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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wildlife Protection Act, 1972) के प्रावधानों और 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) एक संविधिक (Statutory) निकाय है, जिसकी अध्यक्षता देश के प्रधानमंत्री द्वारा की जाती है, तथा इसके उपाध्यक्ष के रूप में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री कार्य करते हैं।
  2. 2. इस अधिनियम की धारा 29 के तहत किसी भी राष्ट्रीय उद्यान (National Park) या वन्यजीव अभ्यारण्य (Wildlife Sanctuary) के भीतर व्यावसायिक खनन या वन्यजीवों के आवास को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि की अनुमति केवल और केवल संबंधित राज्य के मुख्य वन्यजीव वार्डन (Chief Wildlife Warden) की लिखित अनुमति से दी जा सकती है, जिसके लिए राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की संस्तुति अनिवार्य नहीं होती है।
  3. 3. वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न अनुसूचियों (Schedules) में वर्ष 2022 के संशोधन अधिनियम के माध्यम से व्यापक बदलाव किया गया है, जिसके तहत अनुसूचियों की कुल संख्या को घटाकर छह से चार कर दिया गया है, ताकि प्रजातियों के संरक्षण प्रबंधन को अधिक सुगम बनाया जा सके।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 5A के तहत 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) का गठन किया गया है जो एक संविधिक (Statutory) निकाय है। इस बोर्ड के अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री इसके उपाध्यक्ष होते हैं। कथन 2 गलत है: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 29 के अनुसार, किसी राष्ट्रीय उद्यान या अभ्यारण्य के भीतर सीमाओं में परिवर्तन या वन्यजीवों के आवास को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि (जैसे कि व्यावसायिक उपयोग या खनन) के लिए न केवल मुख्य वन्यजीव वार्डन की संस्तुति आवश्यक है, बल्कि इसके लिए 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) की स्थायी समिति की पूर्व अनुमति (Prior Approval) अनिवार्य होती है, जिसे उच्चतम न्यायालय के आदेशों द्वारा भी अनिवार्य किया गया है। केवल राज्य के अधिकारी के स्तर पर यह निर्णय नहीं लिया जा सकता। कथन 3 सही है: वन्यजीव (संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2022 (Wildlife Protection Amendment Act, 2022) के माध्यम से अधिनियम की अनुसूचियों की संरचना को तर्कसंगत बनाया गया है। इसके तहत पहले की 6 अनुसूचियों को घटाकर अब कुल 4 अनुसूचियाँ कर दी गई हैं (दो अनुसूचियाँ सामान्य और विशेष पाtronic संरक्षण के लिए, एक अनुसूची CITES के परिशिष्टों के लिए, और एक अनुसूची कीटों/हार्मफुल वर्मिन प्रजातियों के लिए)। अतः कथन 3 सही है।
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