BaalVikas
Menu
Civil services
Asked 2 months ago · Viewed 16 times

भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - अनुच्छेद 36 से 51) तथा उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 38 के अनुसार राज्य, लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाएगा जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे, जिसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था ताकि आय, प्रतिष्ठा और अवसरों की असमानताओं को कम किया जा सके।
  2. 2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कई नए निर्देश जोड़े गए थे, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (अनुच्छेद 39A), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A) तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवहन तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं।
  3. 3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में एक नया निर्देश (अनुच्छेद 38 का खंड 2) जोड़ा गया, जिसके तहत यह अनिवार्य किया गया कि राज्य विशेष रूप से आय की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा और साथ ही प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को केवल व्यक्तियों के बीच ही नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे समूहों के बीच भी समाप्त करने का प्रयास करेगा।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 38 का खंड (1) मूल संविधान में ही शामिल था, जिसके अनुसार 'राज्य, लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाएगा और सुरक्षित रखेगा जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे।' इसे 42वें संशोधन द्वारा नहीं जोड़ा गया था, बल्कि 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 38 में एक नया खंड (2) जोड़ा गया था। कथन 2 सही है: 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 ने DPSP में कई महत्वपूर्ण नए निर्देशक तत्व जोड़े: (i) बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), (ii) समान न्याय और गरीबों को निःशुल्क विधिक सहायता प्रदान करना (अनुच्छेद 39A), (iii) उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना (अनुच्छेद 43A), और (iv) पर्यावरण का संरक्षण और संवर्धन तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा करना (अनुच्छेद 48A)। कथन 3 सही है: 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अनुच्छेद 38 में खंड (2) अंतःस्थापित किया गया, जिसके अनुसार राज्य, विशेष रूप से, आय की असमानताओं को कम करेगा और न केवल व्यक्तियों के बीच बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले या विभिन्न व्यवसायों में लगे लोगों के समूहों के बीच भी प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को समाप्त करने का प्रयास करेगा।
Share:
अगला प्रश्न → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के… ← पिछला प्रश्न भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय…

Related Questions

→ भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघ की न्यायपालिका' (The Union Judiciary - सर्वोच्च न्यायालय, अनुच्छेद 124 से 147) तथा 'न्यायिक पुनरावलोकन' (Judicial Review) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 137 के अनुसार उच्चतम न्यायालय को संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि या उसके द्वारा दिए गए किसी आदेश या निर्णय का पुनरावलोकन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते इस शक्ति का प्रयोग केवल तभी किया जा सकता है जब संसद इस आशय का कोई विशेष अधिनियम पारित करे। 2. 'न्यायिक पुनरावलोकन' की संकल्पना का प्रत्यक्ष उल्लेख मूल संविधान के अनुच्छेद 13 और अनुच्छेद 32 में स्पष्ट रूप से किया गया है, जिसके तहत उच्चतम न्यायालय को संघ या राज्यों के ऐसे किसी भी कानून को शून्य घोषित करने की शक्ति प्राप्त है जो संविधान के भाग III (मौलिक अधिकारों) का उल्लंघन करते हैं। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यह स्पष्ट किया गया कि 'संविधान की सर्वोच्चता' और 'न्यायिक पुनरावलोकन की शक्ति' दोनों ही भारतीय संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का अभिन्न अंग हैं, जिन्हें संसद द्वारा अनुच्छेद 368 के तहत किए जाने वाले संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से भी समाप्त या छीना नहीं जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत 'मौलिक अधिकार' (Fundamental Rights - अनुच्छेद 12 से 35) तथा 'संसदीय संप्रभुता एवं न्यायिक सर्वोच्चता' के अंतर्संबंधों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 13(2) के अनुसार राज्य कोई ऐसी विधि नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त अधिकारों को छीनती है या न्यून करती है, और इस प्रकार बनाई गई प्रत्येक विधि उल्लंघन की मात्रा तक शून्य होगी, जहाँ 'विधि' (Law) शब्द के अंतर्गत केवल संसद या राज्य विधानसभाओं द्वारा पारित अधिनियम शामिल हैं, तथा इसमें अध्यादेश, उप-विधियाँ, नियम, और रूढ़ियाँ या प्रथाएँ शामिल नहीं हैं। 2. गोलकनाथ वाद (1967) में उच्चतम न्यायालय द्वारा यह निर्णय दिया गया था कि संसद को मौलिक अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति प्राप्त नहीं है, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत किया जाने वाला 'संवैधानिक संशोधन' भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत आने वाली 'विधि' (Law) के ही समान है। 3. केशवानंद भारती वाद (1973) के ऐतिहासिक निर्णय द्वारा गोलकनाथ वाद के निर्णय को पलट दिया गया और यह अभिनिर्धारित किया गया कि संसद को अनुच्छेद 368 के अधीन संविधान के किसी भी हिस्से (मौलिक अधिकारों सहित) में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, बशर्ते ऐसा कोई भी संशोधन संविधान की 'मूल संरचना' (Basic Structure) का उल्लंघन न करे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के अंतर्गत 'अखिल भारतीय सेवाएँ' (All-India Services - अनुच्छेद 312) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 312 के अनुसार संसद को कानून द्वारा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के समान एक या अधिक अखिल भारतीय सेवाओं के सृजन करने की अनन्य शक्ति प्राप्त है, बशर्ते राज्य सभा ने उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई बहुमत से ऐसा संकल्प पारित किया हो कि राष्ट्रीय हित में ऐसा करना आवश्यक है। 2. अखिल भारतीय सेवाओं के सदस्यों की नियुक्ति और सेवा शर्तें निर्धारित करने का पूर्ण अधिकार केवल संबंधित राज्य सरकारों के पास होता है, क्योंकि वे राज्य के प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत कार्य करते हैं, और केंद्र सरकार का उन पर कोई disciplinary नियंत्रण नहीं होता है। 3. भारतीय वन सेवा (IFS) को वर्ष 1966 में अखिल भारतीय सेवा अधिनियम, 1951 के तहत संशोधित करके एक नई अखिल भारतीय सेवा के रूप में स्थापित किया गया था, जिससे वर्तमान में भारत में कुल तीन आधिकारिक अखिल भारतीय सेवाएँ अस्तित्व में हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' (Individual Satyagraha of 1940) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा कांग्रेस के अगस्त प्रस्ताव (1940) के विरोध में और ब्रिटिश सरकार के इस दावे को झूठा साबित करने के लिए की गई थी कि भारतीय जनता द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश युद्ध प्रयासों का पूर्ण समर्थन कर रही है। 2. आचार्य विनोबा भावे इस आंदोलन के पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही चुने गए थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही थे, और इस सत्याग्रह के तहत सत्याग्रहियों को दिल्ली की ओर मार्च करने का निर्देश दिया गया था जिसे 'दिल्ली चलो आंदोलन' भी कहा गया। 3. व्यक्तिगत सत्याग्रह का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक विद्रोह भड़काना नहीं था, बल्कि यह युद्ध के समय अपने स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक उपयोग करते हुए नैतिक विरोध दर्ज कराना था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? → हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है? → भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था। 2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है। 3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.