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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVI' के अंतर्गत 'कुछ वर्गों के संबंध में विशेष उपबंध' (Special Provisions Relating to Certain Classes - अनुच्छेद 330 से 342A) तथा लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं में आरक्षण के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 330 और 332 के अनुसार क्रमशः लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों (SCs) और अनुसूचित जनजातियों (STs) के लिए सीटों का आरक्षण उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रदान किया जाता है, और मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि यह आरक्षण व्यवस्था बिना किसी संशोधन के अनिश्चितकाल तक स्वतः लागू रहेगी।
- 2. 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए सीटों के आरक्षण की अवधि को बढ़ाकर संविधान के लागू होने के पश्चात अत्तर (80) वर्ष कर दिया गया (अर्थात 25 जनवरी 2030 तक), जबकि इसी संशोधन के माध्यम से आंग्ल-भारतीय (Anglo-Indian) समुदाय के सदस्यों के लिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में मनोनीत किए जाने वाले विशेष प्रावधान को समाप्त कर दिया गया।
- 3. संविधान के अनुच्छेद 338 और 338A के तहत क्रमशः 'राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग' (NCSC) और 'राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग' (NCST) का गठन किया गया है, जो सांविधिक निकाय (Statutory Bodies) हैं, क्योंकि इन्हें किसी भी संवैधानिक संशोधन के माध्यम से स्थापित नहीं किया गया बल्कि संसद के सामान्य अधिनियम द्वारा बनाया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि मूल संविधान में यह प्रावधान किया गया था कि लोकसभा और विधानसभाओं में एससी/एसटी का आरक्षण केवल दस वर्षों (अर्थात 1960 तक) के लिए रहेगा, जिसे बाद में प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर संवैधानिक संशोधनों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाता रहा है। कथन 2 सही है क्योंकि 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 ने इस आरक्षण को 80 वर्ष (25 जनवरी 2030) तक बढ़ा दिया और लोकसभा तथा विधानसभाओं में आंग्ल-भारतीय समुदाय के मनोनयन को समाप्त कर दिया। कथन 3 गलत है क्योंकि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (अनुच्छेद 338) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (अनुच्छेद 338A) संवैधानिक निकाय (Constitutional Bodies) हैं, न कि सांविधिक निकाय, क्योंकि इन्हें सीधे संविधान के अनुच्छेदों के तहत स्थापित किया गया है (NCSC को 89वें संशोधन द्वारा और NCST को भी इसी के तहत अलग किया गया)। अत: केवल कथन 2 सही है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' (National Green Hydrogen Mission) और इसके उद्देश्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को वर्ष 2030 तक प्रतिवर्ष कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) हरित हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता के साथ वैश्विक स्तर पर इसका प्रमुख हब बनाना है।
2. इस मिशन के तहत उत्पादित हरित हाइड्रोजन और उसके व्युत्पन्न (derivatives) उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के साथ-साथ जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता को कम करना और देश को वर्ष 2047 तक 'ऊर्जा-स्वतंत्र' (Energy Independent) बनाना है।
3. हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए आवश्यक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार हेतु 'रणनीतिक हरित हाइड्रोजन संक्रमण के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप' (SIGHT) कार्यक्रम के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक' (CAG - Article 148) की संवैधानिक स्थिति, शक्तियों तथा उसके प्रतिवेदनों के परीक्षण से संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत नियुक्त भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए यह उपबंध किया गया है कि वे अपने पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाए जा सकते हैं जिस रीति से उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, तथा वे अपने पद पर बने रहने के पश्चात भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य कार्यालय के पात्र नहीं होंगे।
2. सीएजी (CAG) न केवल भारत की संचित निधि और प्रत्येक राज्य तथा संघ राज्य क्षेत्र (जहाँ विधानसभा हो) की संचित निधि से होने वाले सभी व्ययों की लेखापरीक्षा करता है, बल्कि वह उन सभी निगमों और निकायों की भी अनिवार्य रूप से प्रत्यक्ष विधि से लेखापरीक्षा करता है जिनकी स्थापना संसद या राज्य विधानमंडल द्वारा की जाती है।
3. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक द्वारा केंद्र सरकार के लेखों से संबंधित रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपी जाती है, जो उसे संसद के प्रत्येक सदन के पटल पर रखवाते हैं, जिसके तुरंत बाद संसद की लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) उस प्रतिवेदन की गहन जाँच करती है और यह सुनिश्चित करती है कि सार्वजनिक धन का उपयोग विधिवत रूप से हुआ है या नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IV-क' (मूल कर्तव्य - अनुच्छेद 51A) और उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मूल कर्तव्यों को स्वर्ण सिंह समिति (Swaran Singh Committee) की सिफारिशों के आधार पर 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा संविधान में जोड़ा गया था, और वर्तमान में संविधान में कुल 11 मूल कर्तव्य हैं, जिनमें से 11वां मूल कर्तव्य 86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 द्वारा जोड़ा गया था।
2. संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के अंतर्गत प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है कि वह वनों, झीलों, नदियों और वन्यजीवों सहित प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करे और उसका संवर्द्धन करे तथा प्राणीमात्र के प्रति दयाभाव रखे, और यह प्रावधान केवल नागरिकों तक सीमित न होकर राज्य के विरुद्ध भी एक न्यायोचित (Justiciable) दायित्व के रूप में सीधे न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय है।
3. यद्यपि मूल कर्तव्य प्रकृति में गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) हैं, तथापि सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न निर्णयों में यह स्पष्ट किया है कि विधियों की संवैधानिक वैधता की न्यायसंगतता का निर्धारण करते समय अदालतें इस बात को ध्यान में रख सकती हैं कि क्या वह विधि किसी मूल कर्तव्य को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बनाई गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सुमेलित कीजिए: A-2 (मोती मस्जिद-शाहजहाँ), B-1 (गोलकुंडा-स्थान), C-3 (बीबी का मकबरा-औरंगजेब काल), D-4 (रानी की वाव-गुजरात)।
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राज्य के महाधिवक्ता (Advocate General) की नियुक्ति किस अनुच्छेद के तहत की जाती है?
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