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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन आयोग' (Election Commission) और 'अनुच्छेद 324 से 329' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार, निर्वाचन आयोग एक अखिल भारतीय निकाय है जो संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण के साथ-साथ राज्यों में पंचायतों और नगर पालिकाओं के चुनावों का भी अधीक्षण करता है।
  2. 2. निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों को हटाने के लिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की अनिवार्य संस्तुति (Recommendation) होना आवश्यक है।
  3. 3. संविधान के अनुच्छेद 329 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि संसद या राज्य विधानमंडल के लिए चुनावों के संबंध में किसी भी कानून की वैधता को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती, और चुनाव संबंधी विवादों का एकमात्र समाधान केवल निर्वाचन याचिका (Election Petition) के माध्यम से उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन करता है, किंतु राज्यों में पंचायतों और नगर पालिकाओं (स्थानीय निकायों) के चुनाव भारतीय निर्वाचन आयोग द्वारा नहीं बल्कि संबंधित राज्यों के 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission - अनुच्छेद 243K और 243ZA) द्वारा कराए जाते हैं। कथन 2 असत्य है क्योंकि मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की भांति संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव के माध्यम से हटाया जा सकता है, किंतु अन्य निर्वाचन आयुक्तों या क्षेत्रीय आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश पर ही राष्ट्रपति द्वारा हटाया जा सकता है, न कि बिना उसकी सिफारिश के (मुख्य निर्वाचन आयुक्त की संस्तुति अन्य आयुक्तों को हटाने के लिए अनिवार्य है)। कथन 3 सत्य है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 329(b) के अनुसार संसद या राज्य विधानमंडल के चुनावों से संबंधित किसी भी मामले या विवाद को केवल 'निर्वाचन याचिका' (Election Petition) के माध्यम से संबंधित उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी जा सकती है, और साधारण सिविल न्यायालयों के क्षेत्राधिकार को इस संबंध में वर्जित (Barred) किया गया है। अतः केवल कथन 3 सही है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - Articles 324-329A) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अंतर्गत संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) में निहित होती है, तथा निर्वाचन आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय के रूप में वर्ष 1950 से ही निरंतर कार्य कर रहा है। 2. अनुच्छेद 326 के अनुसार लोकसभा और राज्य की विधानसभाओं के लिए निर्वाचन 'वयस्क मताधिकार' (Adult Suffrage) के आधार पर होगा, जिसके तहत प्रत्येक भारत का नागरिक जिसकी आयु कम-से-कम 18 वर्ष है, मतदाता बनने का संवैधानिक अधिकार रखता है, बशर्ते वह विधि द्वारा अयोग्य न ठहराया गया हो। 3. अनुच्छेद 329 न्यायालयों के हस्तक्षेप से संबंधित है, जिसके तहत संसद या राज्य विधानमंडल के लिए चुनावों के संचालन या सीटों के आवंटन से संबंधित किसी भी कानून की वैधता को किसी भी न्यायालय में प्रश्नगत (Question) नहीं किया जा सकता है, और ऐसे चुनाव केवल 'election petition' के माध्यम से ही चुनौती दिए जा सकते हैं, जिसे उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? भारत के किस राज्य को 'भारत का बगीचा' (Garden of India) कहा जाता है? निम्नलिखित में से कौन सी एक ठंडी महासागरीय जलधारा है? सुरेंद्रनाथ बनर्जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के किस अधिवेशन के अध्यक्ष रहे थे? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) की उद्घोषणा और उसके प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा केवल तभी कर सकता है जब उसे राज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त होती है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन इस संविधान के उपबंधों के अनुसार नहीं चलाया जा सकता है, और राज्यपाल की इस रिपोर्ट के बिना राष्ट्रपति अपनी प्रेरणा से यह उद्घोषणा नहीं कर सकता है। 2. राष्ट्रपति शासन की प्रत्येक उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तारीख से 'दो मास' के भीतर अनुमोदित किया जाना अनिवार्य होता है, और यदि इस अवधि के दौरान लोकसभा का विघटन हो जाता है, तो यह उद्घोषणा लोकसभा के पुनर्गठन के बाद अपनी पहली बैठक से 30 दिनों तक प्रवृत्त बनी रहती है, बशर्ते इस बीच राज्यसभा द्वारा इसका अनुमोदन कर दिया गया हो। 3. सर्वोच्च न्यायालय के 'एस.आर. बोम्बाई वाद (1994)' के निर्णय के अनुसार, राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) के दायरे में आती है, और यदि यह उद्घोषणा दुर्भावनापूर्ण (Mala fide) पाई जाती है या अप्रासंगिक आधारों पर आधारित होती है, तो न्यायालय विघटित विधानसभा को पुनर्जीवित कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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