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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'पर्यावरण प्रभाव आकलन' (Environmental Impact Assessment - EIA) और भारत में इसकी वैधानिक प्रक्रिया से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) को कानूनी समर्थन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत जारी पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना, 2006 (EIA Notification 2006) के माध्यम से प्राप्त होता है, जिसके तहत विकास परियोजनाओं को उनके संभावित पर्यावरणीय प्रभावों के आधार पर 'श्रेणी A' और 'श्रेणी B' में वर्गीकृत किया जाता है।
- 2. 'श्रेणी A' की परियोजनाओं का पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance) के लिए केंद्रीय स्तर पर पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा गठित 'विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति' (EAC) द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जबकि 'श्रेणी B' की परियोजनाओं का मूल्यांकन राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) द्वारा किया जाता है।
- 3. EIA अधिसूचना, 2006 के प्रावधानों के अनुसार, देश में किसी भी श्रेणी की नई विकास परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी प्रक्रिया में 'जन सुनवाई' (Public Hearing) का आयोजन करना हमेशा और सभी परिस्थितियों में अनिवार्य होता है, और इसमें किसी भी प्रकार की छूट का कोई प्रावधान नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारत में पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) को मुख्य रूप से पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत जारी EIA अधिसूचना, 2006 के माध्यम से वैधानिक ढांचा मिला है। इसके तहत परियोजनाओं को उनके पैमाने और संभावित प्रभावों के आधार पर श्रेणी 'A' और 'B' में वर्गीकृत किया जाता है।
कथन 2 सही है: श्रेणी 'A' की परियोजनाओं के लिए केंद्र स्तर पर MoEFCC के अंतर्गत 'विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति' (EAC) द्वारा मूल्यांकन किया जाता है, जबकि श्रेणी 'B' की परियोजनाओं का मूल्यांकन राज्यों के स्तर पर 'राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण' (SEIAA) और 'राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति' (SEAC) द्वारा किया जाता है।
कथन 3 गलत है: EIA अधिसूचना, 2006 के तहत सभी परियोजनाओं के लिए जन सुनवाई (Public Hearing) अनिवार्य नहीं होती है। कुछ विशिष्ट श्रेणियों की परियोजनाओं (जैसे अपतटीय (offshore) तेल और गैस खोज, रक्षा से जुड़े रणनीतिक प्रोजेक्ट, राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार जो संकीर्ण क्षेत्रों में हों, या श्रेणी B2 की परियोजनाएं) को जन सुनवाई की अनिवार्यता से छूट दी गई है। अतः कथन 3 गलत है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 105' (সংসदीय विशेषाधिकार) और 'अनुच्छेद 194' के अंतर्गत विधायी विशेषाधिकारों और सदन के भीतर भाषण देने की स्वतंत्रता के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 105(2) के अनुसार, संसद में या उसकी किसी समिति में संसद सदस्यों द्वारा कही गई किसी बात या दिए गए किसी मत के संबंध में किसी भी न्यायालय में कोई कानूनी कार्यवाही (Civil or Criminal proceedings) नहीं की जा सकती है, और यह उन्मुक्ति संसद के सदस्यों के अलावा उन मंत्रियों पर भी लागू होती है जो सदन के सदस्य नहीं हैं लेकिन उन्हें सदन में बोलने और उसकी कार्यवाही में भाग लेने का अधिकार है।
2. ऐतिहासिक 'पी.वी. नरसिंह राव बनाम राज्य (1998)' वाद में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने यह निर्णय दिया था कि अनुच्छेद 105(2) के तहत मिलने वाली घूसखोरी (Bribery) से प्रतिरक्षा उन सांसदों को भी प्राप्त है जिन्होंने संसद में किसी प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने के लिए रिश्वत ली थी।
3. 'सीता और अन्य बनाम झारखंड राज्य (2024)' वाद में उच्चतम न्यायालय की 7 न्यायाधीशों की बड़ी बेंच ने वर्ष 1998 के पी.वी. नरसिंह राव मामले के निर्णय को पलटते हुए यह स्पष्ट किया कि विधायी विशेषाधिकार और भ्रष्टाचार के आरोप एक-दूसरे के पूरक हैं, और यदि कोई सांसद या विधायक रिश्वत लेकर सदन में वोट देता है या भाषण देता है, तो उसे संविधान के अनुच्छेद 105 या 194 के तहत किसी भी प्रकार की आपराधिक इम्युनिटी (Immunity) या सुरक्षा नहीं मिलेगी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा, इसके अनुमोदन और इसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा पूरे देश में या इसके किसी भाग में युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह के आधार पर की जा सकती है, किंतु संविधान में यह अनिवार्य किया गया है कि राष्ट्रपति ऐसी कोई भी उद्घोषणा तभी करेंगे जब केंद्रीय मंत्रिमंडल (Cabinet) का लिखित विनिश्चय उन्हें इस आशय का संसूचित कर दिया गया हो।
2. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा इसके जारी होने की तारीख से 'एक महीने' की अवधि के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और यदि यह उद्घोषणा लोकसभा के विघटन के दौरान की जाती है, तो यह लोकसभा के पुनर्गठन के पश्चात अपनी पहली बैठक से 'तीस दिन' की अवधि तक जीवित रहती है, बशर्ते इस बीच राज्यसभा द्वारा इसका अनुमोदन पहले ही कर दिया गया हो।
3. '44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978' के माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त छह मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए किसी अलग से औपचारिक आदेश की आवश्यकता नहीं होती है, भले ही आपातकाल का आधार 'सशस्त्र विद्रोह' ही क्यों न हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग III' के अंतर्गत 'मूल अधिकार' (Fundamental Rights - अनुच्छेद 12 से 35) तथा 'न्यायिक पुनर्वलोकन' से संबंधित 'अनुच्छेद 13' के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 13(2) के अनुसार राज्य ऐसा कोई कानून नहीं बनाएगा जो भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छीनता है या न्यून करता है, और इस प्रकार बनाया गया प्रत्येक कानून उल्लंघन की मात्रा तक शून्य (Void) होगा।
2. सर्वोच्च न्यायालय ने 'केशवानंद भारती वाद (1973)' में यह स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन करने की व्यापक शक्ति प्राप्त है, और इसके तहत संसद द्वारा किया गया कोई भी संवैधानिक संशोधन 'अनुच्छेद 13(3) में प्रयुक्त 'विधि' (Law) शब्द के अंतर्गत शामिल होता है, जिसके कारण मूल अधिकारों को संशोधित करने वाले संशोधन अधिनियमों की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है।
3. सर्वोच्च न्यायालय ने 'गोलकनाथ वाद (1967)' में यह निर्णय दिया था कि संसद को मूल अधिकारों में संशोधन करने की कोई शक्ति नहीं है क्योंकि संविधान संशोधन भी अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' के दायरे में आते हैं, जिसे बाद में 24वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1971 द्वारा निष्प्रभावी कर दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) और 'नमामि गंगे कार्यक्रम' के प्रावधानों तथा गंगा नदी बेसिन प्रबंधन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के तहत किया गया था, जिसे बाद में वर्ष 2016 में पुनर्गठित करके 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) का रूप दिया गया, जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री करते हैं।
2. 'नमामि गंगे कार्यक्रम' एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है, जिसके तहत केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है और इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए राज्यों की स्थानीय संस्थाओं या शहरी स्थानीय निकायों की कोई वित्तीय भागीदारी नहीं होती है।
3. 'अर्थ गंगा' (Arth Ganga) अवधारणा के अंतर्गत नमामि गंगे कार्यक्रम के दायरे का विस्तार करते हुए गंगा बेसिन के साथ आर्थिक गतिविधियों को जोड़ना है, जिसके प्रमुख स्तंभों में जैविक खेती को बढ़ावा देना, जन-सुविधाओं का विकास, और गोवर्धन (GOBARdhan) योजना के तहत कीचड़ (Sludge) व ठोस अपशिष्ट का प्रबंधन शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्संबंधों तथा 'संघीय आपातकालीन प्रावधानों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 355 संघ पर यह कर्तव्य आरोपित करता है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार इस संविधान के उपबंधों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
2. ऐतिहासिक 'एस.आर. बोम्मई वाद (1994)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 355 के तहत 'संविधान के उपबंधों के अनुसार राज्य का शासन न चलाया जाना' केवल तभी माना जाएगा जब राज्य सरकार विधानसभा में अपना बहुमत खो दे, और इसके अलावा किसी अन्य प्रशासनिक विफलता के आधार पर अनुच्छेद 356 का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्राधिकार के अधीन रहते हुए, राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) से संबंधित सभी शक्तियों और कृतियों को अपने हाथ में ले सकता है या उनका प्रयोग कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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