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भारतीय पर्यावरण और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) के गठन, क्षेत्राधिकार और इसकी कार्यप्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों (भारतीय वन अधिनियम, 1927 सहित) के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रभावी और त्वरित प्रवर्तन के लिए की गई थी।
  2. 2. यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 में निहित सख्त न्यायिक प्रक्रियाओं से बाध्य नहीं है, बल्कि यह 'नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा किया जा सके।
  3. 3. एनजीटी के आदेशों या निर्णयों के विरुद्ध सीधे उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की जा सकती है, और इसके किसी भी आदेश या निर्णय के खिलाफ उच्च न्यायालयों (High Courts) के पास अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र का प्रयोग करने की कोई शक्ति नहीं है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए की गई थी। इसके अंतर्गत अधिनियम की अनुसूची I में उल्लिखित सात पर्यावरण-संबंधी कानून शामिल हैं, जिनमें भारतीय वन अधिनियम, 1927, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986, और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 आदि शामिल हैं। कथन 2 सही है: NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की सख्त प्रक्रियाओं से बाध्य नहीं है, बल्कि यह 'नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों' (Principles of Natural Justice) के आधार पर कार्य करता है। कथन 3 गलत है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 की धारा 22 के अनुसार, NGT के आदेश या निर्णय के विरुद्ध सीधे 'उच्चतम न्यायालय' (Supreme Court) में 90 दिनों के भीतर अपील की जा सकती है। हालाँकि, इसका यह अर्थ नहीं है कि उच्च न्यायालयों के पास कोई अधिकार नहीं है; सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों (जैसे 'लक्ष्मण डोल बनाम मध्य प्रदेश राज्य' या अन्य मामलों) के अनुसार, उच्च न्यायालय संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत NGT के आदेशों के विरुद्ध न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का अधिकार रखते हैं, क्योंकि उच्च न्यायालयों का रिट अधिकार क्षेत्र संविधान का एक मूल ढांचा (Basic Structure) है।
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