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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'एल् नीनो-दक्षिणी दोलन' (El Niño-Southern Oscillation - ENSO) और इसके भारतीय मानसून पर पड़ने वाले प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. एल् नीनो एक गर्म महासागरीय धारा का अस्थायी विकास है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट (पेरू के तट के पास) ठंडे पानी के प्रतिस्थापन के रूप में प्रकट होती है, और इसके प्रभाव से प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग (ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया) में उच्च दाब तथा पूर्वी भाग (पेरू तट) में निम्न दाब की स्थिति उत्पन्न होती है।
- 2. 'दक्षिणी दोलन सूचकांक' (Southern Oscillation Index - SOI) ताहिती (दक्षिण प्रशांत महासागर) और डार्विन (ऑस्ट्रेलिया) के बीच वायुमंडलीय दाब के अंतर को मापता है; यदि SOI ऋणात्मक (Negative) होता है, तो यह सामान्यतः भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के कमजोर होने और कम वर्षा का संकेत देता है।
- 3. 'ला नीना' (La Niña) को एल् नीनो का विपरीत चरण माना जाता है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे भारत में सामान्य या उससे अधिक मानसूनी वर्षा की संभावना प्रबल हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: एल् नीनो के दौरान, दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट (पेरू तट) पर गर्म जल के आने से वहाँ 'निम्न दाब' (Low Pressure) की स्थिति बनती है, जबकि प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग (ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया) में 'उच्च दाब' (High Pressure) विकसित होता है। इसके विपरीत स्थिति सामान्य वर्षों में होती है।
कथन 2 सही है: दक्षिणी दोलन सूचकांक (SOI) ताहिती (दक्षिण प्रशांत महासागर, 18°S, 149°W) और डार्विन, ऑस्ट्रेलिया (12°S, 131°E) के बीच समुद्र तल के वायुमंडलीय दाब के अंतर को मापता है। एक निरंतर ऋणात्मक SOI मान कमजोर ट्रेड विंड्स और एल् नीनो से जुड़ा होता है, जो आमतौर पर भारत में कमजोर मानसून और कम वर्षा का कारण बनता है।
कथन 3 गलत है: 'ला नीना' (La Niña) को एल् नीनो का विपरीत चरण कहा जाता है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 'कम' (Cooler than normal) हो जाता है, न कि अधिक। ला नीना के दौरान भारत में अच्छी मानसूनी वर्षा होती है।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण' (NBA) और भारत में जैव विविधता संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) की स्थापना 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' के प्रावधानों के तहत चेन्नई, तमिलनाडु में मुख्यालय के साथ एक सांविधिक (Statutory) और स्वायत्त निकाय के रूप में की गई थी।
2. यह प्राधिकरण किसी भी विदेशी नागरिक, कंपनी या अनिवासी भारतीय (NRI) द्वारा भारत से किसी भी जैविक संसाधन को प्राप्त करने या जैव-सर्वेक्षण (Bio-survey) करने के लिए पूर्व अनुमति देना अनिवार्य बनाता है, तथा जैव विविधता से प्राप्त बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) के आवेदन के लिए भी इसकी मंजूरी आवश्यक है।
3. जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत देश के सभी स्तरों (राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय) पर त्रि-स्तरीय प्रशासनिक ढांचा प्रदान किया गया है, जिसके तहत 'जैव विविधता प्रबंधन समितियाँ' (BMCs) स्थानीय निकायों के स्तर पर गठित की जाती हैं, जिन्हें आधिकारिक तौर पर 'लोक जैव विविधता रजिस्टर' (PBR) तैयार करने और बनाए रखने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'विदेशी मुद्रा भंडार' (Foreign Exchange Reserves) और 'अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष' (IMF) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) का प्रबंधन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 'भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम, 1934' के प्रावधानों के अंतर्गत किया जाता है, और इसमें विदेशी मुद्रा आस्तियां (Foreign Currency Assets), स्वर्ण (Gold), विशेष आहरण अधिकार (SDRs) और IMF के पास आरक्षित स्थिति (Reserve Tranche Position) शामिल हैं।
2. 'विशेष आहरण अधिकार' (SDR) कोई मूर्त मुद्रा नहीं है, बल्कि यह अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) द्वारा अपने सदस्य देशों के लिए सृजित एक अंतरराष्ट्रीय आरक्षित परिसंपत्ति है, जिसका मूल्य वर्तमान में पाँच प्रमुख मुद्राओं (अमेरिकी डॉलर, यूरो, जापानी येन, ब्रिटिश पाउंड और चीनी युआन) की एक बास्केट के आधार पर निर्धारित किया जाता है।
3. जब कोई देश IMF से 'विस्तारित निधि सुविधा' (Extended Fund Facility - EFF) के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करता है, तो उसे अपनी घरेलू अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक सुधार (Structural Reforms) लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि यह सहायता केवल अल्पकालिक भुगतान संतुलन संकट से निपटने के लिए बिना किसी शर्त के प्रदान की जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' तथा 'भाग IX-A' के अंतर्गत 'पंचायतों' और 'नगरपालिकाओं' के प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें और 74वें संविधान संशोधन अधिनियमों द्वारा संविधान में क्रमशः 'भाग IX' और 'भाग IX-A' जोड़े गए, जिसके तहत त्रि-स्तरीय पंचायती राज प्रणाली केवल उन्हीं राज्यों में अनिवार्य रूप से लागू की जाती है जिनकी जनसंख्या बीस लाख से अधिक है, जबकि बीस लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों के लिए मध्यवर्ती स्तर का गठन करना स्वैच्छिक रखा गया है।
2. संविधान के अनुच्छेद 243-G और अनुच्छेद 243-W के अंतर्गत क्रमशः पंचायतों और नगरपालिकाओं को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने तथा उन्हें लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसके लिए ग्यारहवीं और बारहवीं अनुसूची में क्रमशः 29 और 18 विषय सूचबद्ध किए गए हैं, और इन विषयों पर कानून बनाने की शक्ति पूरी तरह से संसद के पास निहित है।
3. राज्य का राज्यपाल हर पांच वर्ष की समाप्ति पर पंचायतों और नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करने के लिए एक 'राज्य वित्त आयोग' (State Finance Commission) का गठन करता है, जो राज्यपाल को यह संस्तुति करता है कि राज्य द्वारा लगाए जाने वाले करों और शुल्कों के शुद्ध आगमों का पंचायतों और नगरपालिकाओं के बीच किस प्रकार वितरण किया जाना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्संबंधों तथा 'संघीय आपातकालीन प्रावधानों' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान का अनुच्छेद 355 संघ पर यह कर्तव्य आरोपित करता है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार इस संविधान के उपबंधों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
2. ऐतिहासिक 'एस.आर. बोम्मई वाद (1994)' में उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया था कि अनुच्छेद 355 के तहत 'संविधान के उपबंधों के अनुसार राज्य का शासन न चलाया जाना' केवल तभी माना जाएगा जब राज्य सरकार विधानसभा में अपना बहुमत खो दे, और इसके अलावा किसी अन्य प्रशासनिक विफलता के आधार पर अनुच्छेद 356 का प्रयोग नहीं किया जा सकता है।
3. अनुच्छेद 356 के अंतर्गत राष्ट्रपति शासन लागू होने पर राज्य का राज्यपाल, राष्ट्रपति के प्राधिकार के अधीन रहते हुए, राज्य के उच्च न्यायालय (High Court) से संबंधित सभी शक्तियों और कृतियों को अपने हाथ में ले सकता है या उनका प्रयोग कर सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' और 'अनुच्छेद 356' के अंतर्गत केंद्र के दायित्वों तथा राष्ट्रपति शासन के प्रयोग के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 355 के तहत यह संघ का कर्तव्य है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार इस संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाई जाए।
2. राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की उद्घोषणा के प्रभाव के रूप में, राष्ट्रपति राज्य सरकार के कार्यों को अपने हाथ में ले सकता है, लेकिन वह राज्य के उच्च न्यायालय की शक्तियों को अपने हाथ में लेने या उच्च न्यायालय के प्राधिकार को निलंबित करने की शक्ति नहीं रखता है।
3. 'एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994)' के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह व्यवस्था दी थी कि अनुच्छेद 356 के तहत राज्य विधानसभा का विघटन केंद्र द्वारा राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किए जाने के बाद ही किया जा सकता है, उससे पहले नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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