्ट' भी संपन्न हुआ, जिसने भविष्य की सांप्रदायिक राजनीति की नींव को मजबूत करने का कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का प्रथम अधिवेशन मूल रूप से 'पूना' (पुणे) में आयोजित होने वाला था, किंतु वहाँ हैजा (Cholera) फैलने के कारण इसे बंबई के गोकुलदास तेजपाल संस्कृत कॉलेज में आयोजित किया गया था, न कि प्लेग के कारण (प्लेग पुणे में बाद में 1896-97 में फैला था)। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन में गोपाल कृष्ण गोखले अध्यक्ष रहे और स्वदेशी आंदोलन का समर्थन किया गया। 1907 के सूरत अधिवेशन (अध्यक्ष: रास बिहारी घोष) में कांग्रेस का विभाजन हुआ। 1916 के लखनऊ अधिवेशन (अध्यक्ष: अंबिका चरण मजुमदार) में कांग्रेस-लीग समझौता और नरम-गरम दल की एकता हुई। अधिक जानकारी और तैयारी के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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केंद्रीय बजट और आर्थिक समीक्षा (Economic Survey) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के संविधान के अनुच्छेद 112 के अंतर्गत वार्षिक वित्तीय विवरण (Annual Financial Statement) को 'केंद्रीय बजट' कहा जाता है, जिसमें सरकार की अनुमानित प्राप्तियों और व्यय का विवरण होता है, जबकि 'आर्थिक समीक्षा' वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग द्वारा बजट पेश किए जाने से ठीक पहले प्रस्तुत की जाती है, जो पिछले वित्तीय वर्ष के आर्थिक प्रदर्शन का लेखा-जोखा होती है।
2. केंद्र सरकार के बजट में मुख्य रूप से दो भाग होते हैं: राजस्व बजट (Revenue Budget) और पूंजी बजट (Capital Budget); राजस्व बजट के अंतर्गत सरकार की राजस्व प्राप्तियाँ (कर और गैर-कर राजस्व) तथा राजस्व व्यय शामिल होते हैं, जबकि पूंजीगत प्राप्तियों में सरकार की उधारी और परिसंपत्तियों की बिक्री (जैसे विनिवेश) शामिल होती है।
3. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit) सरकार के कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधारी को छोड़कर) के बीच का अंतर होता है, जो यह दर्शाता है कि सरकार को अपने कामकाज को चलाने के लिए कुल कितनी शुद्ध उधारी की आवश्यकता है।
4. वर्ष 2017 से पहले केंद्रीय बजट फरवरी के अंतिम कार्य दिवस को शाम 5 बजे प्रस्तुत किया जाता था, जिसे औपनिवेशिक कालीन परंपरा के रूप में जाना जाता था, किंतु वर्ष 2017 में इस परंपरा को बदलते हुए बजट को 1 फरवरी को सुबह 11 बजे प्रस्तुत किए जाने की शुरुआत की गई तथा इसके साथ ही रेल बजट को भी आम बजट में मिला दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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ऑपरेशन सिंधुर के तहत, शहीद परिवारों के लिए बिहार सरकार द्वारा अनुमोदित अनुग्रह राशि कितनी है?
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हाल ही में जारी वैश्विक नवाचार सूचकांक (Global Innovation Index - GII) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (WIPO) द्वारा प्रकाशित वैश्विक नवाचार सूचकांक 2024 में स्विट्जरलैंड ने प्रथम स्थान प्राप्त किया है, जबकि भारत को इस सूचकांक में 39वां स्थान प्राप्त हुआ है।
2. यह सूचकांक अर्थव्यवस्थाओं की नवाचार क्षमताओं का मूल्यांकन करने के लिए केवल वैज्ञानिक शोध पत्रों के प्रकाशन और पेटेंट आवेदनों की संख्या को आधार बनाता है, तथा इसमें संस्थागत गुणवत्ता या बाजार परिपक्वता जैसे संकेतकों को शामिल नहीं किया जाता है।
3. भारत ने पिछले कुछ वर्षों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) सेवाओं के निर्यात, घरेलू बाजार के आकार और रचनात्मक वस्तुओं के निर्यात जैसे संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार प्रदर्शित किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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भारतीय संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना) तथा संघ एवं राज्य क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान की उद्देशिका में अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधन किया गया है, जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए थे, और सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट किया था कि उद्देशिका संविधान का अभिन्न अंग है तथा इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है, बशर्ते संविधान का 'मूल ढांचा' (Basic Structure) प्रभावित न हो।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार 'भारत, अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ है' (Union of States), जिसका तात्पर्य यह है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है और किसी भी राज्य को संघ से अलग होने का कोई अधिकार नहीं है।
3. नए राज्यों के निर्माण, उनके क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन से संबंधित विधेयक (अनुच्छेद 3 के तहत) को संसद में पेश करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति की आवश्यकता अनिवार्य होती है, और ऐसा विधेयक प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति उस राज्य के विधानमंडल को अपने विचार व्यक्त करने के लिए एक निश्चित समय-सीमा देते हैं, तथा विधानमंडल द्वारा दी गई सिफारिश या सलाह को मानना राष्ट्रपति और संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
4. अनुच्छेद 2 के अंतर्गत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना' कर सकती है, जो कि उन बाहरी क्षेत्रों से संबंधित है जो भारत के भू-भाग का हिस्सा नहीं थे (जैसे सिक्किम का भारतीय संघ में विलय)।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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राजनीतिक सुधारों के लिए विरोध शुरू करने का श्रेय किसे दिया जाता है?
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