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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' के अंतर्गत 'आपातकालीन उपबंध' (Emergency Provisions) तथा 'अनुच्छेद 359' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान के अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि वह राष्ट्रीय आपातकाल (अनुच्छेद 352) की उद्घोषणा के दौरान आदेश द्वारा भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है, और ऐसा आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक सीमित हो सकता है।
  2. 2. अनुच्छेद 359 के अंतर्गत जारी किया गया राष्ट्रपति का आदेश संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखा जाना अनिवार्य होता है, और जब तक संसद उस आदेश को अपनी स्वीकृति नहीं देती, वह स्वतः लागू नहीं हो सकता।
  3. 3. अनुच्छेद 359 के अधीन मूल अधिकारों के प्रवर्तन का निलंबन होने पर संबंधित अधिकार स्वतः समाप्त या निष्प्रभावी नहीं हो जाते, बल्कि केवल न्यायालयों के माध्यम से उनके प्रवर्तन को तब तक के लिए रोक दिया जाता है जब तक आपातकाल या आदेश प्रवृत्त रहता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: संविधान के अनुच्छेद 359 के अनुसार, राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान राष्ट्रपति आदेश द्वारा भाग III द्वारा प्रदत्त किसी भी मूल अधिकार (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को निलंबित कर सकता है। यह आदेश पूरे देश या उसके किसी हिस्से पर लागू हो सकता है। कथन 2 गलत है: संविधान के अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति द्वारा जारी किए गए आदेश को संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष अनुमोदन के लिए रखना संवैधानिक रूप से अनिवार्य नहीं है, जबकि अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक होता है। कथन 3 सही है: अनुच्छेद 359 के तहत मूल अधिकारों का निलंबन उनके स्वतः समाप्त होने का संकेत नहीं देता है; बल्कि इसका अर्थ यह है कि आपातकाल की अवधि के दौरान नागरिक अपने मूल अधिकारों के उल्लंघन के लिए अदालतों (उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय) का दरवाजा खटखटाने के अधिकार को अस्थायी रूप से खो देते हैं।
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