भारत में आधुनिक शिक्षा के विकास और विभिन्न ऐतिहासिक आयोगों/समितियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. चार्ल्स वुड का डिस्पैच (Wood's Despatch, 1854), जिसे 'भारत में अंग्रेजी शिक्षा का मैग्ना कार्टा' कहा जाता है, ने जन-साधारण की शिक्षा के उत्तरदायित्व को सरकार का कर्तव्य माना और इसके तहत लंदन विश्वविद्यालय के तर्ज पर कलकत्ता, बॉम्बई और मद्रास में विश्वविद्यालयों की स्थापना की संस्तुति की थी।
- 2. हंटर शिक्षा आयोग (1882) की नियुक्ति लॉर्ड रिपन के कार्यकाल में प्राथमिक शिक्षा के प्रसार और सुधार की समीक्षा के लिए की गई थी, तथा इसने प्राथमिक शिक्षा का नियंत्रण स्थानीय निकायों (Municipalities and District Boards) को सौंपने की सिफारिश की थी।
- 3. सर थॉमस रैले आयोग (1902) की संस्तुतियों के आधार पर लॉर्ड कर्जन के कार्यकाल में 'भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904' पारित किया गया, जिसके माध्यम से विश्वविद्यालयों की सीनेट में निर्वाचित सदस्यों की संख्या को बढ़ाकर उनके लोकतांत्रिक स्वरूप को अत्यधिक सुदृढ़ किया गया।
- 4. डॉ. जाकिर हुसैन समिति (1937) द्वारा प्रस्तुत 'वर्धा योजना' (बेसिक शिक्षा) का मुख्य उद्देश्य निःशुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा के माध्यम से प्रदान करना तथा हस्तकला एवं उत्पादक कार्यों को पाठ्यक्रम का केंद्र बनाना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। चार्ल्स वुड का डिस्पैच (1854) शिक्षा का मैग्ना कार्टा कहलाता है जिसने कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में विश्वविद्यालयों की नींव रखी। हंटर आयोग (1882) ने प्राथमिक शिक्षा को स्थानीय निकायों के अधीन करने पर जोर दिया था। डॉ. जाकिर हुसैन समिति की 'वर्धा योजना' (1937) बुनियादी शिक्षा और हस्तकला पर आधारित थी। वहीं, कथन 3 असत्य है क्योंकि रैले आयोग की संस्तुतियों पर बने 'भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904' ने विश्वविद्यालयों की सीनेट में निर्वाचित सदस्यों की संख्या को घटा दिया था और सरकारी नियंत्रण को कड़ा किया था, जिससे उनका लोकतांत्रिक स्वरूप कमजोर हुआ था। बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा के पाठ्यक्रम के अनुसार आधुनिक भारतीय इतिहास और शिक्षा के विकास से संबंधित यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न है।