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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत 'संघीय न्यायपालिका' (Union Judiciary) अर्थात् उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) के अधिकारक्षेत्र और शक्तियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 131 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय के 'मूल आरंभिक अधिकारक्षेत्र' (Original Jurisdiction) के दायरे में वे विवाद आते हैं जो केंद्र सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच, या एक तरफ केंद्र सरकार और कोई राज्य तथा दूसरी तरफ एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच उत्पन्न होते हैं, तथापि इस अधिकारक्षेत्र में रियासतों के समय से चली आ रही किसी संधि या समझौते से उत्पन्न विवाद भी पूर्णतः शामिल होते हैं।
  2. 2. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति को उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की शक्ति प्राप्त है, जिसके अंतर्गत यदि कानून या तथ्‍य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न होता है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो राष्ट्रपति उस पर उच्चतम न्यायालय की राय मांग सकता है, और ऐसी स्थिति में उच्चतम न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य होता है।
  3. 3. उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है, जिसका अर्थ यह है कि उसके निर्णय और अभिलेख सर्वदा साक्ष्य के रूप में रखे जाते हैं और उनकी प्रामाणिकता पर किसी भी न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है, साथ ही उसे अपने अवमान के लिए दंडित करने की शक्ति भी प्राप्त है जिसमें संसद की अनुमति के बिना किसी को भी कारावास की सजा देना शामिल है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत उच्चतम न्यायालय के मूल आरंभिक अधिकारक्षेत्र (Original Jurisdiction) में केंद्र और राज्यों के बीच के विवाद आते हैं, परंतु इसके अपवाद भी हैं। इसमें रियासतों के समय से चली आ रही किसी संधि, समझौते, कूपन या सनद (Covenant/Sanad) से उत्पन्न विवाद इसके अधिकारक्षेत्र से बाहर रखे गए हैं (परंतु संविधान संशोधन के तहत कुछ मामलों में अपवाद हो सकते हैं, मूल रूप से यह अपवादित है)। कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति द्वारा परामर्श मांगने पर, सार्वजनिक महत्व के विधि या तथ्य के प्रश्न पर उच्चतम न्यायालय अपनी राय देने के लिए बाध्य नहीं है। अनुच्छेद 143 के प्रथम खंड के तहत उच्चतम न्यायालय राय दे भी सकता है और मना भी कर सकता है (हालाँकि द्वितीय खंड के तहत कुछ पुरानी संधियों के मामलों में राय देना अनिवार्य होता है, लेकिन सामान्य सार्वजनिक महत्व के मामलों में यह अनिवार्य नहीं है)। कथन 3 सही है: उच्चतम न्यायालय एक 'अभिलेख न्यायालय' (Court of Record) है (अनुच्छेद 129)। इसके दो मुख्य निहितार्थ हैं: (क) इसके निर्णय और कार्यवाहियों के अभिलेख सार्वकालिक साक्ष्य के रूप में रखे जाते हैं और इनकी विधिक वैधता पर किसी अन्य न्यायालय में प्रश्न नहीं उठाया जा सकता; (ख) इसे अपनी अवमानना (Contempt of Court) के लिए दंडित करने की शक्ति प्राप्त है, जिसमें साधारण कारावास या जुर्माना शामिल है और इसके लिए संसद की किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती है।
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