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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' (National Green Tribunal Act, 2010) तथा इसके अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) के प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त 'स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार' को प्रभावी रूप से लागू करने तथा पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटान के लिए की गई थी, और यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं एवं साक्ष्य नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए बाध्य है।
  2. 2. अधिकरण के Chairperson (अध्यक्ष) या न्यायिक सदस्य (Judicial Member) के रूप में केवल उसी व्यक्ति को नियुक्त किया जा सकता है जो उच्चतम न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश रहा हो, अथवा किसी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश रहा हो, तथा इसके विशेषज्ञ सदस्यों (Expert Members) के पास पर्यावरण विज्ञान, वानिकी, या संबंधित क्षेत्रों में उच्च शैक्षणिक योग्यता और कम-से-कम पंद्रह वर्ष का व्यावहारिक अनुभव होना अनिवार्य है।
  3. 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्णयों या आदेशों से व्यथित कोई भी व्यक्ति इस अधिकरण के आदेश के विरुद्ध नब्बे दिनों की अवधि के भीतर सीधे सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि इस अधिकरण के आदेशों के न्यायिक पुनरावलोकन (Judicial Review) का अधिकार केवल भारत के सर्वोच्च न्यायालय के पास निहित है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संबंधी मामलों के त्वरित निपटान के लिए की गई थी। हालांकि, यह सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), 1908 के पारंपरिक नियमों से पूरी तरह बंधा हुआ नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है। कथन 2 सत्य है: NGT के अध्यक्ष (Chairperson) या न्यायिक सदस्य के रूप में उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश (सेवानिवृत्त या कार्यरत) की नियुक्ति की जाती है। इसके अलावा, विशेषज्ञ सदस्यों के पास पर्यावरण या वानिकी विज्ञान में व्यापक अनुभव होना अनिवार्य है। कथन 3 असत्य है: NGT के किसी भी आदेश, निर्णय या पुरस्कार के विरुद्ध नब्बे (90) दिनों के भीतर सीधे उच्चतम न्यायालय में अपील की जा सकती है, लेकिन इसके आदेशों के खिलाफ उच्च न्यायालयों में अनुच्छेद 226 के तहत भी न्यायिक समीक्षा की जा सकती है, जैसा कि विभिन्न न्यायिक निर्णयों में स्पष्ट किया गया है; अतः कथन 3 का यह कहना कि अधिकार केवल सर्वोच्च न्यायालय के पास है, पूर्णतः सटीक नहीं है और अपील की समयावधि भी 90 दिन है, किंतु अधिकरण प्रक्रिया और अपील के दायरे को लेकर यह कथन भ्रामक है।
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