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भारतीय इतिहास के संदर्भ में, सल्तनत काल के दौरान मुद्रा प्रणाली और आर्थिक सुधारों से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत का पहला सुल्तान था जिसने विशुद्ध अरबी सिक्के चलवाए, और उसने सल्तनत की दो मुख्य आधारभूत मुद्राओं—चांदी का टंका (Tanka) और तांबे का जीतल (Jital)—को प्रारंभ किया, तथा टंके में चांदी का मानक वजन लगभग 175 ग्रेन निर्धारित किया।
- 2. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा शुरू की गई 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) प्रणाली के असफल होने का एक प्रमुख कारण यह था कि राज्य द्वारा सिक्कों के डिजाइन और उत्पादन पर एकाधिकार स्थापित नहीं किया जा सका, जिससे लोगों ने बड़े पैमाने पर घरों में ही तांबे और पीतल के जाली या नकली सिक्के ढालना शुरू कर दिया और राजकोष को भारी नुकसान हुआ।
- 3. शेरशाह सूरी (हालाँकि वह सूरी वंश से था, किंतु उसने सल्तनत और मुगल काल के मध्य प्रशासनिक प्रणालियों को सुधारा) द्वारा जारी किया गया 'रुपया' नामक चांदी का सिक्का इतना अधिक लोकप्रिय हुआ कि वह ब्रिटिश काल तक भारतीय मुद्रा प्रणाली का मानक बना रहा, जिसका वजन लगभग 178 ग्रेन था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: इल्तुतमिश दिल्ली सल्तनत का ऐसा पहला सुल्तान था जिसने शुद्ध अरबी सिक्के जारी किए। उसने चांदी का 'टंका' (लगभग 175 ग्रेन) और तांबे का 'जीतल' शुरू किया, जिससे आर्थिक व्यवस्था को एक सुदृढ़ आधार मिला।
कथन 2 गलत है: मुहम्मद बिन तुगलक की सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) के असफल होने का मुख्य कारण यह था कि राज्य टक्सालों (Mints) पर अपना कड़ा नियंत्रण और एकाधिकार नहीं रख पाया, और टक्साल से बाहर निजी स्तर पर अवैध रूप से कांस्य/तांबे के सिक्के ढालने पर रोक नहीं लग सकी। लोग अपने पुराने तांबे और पीतल के बर्तनों के बदले सरकारी टक्सालों से सांकेतिक सिक्के बदलवाने लगे, जिससे अर्थव्यवस्था में जाली सिक्कों की बाढ़ आ गई।
कथन 3 सही है: शेरशाह सूरी ने अपने प्रशासनिक और आर्थिक सुधारों के तहत 178 ग्रेन वजन का चांदी का सिक्का चलाया जिसे 'रुपया' कहा गया, और तांबे का 'दाम' चलाया। यह सिक्का इतना प्रभावी और मानक साबित हुआ कि आगे चलकर मुगल और ब्रिटिश काल में भी इसे आधार बनाया गया।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 20' के अंतर्गत प्रदत्त मूल अधिकारों— 'दोहरे खतरे से संरक्षण' (Protection against Double Jeopardy) और 'आत्म-अभिशंसन से संरक्षण' (Protection against Self-Incrimination) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 20(2) के अनुसार किसी भी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार अभियोजित और दंडित किया जा सकता है, बशर्ते वह मामला विभिन्न न्यायालयों (जैसे दीवानी और आपराधिक न्यायालय) के बीच का हो।
2. अनुच्छेद 20(3) के तहत किसी भी अपराध के लिए अभियुक्त बनाए गए किसी भी व्यक्ति को अपने ही विरुद्ध साक्ष्य देने (compelled to be a witness against himself) के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है, और यह सुरक्षा मौखिक बयानों के साथ-साथ अभियुक्त के शरीर के नमूनों (जैसे रक्त, अंगूठे के निशान, और डीएनए) की अनिवार्य प्रस्तुति पर भी पूरी तरह से लागू होती है।
3. 'आत्म-अभिशंसन से संरक्षण' का यह अधिकार केवल आपराधिक मामलों (Criminal proceedings) में औपचारिक रूप से अभियुक्त व्यक्ति को ही उपलब्ध होता है, और यह किसी जांच या पूछताछ के दौरान दिए गए उन बयानों तक विस्तारित नहीं होता है जो औपचारिक आपराधिक विचारण (Trial) शुरू होने से पहले दर्ज किए गए हों।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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Ashoora-e-Muharram किसकी शहादत की याद में मनाया जाता है?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण' (National Ganga River Basin Authority - NGRBA) और इसके शासी ढांचे के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 3(3) के अंतर्गत एक योजना के रूप में वर्ष 2009 में किया गया था, जिसके अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं।
2. NGRBA को केवल गंगा नदी के प्रदूषण उन्मूलन तक सीमित रखा गया था और इसके पास गंगा बेसिन के संरक्षण, नियंत्रण और उपशमन के लिए किसी भी नदी बेसिन प्रबंधन योजना को तैयार करने या उसका वित्तपोषण करने की कोई वैधानिक विनियामक शक्ति नहीं थी।
3. वर्ष 2016 में सरकार ने NGRBA को भंग करके इसके स्थान पर 'राष्ट्रीय गंगा परिषद' (National Ganga Council) का गठन किया, जिसकी अध्यक्षता भी प्रधानमंत्री करते हैं, जबकि इसके कार्यान्वयन हेतु 'राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन' (NMCG) को एक वैधानिक निकाय के रूप में शक्ति प्रदान की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम' (NCAP) और वायु गुणवत्ता प्रबंधन से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा वर्ष 2019 में देश भर के सभी जिलों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए एक अनिवार्य कानूनी रूप से बाध्यकारी (Legally binding) राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में शुरू किया गया था।
2. इस कार्यक्रम के तहत वर्ष 2017 को आधार वर्ष (Base year) मानते हुए, वर्ष 2024 तक देश के लक्षित गैर-प्राप्ति शहरों (Non-attainment cities) में पार्टिकुलेट मैटर ($PM_{10}$ और $PM_{2.5}$) की सांद्रता में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे बाद में संशोधित करके वर्ष 2026 तक 40 प्रतिशत तक की कमी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
3. 'गैर-प्राप्ति शहर' (Non-attainment cities) वे शहर होते हैं जो पिछले पाँच वर्षों के दौरान लगातार राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा करने में विफल रहे हैं, विशेषकर $PM_{10}$ या $NO_2$ के निर्धारित मापदंडों के संदर्भ में।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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असहयोग आंदोलन को किस हिंसक घटना के बाद वापस ले लिया गया था?
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