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भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति के संदर्भ में, मध्यकालीन भारत के दौरान सल्तनत और मुगल काल में प्रयुक्त होने वाले राजस्व और प्रशासनिक शब्दों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सल्तनत काल में 'उश्र' (Ushr) एक प्रकार का भूमि कर था जो मुस्लिम किसानों से उनकी भूमि की उपज पर लिया जाता था, जबकि 'खराज' (Kharaj) गैर-मुस्लिमों से वसूला जाने वाला भू-राजस्व था।
- 2. मुगल प्रशासनिक व्यवस्था में 'मदद-ए-माश' (Madad-e-mash) या 'स्यूरगुल' (Suyurghal) सम्राट या स्थानीय अधिकारियों द्वारा विद्वानों, धार्मिक व्यक्तियों और जरूरतमंदों को दिए जाने वाले राजस्व-मुक्त अनुदान (Revenue-free grants) थे।
- 3. अकबर के शासनकाल में 'दहसाला' (Dahsala) या 'टोडरमल बंदोबस्त' प्रणाली के तहत पिछले दस वर्षों (1570 से 1580 के दशक) के दौरान विभिन्न फसलों की औसत उपज और औसत कीमतों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करके भू-राजस्व का निर्धारण किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: सल्तनत काल में 'उश्र' (Ushr) वह भूमि कर था जो मुस्लिम किसानों द्वारा दिया जाता था (जिसकी दर आमतौर पर कृत्रिम सिंचाई पर 5% और प्राकृतिक सिंचाई पर 10% थी), जबकि 'खराज' (Kharaj) गैर-मुस्लिमों से लिया जाने वाला भू-राजस्व था, जिसकी दर उपज का एक तिहाई से आधा तक होती थी। हालांकि, खराज और उश्र की परिभाषा में मुस्लिम और गैर-मुस्लिम किसानों के वर्गीकरण की प्रक्रिया इस्लामी न्यायशास्त्र (शरिया) के नियमों के अनुसार थी, किंतु कथन में दोनों के संदर्भ में आंशिक रूप से भ्रम की स्थिति है; मुख्य रूप से 'खराज' सामान्य भू-राजस्व था जो गैर-मुस्लिमों (और बाद में व्यापक रूप से सभी किसानों) पर लागू होता था। अधिक सटीक रूप से, कथन 1 में 'उश्र' और 'खराज' के पारंपरिक विवरण के विपरीत व्याख्या दी गई है क्योंकि खराज गैर-मुस्लिमों (जिम्मी) से लिया जाने वाला कर था।
कथन 2 सही है: मुगल काल में 'मदद-ए-माश' (जिसे 'स्यूरगुल' भी कहा जाता था) सम्राट द्वारा धार्मिक नेताओं, विद्वानों, संतों और गरीबों को दिए जाने वाले राजस्व-मुक्त भूमि अनुदान होते थे, जिनका उद्देश्य धर्म और शिक्षा को बढ़ावा देना था।
कथन 3 सही है: राजा टोडरमल की देखरेख में अकबर के शासनकाल में 1580 में 'दहसाला' व्यवस्था लागू की गई थी। इसके अंतर्गत पिछले दस वर्षों (1570-1580) के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न फसलों की औसत उपज और औसत प्रचलित कीमतों का विश्लेषण कर वास्तविक राजस्व का निर्धारण किया गया था।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधायी संबंधों और 'अवशिष्ट शक्तियों' (Residuary Powers) के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 248 के अनुसार, संसद को किसी भी ऐसे विषय के संबंध में विधि बनाने की अनन्य शक्ति प्राप्त है जो समवर्ती सूची या राज्य सूची में शामिल नहीं है, और इस अवशिष्ट विधायी शक्ति के अंतर्गत कर लगाने (Taxation) से संबंधित विषय शामिल नहीं किए गए हैं।
2. कनाडा के संविधान के विपरीत, जहाँ अवशिष्ट शक्तियाँ प्रांतीय (राज्य) सरकारों में निहित हैं, भारतीय संविधान में अवशिष्ट शक्तियों को केंद्र सरकार (संसद) में निहित किया गया है, जो भारत के अर्ध-संघीय (Quasi-federal) स्वरूप को और अधिक सुदृढ़ करती है।
3. भारत सरकार अधिनियम, 1935 (Government of India Act, 1935) के अंतर्गत भी अवशिष्ट विधायी शक्तियाँ गवर्नर-जनरल के अधीन थीं, न कि प्रांतीय विधानमंडलों के पास, और भारतीय संविधान निर्माताओं ने इसी ऐतिहासिक प्रशासनिक निरंतरता को ध्यान में रखते हुए केंद्र को अवशिष्ट शक्तियाँ प्रदान की हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) और उच्च न्यायालयों की 'अनुच्छेद 226' के तहत प्राप्त रिट अधिकारक्षेत्र (Writ Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत न केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए, बल्कि 'किसी अन्य प्रयोजन' (जैसे कि साधारण विधिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए) के लिए भी रिट जारी करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है।
2. सर्वोच्च न्यायालय का अनुच्छेद 32 के अंतर्गत रिट अधिकारक्षेत्र 'मूल अधिकार' (Fundamental Right) का हिस्सा है और इसे किसी भी परिस्थिति में, राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भी, निलंबित नहीं किया जा सकता है।
3. क्षेत्रीय अधिकारक्षेत्र (Territorial Jurisdiction) के मामले में, अनुच्छेद 226 के तहत किसी उच्च न्यायालय की रिट अधिकारिता उस राज्य के प्रादेशिक क्षेत्र तक ही सीमित होती है, सिवाय उस स्थिति के जब वह प्राधिकारी या सरकार उस उच्च न्यायालय के क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र के भीतर स्थित हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) और भारत में वायु प्रदूषण के विनियामक उपायों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा शुरू किया गया 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) देश का पहला राष्ट्रव्यापी प्रयास है जिसका उद्देश्य एक विशिष्ट समय-सीमा के भीतर पार्टिकुलेट मैटर ($PM_{2.5}$ और $PM_{10}$) सांद्रता में कमी लाना है।
2. इस कार्यक्रम के तहत मूल लक्ष्य वर्ष 2024 तक देश के 102 गैर-प्राप्ति वाले शहरों (Non-attainment cities) में वर्ष 2017 के आधार वर्ष की तुलना में पार्टिकुलेट मैटर के स्तर में 20% से 30% तक की कमी लाना था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40% तक की कमी का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. NCAP के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य और कार्य-योजनाएँ केवल सांकेतिक (Indicative) और स्वैच्छिक प्रकृति की हैं, और यदि कोई शहर निर्धारित समय-सीमा में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने में विफल रहता है, तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के प्रावधानों के तहत संबंधित शहरी स्थानीय निकायों पर कानूनी दंडात्मक कार्रवाई और भारी आर्थिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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दिल्ली सल्तनत में 'इक्ता व्यवस्था' को किसने सुदृढ़ और व्यवस्थित किया?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) द्वारा निर्धारित 'मूल संरचना सिद्धांत' (Basic Structure Doctrine) तथा न्यायिक समीक्षा की शक्ति के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मूल संरचना सिद्धांत' की अवधारणा का प्रथम स्पष्ट प्रतिपादन गोलकनाथ वाद (1967) में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा किया गया था, जिसमें यह कहा गया था कि संसद अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संविधान के किसी भी भाग में संशोधन कर सकती है, बशर्ते वह मौलिक अधिकारों को कम न करे।
2. मिनर्वा मिल्स वाद (1980) में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि 'संविधान की सीमित संशोधन शक्ति' और 'न्यायिक समीक्षा' दोनों ही संविधान की मूल संरचना के अभिन्न अंग हैं, और संसद संविधान के माध्यम से अपनी शक्ति को अनियंत्रित नहीं बना सकती है।
3. संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत सर्वोच्च न्यायालय को स्वयं अपने द्वारा दिए गए निर्णय या आदेश की पुनरावलोकन (Review) करने की शक्ति प्राप्त है, किंतु संविधान संशोधन अधिनियमों (Constitutional Amendment Acts) को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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