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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौद्रिक नीति और उसके 'साख नियंत्रण उपकरणों' (Credit Control Instruments) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. मात्रात्मक साख नियंत्रण उपकरणों (Quantitative Instruments) के अंतर्गत 'वैधानिक तरलता अनुपात' (SLR) वह न्यूनतम प्रतिशत है जो प्रत्येक वाणिज्यिक बैंक को अपनी कुल मांग और समय देयताओं (NDTL) का एक निश्चित हिस्सा तरल परिसंपत्तियों (जैसे नकदी, स्वर्ण या अनुमोदित प्रतिभूतियों) के रूप में अपने पास रखना होता है, जिसे RBI के पास रखना अनिवार्य होता है।
  2. 2. गुणात्मक या चयनात्मक साख नियंत्रण उपकरणों (Qualitative/Selective Instruments) के तहत 'सीमांत आवश्यकता' (Margin Requirement) ऋण के लिए गिरवी रखी गई संपार्श्विक (Collateral) संपत्ति के बाजार मूल्य और बैंक द्वारा उस संपत्ति के एवज में दिए जाने वाले ऋण के बीच का अंतर होता है, जिसे अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति के दौरान बढ़ा दिया जाता है।
  3. 3. 'सीमांत स्थायी सुविधा' (MSF) एक ऐसी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपनी कुल NDTL के एक निश्चित प्रतिशत तक की आपातकालीन अल्पकालिक तरलता की कमी को पूरा करने के लिए RBI से रेपो रेट से भी अधिक ब्याज दर पर ओवरनाइट ऋण प्राप्त कर सकते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: वैधानिक तरलता अनुपात (SLR) के अंतर्गत वाणिज्यिक बैंकों को अपनी कुल मांग और समय देयताओं (NDTL) का एक निश्चित प्रतिशत अपने पास (तरल परिसंपत्तियों जैसे नकदी, स्वर्ण या अनुमोदित सरकारी प्रतिभूतियों के रूप में) रखना होता है, न कि इसे सीधे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के पास रखना अनिवार्य होता है। RBI के पास जो नकदी रखी जाती है, उसे 'नकद आरक्षित अनुपात' (CRR) कहा जाता है। अतः कथन 1 असत्य है। कथन 2 सही है: 'सीमांत आवश्यकता' (Margin Requirement) एक गुणात्मक उपकरण है। यह बैंक द्वारा दिए जाने वाले ऋण की राशि और गिरवी रखी गई सुरक्षा (Collateral) के बाजार मूल्य के बीच का अंतर होता है। मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए इस सीमांत आवश्यकता को बढ़ा दिया जाता है ताकि लोग कम ऋण लें। कथन 3 सही है: 'सीमांत स्थायी सुविधा' (MSF) के तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक अपने सांविधिक तरलता अनुपात (SLR) पोर्टफोलियो में बिना किसी छूट के, अपनी NDTL के एक निश्चित अनुमत सीमा तक RBI से आपातकालीन और अल्पकालिक ओवरनाइट ऋण प्राप्त कर सकते हैं। इस पर ब्याज दर रेपो रेट से अधिक होती है।
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