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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन के संदर्भ में, 'व्यक्तिगत सत्याग्रह' (Individual Satyagraha of 1940) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत महात्मा गांधी द्वारा कांग्रेस के अगस्त प्रस्ताव (1940) के विरोध में और ब्रिटिश सरकार के इस दावे को झूठा साबित करने के लिए की गई थी कि भारतीय जनता द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटिश युद्ध प्रयासों का पूर्ण समर्थन कर रही है।
- 2. आचार्य विनोबा भावे इस आंदोलन के पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही चुने गए थे, जबकि जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही थे, और इस सत्याग्रह के तहत सत्याग्रहियों को दिल्ली की ओर मार्च करने का निर्देश दिया गया था जिसे 'दिल्ली चलो आंदोलन' भी कहा गया।
- 3. व्यक्तिगत सत्याग्रह का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसक विद्रोह भड़काना नहीं था, बल्कि यह युद्ध के समय अपने स्वतंत्र अभिव्यक्ति के अधिकार का शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक उपयोग करते हुए नैतिक विरोध दर्ज कराना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरुआत अक्टूबर 1940 में महात्मा गांधी द्वारा ब्रिटिश सरकार के 'अगस्त प्रस्ताव' (August Offer, 1940) को अस्वीकार करने के बाद की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि भारतीय जनता नाजियों या फासीवादियों के खिलाफ होते हुए भी ब्रिटेन के युद्ध प्रयासों में स्वेच्छा से शामिल नहीं है और भारतीयों को बिना उनकी अनुमति के युद्ध में झोंक दिया गया है।
कथन 2 गलत है: आचार्य विनोबा भावे इस आंदोलन के पहले व्यक्तिगत सत्याग्रही थे और जवाहरलाल नेहरू दूसरे सत्याग्रही थे, किंतु इस सत्याग्रह के तहत सत्याग्रहियों को 'दिल्ली चलो' मार्च करने का निर्देश **नहीं** दिया गया था। इसके विपरीत, सत्याग्रहियों को अपने ही गाँव या स्थानीय क्षेत्र में युद्ध विरोधी नारे लगाते हुए भाषण देकर अपनी गिरफ्तारी देनी होती थी, ताकि युद्ध के प्रयासों को व्यापक अव्यवस्था के बिना शांतिपूर्वक चुनौती दी जा सके।
कथन 3 सही है: व्यक्तिगत सत्याग्रह का स्वरूप पूरी तरह से सीमित, शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक था। इसका उद्देश्य ब्रिटिश शासन के दमनकारी नीतियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हनन के विरुद्ध नैतिक विरोध दर्ज कराना था, न कि बड़े पैमाने पर कोई हिंसक या अनियंत्रित जन-आंदोलन खड़ा करना।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XIV' के…
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपात उपबंध' (Emergency Provisions - अनुच्छेद 352 से 360) तथा 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency - अनुच्छेद 352) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के संबंध में युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर की जा सकती है, किंतु 'सशस्त्र विद्रोह' (Armed Rebellion) शब्द मूल संविधान में शामिल था जिसे बाद में 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था।
2. राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तब तक नहीं की जा सकती जब तक कि 'संघीय मंत्रिमंडल' (Cabinet - प्रधानमंत्री सहित कैबिनेट स्तर के मंत्रियों का निकाय) द्वारा लिखित रूप में ऐसा निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित न किया जाए, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा अंतःस्थापित किया गया था।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'एक महीने' के भीतर विशेष बहुमत (अर्थात सदन के कुल सदस्यों के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वाले कम से कम दो-तिहाई सदस्यों के बहुमत) द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV' के अंतर्गत 'राज्य के नीति निर्देशक तत्व' (Directive Principles of State Policy - DPSP - अनुच्छेद 36 से 51) तथा उनसे संबंधित संवैधानिक संशोधनों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 38 के अनुसार राज्य, लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए ऐसी सामाजिक व्यवस्था बनाएगा जिसमें सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय राष्ट्रीय जीवन की सभी संस्थाओं को अनुप्राणित करे, जिसे 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा जोड़ा गया था ताकि आय, प्रतिष्ठा और अवसरों की असमानताओं को कम किया जा सके।
2. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा नीति निर्देशक तत्वों में कई नए निर्देश जोड़े गए थे, जिनमें बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए अवसरों को सुरक्षित करना (अनुच्छेद 39), समान न्याय और निःशुल्क विधिक सहायता (अनुच्छेद 39A), उद्योगों के प्रबंधन में श्रमिकों की भागीदारी (अनुच्छेद 43A) तथा पर्यावरण का संरक्षण और संवहन तथा वन एवं वन्य जीवों की रक्षा (अनुच्छेद 48A) शामिल हैं।
3. 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा राज्य के नीति निर्देशक तत्वों में एक नया निर्देश (अनुच्छेद 38 का खंड 2) जोड़ा गया, जिसके तहत यह अनिवार्य किया गया कि राज्य विशेष रूप से आय की असमानताओं को कम करने का प्रयास करेगा और साथ ही प्रतिष्ठा, सुविधाओं और अवसरों की असमानता को केवल व्यक्तियों के बीच ही नहीं बल्कि विभिन्न क्षेत्रों में रहने वाले और विभिन्न व्यवसायों में लगे समूहों के बीच भी समाप्त करने का प्रयास करेगा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत 'केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों' (Financial Relations - अनुच्छेद 268 से 281) तथा 'वस्तु एवं सेवा कर (GST)' से संबंधित '101वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2016' के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 279A के अंतर्गत राष्ट्रपति को आदेश द्वारा 'जीएसटी परिषद' (Goods and Services Tax Council) का गठन करने की शक्ति प्रदान की गई है, जिसमें केंद्रीय वित्त मंत्री इस परिषद के अध्यक्ष होते हैं और केंद्रीय राज्य मंत्री (राजस्व प्रभारी) तथा राज्यों के वित्त या कराधान मंत्री इसके सदस्य होते हैं।
2. जीएसटी परिषद में कोई भी निर्णय उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई (60%) बहुमत से लिया जाता है, जिसमें केंद्र सरकार के मत का भारांक (Weightage) कुल डाले गए मतों का एक-तिहाई (1/3) होता है, जबकि सभी राज्य सरकारों के कुल मतों का भारांक दो-तिहाई (2/3) होता है।
3. 101वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा समवर्ती सूची में संशोधन करते हुए केंद्र और राज्यों दोनों को वस्तुओं या सेवाओं पर कर लगाने की एक साथ शक्ति प्रदान की गई, किंतु 'अंतर-राज्यीय व्यापार या वाणिज्य' (Inter-state trade or commerce) के दौरान आपूर्ति पर कर (IGST) लगाने और वसूलने की शक्ति केवल संबंधित राज्य सरकारों के पास होती है, जिसे केंद्र सरकार संगृहीत नहीं कर सकती।
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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'कोर उद्योगों' (Core Industries) तथा 'औद्योगिक उत्पादन सूचकांक' (Index of Industrial Production - IIP) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के औद्योगिक क्षेत्र में 'आठ प्रमुख कोर उद्योग' (Eight Core Industries) शामिल हैं, जिन्हें भारांक (Weightage) के अवरोही क्रम में व्यवस्थित करने पर रिफाइनरी उत्पाद (Refinery Products) का भारांक सबसे अधिक होता है, जबकि उर्वरक (Fertilizers) का भारांक सबसे कम होता है।
2. 'औद्योगिक उत्पादन सूचकांक' (IIP) का संकलन और प्रकाशन 'राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय' (NSO) द्वारा किया जाता है, जो सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत कार्य करता है, तथा इस सूचकांक के लिए वर्तमान आधार वर्ष (Base Year) 2011-12 है।
3. आठ कोर उद्योगों का संयुक्त भारांक IIP के कुल भारांक का लगभग 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बनता है, जिसके कारण इन उद्योगों के प्रदर्शन का सीधा प्रभाव IIP की समग्र वृद्धि दर पर पड़ता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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हुरुन ग्लोबल यूनिकॉर्न इंडेक्स 2026 में भारत की रैंक क्या है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IVक' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51क) तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए विभिन्न निर्णयों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को मूल संविधान में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि इन्हें स्वर्ण सिंह समिति की संस्तुति पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान के भाग IVक में जोड़ा गया, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं जिन्हें वर्ष 2002 के 86वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा अंतिम बार संशोधित किया गया था।
2. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51क के अंतर्गत उल्लिखित सभी 11 मूल कर्तव्य प्रकृति से वाद योग्य (Justiciable) हैं, जिसका अर्थ है कि यदि कोई नागरिक अपने किसी मूल कर्तव्य का पालन नहीं करता है, तो उसके विरुद्ध उच्च न्यायालय या सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 226 और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे रिट याचिका जारी की जा सकती है।
3. 'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए।
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