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भारतीय इतिहास, कला और संस्कृति के संदर्भ में, प्राचीन भारत की वास्तुकला, विशेष रूप से 'नागर' (Nagara), 'द्रविड़' (Dravida) और 'बेसर' (Vesara) शैली की मंदिर वास्तुकला से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नागर शैली के मंदिरों में आमतौर पर आयताकार या वर्गाकार भू-विन्यास (Ground Plan) होता है, जिसमें प्रवेश द्वार पर गोपुरम (Gopuram) नामक विशाल आलंकारिक द्वार और परिसर के भीतर विशाल जलकुंड का होना इसकी प्रमुख और अनिवार्य विशेषताएं हैं।
  2. 2. द्रविड़ शैली के मंदिरों की सबसे विशिष्ट पहचान उनका वक्ररेखीय शिखर (Curvilinear Tower या Shikhara) होता है, जिसके शीर्ष पर एक गोलाकार 'आमलक' और उसके ऊपर 'कलश' रखा होता है, तथा इसके गर्भगृह के सामने 'मंडप' और 'महामंडप' का निर्माण किया जाता है।
  3. 3. बेसर शैली, जिसे 'दक्कन शैली' या 'चालुक्य शैली' भी कहा जाता है, नागर और द्रविड़ शैलियों का एक संकर रूप (Hybrid style) है, जिसमें उत्तर भारत के वक्ररेखीय शिखरों और दक्षिण भारत की मंडप योजनाओं तथा मूर्तिकला के तत्वों का अनूठा समन्वय देखने को मिलता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है: 'गोपुरम' (विशाल आलंकारिक प्रवेश द्वार) और मंदिर परिसर के भीतर विशाल जलकुंड द्रविड़ शैली (दक्षिण भारतीय मंदिर वास्तुकला) की प्रमुख विशेषताएं हैं, न कि नागर शैली की। नागर शैली (उत्तर भारतीय वास्तुकला) में आमतौर पर गोपुरम नहीं होते हैं, बल्कि प्रवेश द्वार अपेक्षाकृत सादे होते हैं। कथन 2 असत्य है: वक्ररेखीय शिखर (Curvilinear Tower या Shikhara) जिसके शीर्ष पर आमलक और कलश होता है, 'नागर शैली' की प्रमुख विशेषता है, न कि द्रविड़ शैली की। द्रविड़ शैली के मंदिरों में शिखरों के स्थान पर पिरामिडनुमा 'विमान' होते हैं, जो कई मंजिला (Tala) होते हैं और जिनके शीर्ष पर स्तूपिका या अष्टकोणीय 'शिखर' (गुंबद जैसी संरचना) होता है। कथन 3 सत्य है: बेसर शैली (जिसे चालुक्य या दक्कन शैली भी कहा जाता है) नागर और द्रविड़ शैलियों का सम्मिश्रण (Hybrid) है। इस शैली के मंदिरों में नागर शैली के वक्ररेखीय शिखरों और द्रविड़ शैली के मंडप तथा स्तंभों की सजावट के मिले-जुले रूप दिखाई देते हैं। इस शैली का विकास मुख्य रूप से बादामी के चालुक्य, राष्ट्रकूट और होयसल शासकों के संरक्षण में हुआ था।
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'रंगनाथ मिश्रा बनाम भारत संघ' (2003) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि मूल कर्तव्यों को केवल कानूनी रूप से लागू करने या दण्डित करने का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि देश में नागरिकों के बीच इनके प्रति जन-जागरूकता पैदा की जानी चाहिए और इन्हें कानून के अन्य प्रावधानों के साथ समेकित करके लागू किया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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