BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Civil services
5 views

भारतीय इतिहास और कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व शब्दावली के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सल्तनत काल में 'दीवान-ए-मुस्तखराज' (Diwan-i-Mustakhraj) नामक विभाग की स्थापना अलाउद्दीन खिलजी द्वारा की गई थी, जिसका प्रमुख कार्य लगान बकायेदारों की जाँच करना और राजस्व की वसूली में हुई हेराफेरी को रोकना था।
  2. 2. 'इक्ता प्रणाली' (Iqta System) के अंतर्गत सल्तनत के सुल्तानों द्वारा सैन्य अधिकारियों और अमीरों को वेतन के बदले भूमि के टुकड़े (इक्ता) प्रशासनिक नियंत्रण के लिए दिए जाते थे, तथा इल्तुतमिश के शासनकाल में ये इक्ता आनुवंशिक (Hereditary) बन गए थे और इनका हस्तांतरण पूर्णतः प्रतिबंधित था।
  3. 3. सल्तनत कालीन राजस्व व्यवस्था में 'खराज' (Kharaj) गैर-मुसलमानों पर लगाया जाने वाला भूमि कर था जो उनकी कुल उपज का एक-तिहाई से आधा हिस्सा होता था, जबकि 'जकात' (Zakat) मुसलमानों से उनकी संपत्ति पर लिया जाने वाला एक धार्मिक कर था जो केवल धार्मिक कार्यों और दान के लिए उपयोग किया जाता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी ने राजस्व प्रशासन को सुधारने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए 'दीवान-ए-मुस्तखराज' (बकाया राजस्व विभाग) की स्थापना की थी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों और स्थानीय राजस्व अधिकारियों (चौधरी, मुकद्दम और खुत) द्वारा दिए जाने वाले बकाये करों की वसूली करना था। कथन 2 गलत है: इक्ता प्रणाली सल्तनत काल में एक विशिष्ट प्रकार का भू-राजस्व और प्रशासनिक वितरण था। इल्तुतमिश ने इसे बड़े पैमाने पर संगठित किया था, किंतु इल्तुतमिश के शासनकाल में इक्ता आनुवंशिक नहीं थे, बल्कि उनका बार-बार स्थानांतरण (Transfer) किया जाता था ताकि कोई भी इक्तादार (मुक्ती या वली) अत्यधिक शक्तिशाली न हो सके। फिरोजशाह तुगलक के शासनकाल में आकर इक्ता व्यवस्था आनुवंशिक बनी थी। कथन 3 गलत है: 'खराज' इस्लामिक कानून (शरिया) के अनुसार गैर-मुसलमानों से लिया जाने वाला भूमि कर था (जो आमतौर पर उपज का 1/3 से 1/2 हिस्सा होता था), किंतु 'जकात' केवल मुसलमानों से उनकी संपत्ति पर लिया जाने वाला एक धार्मिक कर था जो केवल मुसलमानों के कल्याण और धार्मिक कार्यों पर खर्च किया जाता था, न कि आम प्रशासनिक कार्यों पर। इसके अलावा, गैर-मुसलमानों से लिया जाने वाला व्यक्तिगत कर 'जिज़िया' कहलाता था। अतः केवल कथन 1 सही है।
Share:

Related Questions

भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'सार्वजनिक वित्त' (Public Finance), 'राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन अधिनियम, 2003' (FRBM Act) तथा राजकोषीय समेकन (Fiscal Consolidation) के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. FRBM अधिनियम, 2003 का मुख्य उद्देश्य देश में वित्तीय अनुशासन को सुनिश्चित करना, राजस्व घाटे को समाप्त करना तथा दीर्घकालिक व्यापक आर्थिक स्थिरता प्राप्त करना था, जिसके तहत केंद्र सरकार के लिए वर्ष 2008-09 तक राजकोषीय घाटे की सीमा सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 3 प्रतिशत लक्षित की गई थी। 2. वर्ष 2018 में एन.के. सिंह समिति की संस्तुतियों के आधार पर FRBM अधिनियम में संशोधन किया गया, जिसके तहत सरकार को यह कानूनी बाध्यता दी गई कि वह वर्ष 2020-21 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत और कुल ऋण (Debt-to-GDP Ratio) को केंद्र सरकार के लिए 40 प्रतिशत तथा संयुक्त रूप से केंद्र और राज्यों के लिए 60 प्रतिशत तक सीमित करे। 3. 'राजस्व घाटा' (Revenue Deficit) उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ सरकार का कुल राजस्व व्यय कुल राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है, और यदि सरकार द्वारा राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए उधार (Borrowing) का उपयोग किया जाता है, तो इसे अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक और पूंजी-सृजक राजकोषीय उपाय माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत में चिश्ती सिलसिले का संस्थापक किसे माना जाता है? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के गठन, क्षेत्राधिकार और इसकी विधिक प्रक्रिया के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत की गई थी, और यह भारत को ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बाद पर्यावरण से संबंधित विशेष न्यायालय स्थापित करने वाला विश्व का तीसरा तथा पहला विकासशील देश बनाता है। 2. NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निहित सिविल न्यायालय की सख्त प्रक्रिया से बाध्य नहीं है, बल्कि यह 'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है। 3. राष्ट्रीय हरित अधिकरण के किसी भी आदेश, निर्णय या अवार्ड से व्यथित कोई भी व्यक्ति इस अधिकरण के निर्णय के नब्बे दिनों के भीतर सीधे उच्चतम न्यायालय में अपील दायर कर सकता है, क्योंकि इस अधिनियम के तहत उच्च न्यायालयों की रिट अधिकारिता को अपवर्जित कर दिया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) और भारत में जैव विविधता संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के तहत चेन्नई, तमिलनाडु में मुख्यालय के साथ एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी। 2. यह प्राधिकरण किसी भी विदेशी नागरिक, कंपनी या अनिवासी भारतीय (NRI) द्वारा भारत से किसी भी जैविक संसाधन को प्राप्त करने या जैव-सर्वेक्षण (Bio-survey) करने के लिए पूर्व अनुमति देना अनिवार्य बनाता है, तथा जैव विविधता से प्राप्त बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के आवेदन के लिए भी इसकी मंजूरी आवश्यक है। 3. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत देश के सभी स्तरों (राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय) पर त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचा प्रदान किया गया है, जिसके तहत 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) स्थानीय निकायों के स्तर पर गठित की जाती हैं, जिन्हें आधिकारिक तौर पर 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) तैयार करने और बनाए रखने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? चतुर्थ बौद्ध संगीति का स्थान कौन सा था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.