BPSC TRE 4.0
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भारतीय संविधान की उद्देशिका (प्रस्तावना) तथा संघ एवं उसके राज्य क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान की उद्देशिका को अब तक केवल एक बार वर्ष 1976 के 42वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संशोधित किया गया है, जिसके तहत इसमें 'समाजवादी', 'पंथनिरपेक्ष' और 'अखंडता' शब्द जोड़े गए, तथा उद्देशिका गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) होने के कारण सीधे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं है।
- 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 2 के तहत संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह विधि द्वारा 'संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना' कर सके, जो कि ऐसे क्षेत्रों के लिए लागू होता है जो पहले से भारत के भू-भाग का हिस्सा नहीं हैं।
- 3. अनुच्छेद 3 के अंतर्गत किसी नए राज्य के निर्माण, उसके नाम, क्षेत्र या सीमा में परिवर्तन से संबंधित विधेयक को राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता, और ऐसा विधेयक राष्ट्रपति द्वारा संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास उसके मत को जानने के लिए भेजा जाता है, किंतु राज्य विधानमंडल का मत संसद के लिए बाध्यकारी नहीं होता है।
- 4. 'बेरुबारी यूनियन वाद' (1960) में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि उद्देशिका संविधान का भाग नहीं है, किंतु 'केशवानंद भारती वाद' (1973) में इस निर्णय को पलटते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उद्देशिका संविधान का एक अभिन्न हिस्सा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। 1. उद्देशिका केवल एक बार 42वें संशोधन (1976) द्वारा संशोधित हुई है और यह गैर-न्यायोचित है। 2. अनुच्छेद 2 नए राज्यों के प्रवेश/स्थापना से संबंधित है जो भारत का हिस्सा नहीं हैं। 3. अनुच्छेद 3 के तहत राज्यों के पुनर्गठन के विधेयकों के लिए राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश अनिवार्य है और राज्य का मत बाध्यकारी नहीं होता। 4. बेरुबारी मामले (1960) में उद्देशिका को संविधान का भाग नहीं माना गया था, जिसे केशवानंद भारती मामले (1973) में बदल दिया गया। अधिक अभ्यास के लिए बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा पोर्टल पर विजिट करें।
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पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) में ऊर्जा के प्रवाह और जैव-रासायनिक चक्र (Biogeochemical Cycles) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पारिस्थितिकी तंत्र में ऊर्जा का प्रवाह हमेशा एकदिशीय (Unidirectional) होता है, और ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, जब ऊर्जा का एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर पर स्थानांतरण होता है, तो प्रत्येक चरण में ऊर्जा का ह्रास होता है।
2. 'लिंडमैन का 10 प्रतिशत का नियम' (Lindeman's 10% Law) यह बताता है कि एक पोषण स्तर से अगले पोषण स्तर तक केवल लगभग 10 प्रतिशत ऊर्जा ही संचित हो पाती है, जबकि शेष 90 प्रतिशत ऊर्जा श्वसन, ऊष्मा और उपापचय क्रियाओं के दौरान नष्ट हो जाती है।
3. गाद और मलबे पर आधारित खाद्य श्रृंखला (Detritus Food Chain - DFC) में प्राथमिक उपभोक्ता अपघटक (Decomposers) होते हैं, जो मृत कार्बनिक पदार्थों को अकार्बनिक खनिजों में बदलते हैं, और यह जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में स्थलीय पारिस्थितिकी तंत्र में कम महत्वपूर्ण होती है।
4. नाइट्रोजन चक्र (Nitrogen Cycle) में 'नाइट्रीकरण' (Nitrification) की प्रक्रिया के दौरान अमोनिया पहले नाइट्राइट में और फिर नाइट्रेट में परिवर्तित होती है, जिसे पौधों द्वारा मुख्य रूप से अवशोषित किया जाता है, और यह चक्र एक पूर्णतः गैसीय जैव-रासायनिक चक्र का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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अकार्बनिक रसायन (Inorganic Chemistry) के अंतर्गत संक्रमण धातुओं (Transition Metals), उनके यौगिकों तथा उपसहसंयोजन यौगिकों (Coordination Compounds) के रासायनिक गुणों और बंधता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संक्रमण धातुएँ (d-ब्लॉक के तत्व) सामान्यतः परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाएँ प्रदर्शित करती हैं, जिसका प्रमुख कारण इनके (n-1)d और ns कक्षकों की ऊर्जा में अत्यधिक अंतर होना होता है, जिससे इलेक्ट्रॉन आसानी से उत्तेजित हो जाते हैं।
2. वर्नर के उपसहसंयोजन सिद्धांत (Werner's Coordination Theory) के अनुसार, उपसहसंयोजन यौगिकों में केंद्रीय धातु परमाणु दो प्रकार की संयोजकताएँ—प्राथमिक संयोजकता (जो आयननीय होती है और ऑक्सीकरण संख्या को संतुष्ट करती है) तथा द्वितीयक संयोजकता (जो अनआयननीय होती है और समन्वय संख्या को संतुष्ट करती है)—प्रदर्शित करता है।
3. क्रिस्टल फील्ड सिद्धांत (Crystal Field Theory - CFT) के अनुसार, जब लिगैंड केंद्रीय धातु आयन के संपर्क में आते हैं, तो समभ्रंश (Degenerate) d-कक्षकों का ऊर्जा स्तर अ-समभ्रंश कक्षकों में विभाजित हो जाता है, और अष्टफलकीय संकुलों में $t_{2g}$ कक्षक उच्च ऊर्जा स्तर पर तथा $e_g$ कक्षक निम्न ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
4. सोडियम नाइट्रोप्रसाइड [$Na_2[Fe(CN)_5(NO)]$] का उपयोग सल्फर और सल्फाइड आयनों ($S^{2-}$) के गुणात्मक परीक्षण के लिए किया जाता है, जिसके साथ यह आयन क्रिया करके एक विशिष्ट बैंगनी या जामुनी रंग का उपसहसंयोजन यौगिक बनाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन पूर्णतः सत्य है/हैं?
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बिहार के स्वतंत्रता संग्राम और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1921 में असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में शिक्षा के वैकल्पिक संस्थानों के रूप में 'बिहार नेशनल कॉलेज' की स्थापना की गई थी, जिसके प्राचार्य के रूप में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कार्य किया था, और इसी परिसर में सदाकत आश्रम की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ।
2. वर्ष 1928 में जब साइमन कमीशन पटना आया था, तब उसके बहिष्कार और काले झंडों के साथ विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व बिहार में अनुग्रह नारायण सिंह, जनकधारी प्रसाद और अली इमाम जैसे प्रमुख नेताओं ने किया था।
3. सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) के दौरान बिहार के सारण (छपरा) और मुंगेर जिलों के कैदियों ने विदेशी वस्त्रों और सुविधाओं का बहिष्कार करते हुए 'नंगा हड़ताल' (Nanga Hartal) की थी, जो औपनिवेशिक प्रशासन के खिलाफ एक अनूठा विरोध प्रदर्शन था।
4. वर्ष 1934 में पटना के अंजुमन इस्लामिया हॉल में आचार्य नरेंद्र देव की अध्यक्षता में 'बिहार सोशलिस्ट पार्टी' की औपचारिक स्थापना हुई थी, जिसके सचिव जयप्रकाश नारायण बनाए गए थे।
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भौतिकी के विविध अनुप्रयोगों एवं सिद्धांतों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सीबेक प्रभाव (Seebeck Effect) इस सिद्धांत पर कार्य करता है कि जब दो अलग-अलग धातुओं के जंक्शनों के बीच तापीय अंतर (Temperature Difference) उत्पन्न किया जाता है, तो परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित होने लगती है, जिसका उपयोग थर्मोकपल (Thermocouple) बनाने में किया जाता है।
2. 'रमन प्रभाव' (Raman Effect) के अनुसार जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है, तो उसका एक अंश प्रकीर्णित हो जाता है और प्रकीर्णित प्रकाश की तरंगदैर्ध्य में जो परिवर्तन होता है, वह आपतित प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करता है; इसी खोज के लिए सी.वी. रमन को वर्ष 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार दिया गया था।
3. 'सुपरकंडक्टिविटी' (Superconductivity) की स्थिति में किसी चालक का विद्युत प्रतिरोध शून्य हो जाता है और वह चुंबकीय क्षेत्र को अपने भीतर से बाहर धकेल देता है, जिसे 'माइस्नर प्रभाव' (Meissner Effect) कहा जाता है।
4. डॉप्लर प्रभाव (Doppler Effect) केवल ध्वनि तरंगों पर ही लागू होता है, और प्रकाश तरंगों या विद्युत चुंबकीय तरंगों में गति के कारण आवृत्ति या तरंगदैर्ध्य में कोई आभासी परिवर्तन देखने को नहीं मिलता है।
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बिहार में भीम बांध वन्यजीव अभ्यारण्य किस जिले में है?
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सूर्य से पृथ्वी तक प्रकाश पहुँचने में कितना समय लगता है?
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