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भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत् विकास के संदर्भ में, 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) और 'पर्यावरणीय लेखांकन' (Environmental Accounting) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हरित सकल घरेलू उत्पाद (Green GDP) किसी अर्थव्यवस्था के कुल उत्पादन का वह माप है जो पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में से प्राकृतिक संसाधनों के क्षय (Depletion of natural resources) और पर्यावरण प्रदूषण के कारण होने वाले आर्थिक नुकसान (Environmental degradation costs) को घटाकर प्राप्त किया जाता है।
  2. 2. 'संयुक्त राष्ट्र' की 'सीवेज' (SEEA - System of Environmental-Economic Accounting) रूपरेखा पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक है, जो आर्थिक और पर्यावरणीय डेटा को एकीकृत करके सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्रगति को मापने में सहायता करती है।
  3. 3. पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की तुलना में Green GDP का उच्च होना इस बात का प्रतीक होता है कि देश में आर्थिक विकास पर्यावरण की कीमत पर तीव्र गति से हो रहा है और प्राकृतिक पूंजी का बड़े पैमाने पर क्षरण हो रहा है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: 'हरित सकल घरेलू उत्पाद' (Green GDP) पारंपरिक सकल घरेलू उत्पाद का एक संशोधित रूप है, जिसमें आर्थिक विकास के कारण प्राकृतिक संसाधनों की खपत, वनोन्मूलन, मृदा क्षरण और प्रदूषण से होने वाली क्षति के पर्यावरणीय लागत को घटा दिया जाता है। यह सतत विकास का सटीक आकलन प्रदान करता है। कथन 2 सही है: संयुक्त राष्ट्र सांख्यिकी आयोग द्वारा विकसित 'पर्यावरणीय-आर्थिक लेखांकन प्रणाली' (SEEA - System of Environmental-Economic Accounting) एक अंतरराष्ट्रीय सांख्यिकीय मानक है जो पर्यावरण और अर्थव्यवस्था के बीच के अंतर्संबंधों को मापने के लिए एक रूपरेखा प्रदान करता है। कथन 3 गलत है: पारंपरिक GDP की तुलना में Green GDP का कम (निम्न) होना यह दर्शाता है कि आर्थिक विकास पर्यावरण की भारी कीमत पर हो रहा है और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन अत्यधिक है। यदि Green GDP और पारंपरिक GDP के बीच का अंतर कम है, तो इसका अर्थ है कि विकास अधिक टिकाऊ (Sustainable) है। चूँकि कथन 3 में Green GDP के उच्च होने को पर्यावरणीय क्षति से जोड़ा गया है, इसलिए यह कथन गलत है।
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