BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान के भाग-I (संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र) और अनुच्छेदों की अवस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुच्छेद 1 के अनुसार 'इंडिया, अर्थात् भारत, राज्यों का एक संघ (Union of States)' होगा, जिसमें राज्यों के संघ होने की तुलना में 'राज्यों का फेडरेशन' शब्द का प्रयोग अधिक उपयुक्त माना गया है क्योंकि यह अमेरिकी संघ की भांति राज्यों के बीच समझौते का परिणाम है।
- 2. अनुच्छेद 2 संसद को संघ में नए राज्यों के प्रवेश या उनकी स्थापना करने की शक्ति प्रदान करता है, जबकि अनुच्छेद 3 संसद को किसी राज्य के क्षेत्र को घटाने, बढ़ाने या उसके नाम में परिवर्तन करने की एकतरफा शक्ति देता है।
- 3. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण या उसकी सीमा में परिवर्तन से संबंधित विधेयक को संसद में प्रस्तुत करने से पहले राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश अनिवार्य है, और राष्ट्रपति को यह विधेयक उस राज्य के विधानमंडल के पास उसके विचार जानने के लिए भेजना पड़ता है, जिसका मत संसद के लिए पूर्णतः बाध्यकारी होता है।
- 4. 92वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संघ में नए राज्यों या क्षेत्रों के समायोजन की प्रक्रिया को अत्यंत सरल बनाया गया, जिसके तहत किसी भी भारतीय भू-भाग को विदेशी राज्य को सौंपने के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि डॉ. आंबेडकर के अनुसार 'संघ' (Union) शब्द का प्रयोग इसलिए किया गया क्योंकि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है (जैसे अमेरिकी फेडरेशन है), और राज्य इससे अलग होने की स्वतंत्रता नहीं रखते। कथन 2 सत्य है; अनुच्छेद 2 नए राज्यों के प्रवेश (बाहरी क्षेत्रों) से संबंधित है और अनुच्छेद 3 आंतरिक राज्यों के पुनर्गठन से संबंधित है। कथन 3 असत्य है क्योंकि राज्य विधानमंडल का विचार या मत संसद के लिए बाध्यकारी (Binding) नहीं होता है, संसद उसे मानने के लिए स्वतंत्र है। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'बेरुबारी यूनियन मामले' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि भारत के किसी भू-भाग को किसी अन्य देश को सौंपने के लिए संविधान संशोधन (आमतौर पर 98वां संविधान संशोधन) करना अनिवार्य है। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल।
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अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry) के अंतर्गत संक्रमण धातुओं (Transition Metals), उनके यौगिकों तथा उपसहसंयोजन यौगिकों (Coordination Compounds) के रासायनिक गुणों और बंधता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संक्रमण धातुएँ (d-ब्लॉक के तत्व) सामान्यतः परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करती हैं, जिसका प्रमुख कारण इनके (n-1)d और ns कक्षकों की ऊर्जा में अत्यधिक अंतर होना होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं।
2. वर्नर के उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner's Coordination Theory) के अनुसार, उपसहसंयोजन यौगिकों में केंद्रीय धातु परमाणु दो प्रकार की संयोजकताएँ—प्राथमिक संयोजकता (जो आयननीय होती है और ऑक्सीकरण संख्या को संतुष्ट करती है) तथा द्वितीयक संयोजकता (जो अनआयननीय होती है और समन्वय संख्या को संतुष्ट करती है)—प्रदर्शित करता है।
3. क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT) के अनुसार, जब लिगैंड केंद्रीय धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो समभ्रंश (Degenerate) d-कक्षकों का ऊर्जा स्तर अ-समभ्रंश कक्षकों में विभाजित हो जाता है, और अष्टफलकीय संकुलों में $t_{2g}$ कक्षक उच्च ऊर्जा स्तर पर तथा $e_g$ कक्षक निम्न ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
4. सोडियम नाइट्रोप्रसाइड [$Na_2[Fe(CN)_5(NO)]$] का उपयोग सल्फर और सल्फाइड आयनों ($S^{2-}$) के गुणात्मक परीक्षण के लिए किया जाता है, जिसके साथ यह आयन क्रिया करके एक विशिष्ट बैंगनी या जामुनी रंग का उपसहसंयोजन यौगिक बनाता है।
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आनुवंशिकी और जैव विकास (Genetics and Evolution) के सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हार्डी-वेनबर्ग साम्य (Hardy-Weinberg Equilibrium) के नियम के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संसर्ग करने वाले समष्टि में जीन आवृत्तियाँ (Gene frequencies) और एलील आवृत्तियाँ पीढ़ियों तक स्थिर रहती हैं, बशर्ते उस पर उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, जीन प्रवाह या आनुवंशिक विचलन जैसी विकासवादी शक्तियाँ प्रभावी न हों।
2. लामार्कवाद (Lamarckism) के 'उपार्जित लक्षणों की वंशागति' (Inheritance of Acquired Characters) के सिद्धांत को वीजप्लाज्म सिद्धांत (Germplasm Theory) के प्रतिपादक ऑगस्ट वीजमैन द्वारा चूहों पर किए गए प्रयोगों के माध्यम से पूरी तरह से सही सिद्ध कर दिया गया था।
3. होमोलोगस अंग (Homologous Organs) वे अंग होते हैं जिनकी मूल संरचना और उत्पत्ति समान होती है, किंतु उनके कार्य भिन्न होते हैं, जो कि 'अपसारी विकास' (Divergent Evolution) का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
4. मेण्डल के स्वतंत्र अपव्यूहन के नियम (Law of Independent Assortment) का अपवाद 'सहसंलग्नता' (Linkage) है, क्योंकि जब दो या अधिक जीन एक ही गुणसूत्र पर अत्यधिक पास स्थित होते हैं, तो वे एक साथ वंशागत होने की प्रवृत्ति दर्शाते हैं।
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भारत के सामान्य भौगोलिक परिचय और अवस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर तथा देशांतीय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व तक है, जिसके कारण देश के सबसे पूर्वी और सबसे पश्चिमी छोर के स्थानीय समय में लगभग दो घंटे (1 घंटे 57 मिनट) का अंतर पाया जाता है।
2. भारत का कुल क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है, जो विश्व के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.4% है, जबकि क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा देश है।
3. भारत की मानक समय रेखा (82°30' पूर्वी देशांतर) देश के कुल छः राज्यों—उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और बिहार से होकर गुजरती है।
4. कर्क रेखा ($23°30'$ उत्तरी अक्षांश) भारत के लगभग मध्य से गुजरती है और यह देश के कुल आठ राज्यों से होकर जाती है, जिनमें गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और मिजोरम शामिल हैं।
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बिहार के स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई थी, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया था, और इसी परिसर में सदाकत आश्रम की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
2. वर्ष 1928 में जब साइमन कमीशन पटना आया था, तब उसके बहिष्कार और काले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार में अनुग्रह नारायण सिंह, जनकधारी प्रसाद और अली इमाम जैसे प्रमुख नेताओं ने किया था।
3. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) के दौरान बिहार के सारण (छपरा) और मुंगेर जिलों के कैदियों ने विदेशी वस्त्रों और सुविधाओं का बहिष्कार करते हुए 'नंगा हड़ताल' (Nanga Hartal) की थी, जो औपनिवेशिक प्रशासन के खिलाफ एक अनूठा विरोध प्रदर्शन था।
4. वर्ष 1934 में पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में आचार्य नरेंद्र देव की अध्यक्षता में 'बिहार सोशलिस्ट पार्टी' की औपचारिक स्थापना हुई थी, जिसके सचिव जयप्रकाश नारायण बनाए गए थे।
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बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है?
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सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
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