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चतुर्थ बौद्ध संगीति का स्थान कौन सा था?

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चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के शासनकाल में कश्मीर (कुंडलवन) में हुई थी।
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भारतीय इतिहास, कला एवं संस्कृति के संदर्भ में, 'महायान बौद्ध धर्म' (Mahayana Buddhism) के विकास, इसकी दार्शनिक मान्यताओं और कला में इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महायान संप्रदाय ने बुद्ध को एक ऐतिहासिक महापुरुष और शिक्षक के रूप में मानने के स्थान पर एक अलौकिक और दिव्य स्वरूप प्रदान किया, जो ब्रह्मांड का रक्षक है और जिसे विभिन्न रूपों में 'त्रिकाय' (Dharmakaya, Sambhogakaya, Nirmanakaya) के सिद्धांत के माध्यम से समझाया गया है। 2. महायान बौद्ध धर्म में व्यक्तिगत मोक्ष (अहर्त आदर्श) की तुलना में 'बोधिसत्व' (Bodhisattva) के मार्ग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जिसके तहत बोधिसत्व वे परोपकारी प्राणी हैं जो बुद्धत्व प्राप्त करने के बहुत करीब होने के बावजूद अन्य सभी संसारी जीवों को दुखों से मुक्ति दिलाने के लिए स्वयं अपने निर्वाण में देरी करते हैं। 3. गांधार और मथुरा कला शैलियों के उद्भव से पहले बौद्ध कला में बुद्ध की उपस्थिति केवल प्रतीकों (जैसे पदचिह्न, छाता, स्तूप या बोधि वृक्ष) के माध्यम से दर्शाई जाती थी, किंतु महायान मत के उदय और बोधिसत्वों की अवधारणा के लोकप्रिय होने के बाद ही भारतीय मूर्तिकला में प्रथम बार बुद्ध और विभिन्न बोधिसत्वों की मानवीकृत (Anthropomorphic) मूर्तियों का निर्माण बड़े पैमाने पर शुरू हुआ। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) के प्रावधानों और लक्ष्यों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' देश का पहला राष्ट्रव्यापी प्रयास है जिसका उद्देश्य देश के सभी शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करना है, और यह एक कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally Binding) कार्यक्रम है जिसके लक्ष्यों को पूरा न करने पर स्थानीय शहरी निकायों पर भारी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है। 2. इस कार्यक्रम के तहत मूल रूप से वर्ष 2024 तक देश के गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment Cities) में PM10 और PM2.5 सांद्रता में वर्ष 2017 के आधार वर्ष की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत तक की कमी लाने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है। 3. 'गैर-प्राप्ति शहर' वे शहर होते हैं जो पिछले पांच वर्षों के दौरान राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) का लगातार उल्लंघन करते रहे हैं, और इन शहरों के लिए 'कार्रवाई योग्य शहर-विशिष्ट स्वच्छ वायु कार्य योजनाएं' (City-Specific Clean Air Action Plans) तैयार करना अनिवार्य किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 72' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power of President) के प्रावधानों और उनकी न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति की क्षमादान की शक्ति का विस्तार उन सभी मामलों पर होता है जहाँ दंड या दंडादेश ऐसे विषय के विरुद्ध किसी विधि के तहत दिया गया है जिस पर संघ की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, और इसमें सैन्य न्यायालयों (Court Martial) द्वारा दिए गए सभी प्रकार के दंडों के साथ-साथ मृत्युदंड (Death Sentence) को क्षमा करने या उसका लघुकरण करने की अनन्य शक्ति भी शामिल है। 2. राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति के विपरीत, राष्ट्रपति संविधान के अनुच्छेद 72 के तहत मृत्युदंड के मामलों में पूर्ण क्षमा (Pardon) प्रदान कर सकता है, और यह शक्ति राज्य के राज्यपाल के पास किसी भी परिस्थिति में उपलब्ध नहीं होती है। 3. सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न ऐतिहासिक निर्णयों (जैसे ईकेरा राम बनाम भारत संघ वाद) के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा क्षमादान की शक्ति का प्रयोग पूरी तरह से उसका व्यक्तिगत और अनंतिम स्वविवेक होता है, और इस शक्ति के प्रयोग को किसी भी उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में न्यायिक समीक्षा के दायरे में चुनौती नहीं दी जा सकती है, भले ही यह निर्णय दुर्भावनापूर्ण या राजनीतिक कारणों से प्रेरित क्यों न हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? गांधी-इरविन समझौते को किस अन्य नाम से भी जाना जाता है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' (मूल अधिकार) के अंतर्गत 'अनुच्छेद 32' (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) तथा इसके अंतर्गत जारी की जाने वाली 'रिट' (Writs) की शक्तियों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय को मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए निर्देश, आदेश या रिट (जिनमें बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण और प्रतिषेध शामिल हैं) जारी करने का अधिकार है, और डॉ. बी.आर. अम्बेडकर ने इसे 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा था। 2. 'उत्प्रेषण' (Certiorari) और 'प्रतिषेध' (Prohibition) दोनों ही रिटें मुख्य रूप से न्यायिक और अर्द्ध-न्यायिक प्राधिकरणों के विरुद्ध जारी की जाती हैं, जहाँ 'प्रतिषेध' का उद्देश्य निचली अदालतों को उनकी अधिकारिता से बाहर जाने से रोकना है (निवारक), जबकि 'उत्प्रेषण' का उद्देश्य लंबित मामले के आदेश को रद्द करना या उसके निर्णय को पस्त करना होता है (उपचारात्मक और निवारक दोनों)। 3. अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मूल अधिकार है, इसलिए यदि किसी व्यक्ति के मूल अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो वह सीधे सर्वोच्च न्यायालय जा सकता है, तथा संसद को यह शक्ति प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के हित में अनुच्छेद 32 के अंतर्गत प्राप्त अधिकारों को किसी भी स्थिति में स्थायी रूप से समाप्त या निरस्त कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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