त्वरित लिंक्स
Civil services
6 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 355' (Article 355) के प्रावधानों और इसके संवैधानिक निहितार्थों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. अनुच्छेद 355 के अंतर्गत यह संघ (Union) का कर्तव्य है कि वह प्रत्येक राज्य की बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के प्रावधानों के अनुसार ही चलाई जा रही है।
- 2. यदि कोई राज्य सरकार केंद्र द्वारा दिए गए किसी भी कार्यकारी निर्देश (Executive Direction) का पालन करने में विफल रहती है, तो केंद्र सरकार सीधे अनुच्छेद 355 के तहत उस राज्य में राष्ट्रपति शासन (Article 356) लागू कर सकती है, जिसके लिए किसी अन्य प्रक्रिया या चेतावनी की आवश्यकता नहीं होती है।
- 3. अनुच्छेद 355 केवल एक सैद्धांतिक घोषणा है और इसका कोई भी न्यायोचित (Justiciable) या प्रवर्तनीय संवैधानिक प्रभाव नहीं है, क्योंकि इसके अनुपालन न होने पर राज्य उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय में रिट याचिका दायर नहीं की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 355 के अनुसार, यह संघ का कर्तव्य है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि प्रत्येक राज्य की सरकार संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाई जा रही है।
कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 355 के तहत केंद्र को यह अधिकार है कि वह राज्य को सुरक्षा और संविधान अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दे, किंतु अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लागू करने के लिए केवल अनुच्छेद 355 का हवाला देना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि इसके साथ अनुच्छेद 356 की शर्तों (जैसे राज्य सरकार का संविधान के उपबंधों के अनुसार न चल पाना) को पूरा होना आवश्यक है। साथ ही, अनुच्छेद 365 के तहत यदि कोई राज्य केंद्र के निर्देशों का पालन करने में असफल रहता है, तब राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है, न कि सीधे अनुच्छेद 355 के तहत बिना किसी अन्य प्रक्रिया के।
कथन 3 गलत है: अनुच्छेद 355 के अंतर्गत संघ का कर्तव्य निहित है, और इसके उल्लंघन या राज्य की संवैधानिक मशीनरी के विफल होने पर केंद्र सरकार अनुच्छेद 356 का प्रयोग करती है। यह पूरी तरह से गैर-न्यायोचित (Non-justiciable) नहीं है, क्योंकि राष्ट्रपति शासन की घोषणा की वैधता की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की जा सकती है।
Related Questions
→
भारतीय अर्थव्यवस्था एवं सतत विकास के संदर्भ में, 'हरित债券' (Green Bonds) और सतत वित्त पोषण (Sustainable Finance) के प्रावधानों तथा वैश्विक मानकों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हरित बॉन्ड (Green Bonds) ऐसे निश्चित आय वाले वित्तीय उपकरण (Fixed-income instruments) हैं जिनका उपयोग विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल और पर्यावरण-हितैषी परियोजनाओं, जैसे कि नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा दक्षता, और टिकाऊ जल प्रबंधन के लिए पूंजी जुटाने हेतु किया जाता है।
2. भारत में सार्वभौमिक हरित बॉन्ड (Sovereign Green Bonds) का ढांचा वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है, जिसके तहत जुटाई गई आय को देश की भारत समचित निधि (Consolidated Fund of India) में अन्य सामान्य सरकारी प्राप्तियों के साथ मिला दिया जाता है और अलग से कोई विशेष ट्रैकिंग की आवश्यकता नहीं होती है।
3. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हरित बॉन्ड बाजार की पारदर्शिता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने के लिए 'ग्रीन बॉन्ड प्रिंसिपल्स' (Green Bond Principles - GBP) का प्रबंधन इंटरनेशनल कैपिटल मार्केट एसोसिएशन (ICMA) द्वारा किया जाता है, जो उपयोग की आय, परियोजना मूल्यांकन और चयन तथा रिपोर्टिंग के लिए स्वैच्छिक दिशानिर्देश प्रदान करते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XI' के अंतर्गत केंद्र-राज्य विधाई संबंधों (Legislative Relations - Articles 245-255) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 245 के अनुसार संसद को भारत के संपूर्ण राज्यक्षेत्र या उसके किसी भाग के लिए कानून बनाने की शक्ति प्राप्त है, तथा संसद द्वारा बनाया गया कोई भी कानून इस आधार पर अवैध घोषित नहीं किया जा सकता कि उसका 'अतिरिक्त क्षेत्रीय प्रभाव' (Extra-territorial operation) है।
2. अनुच्छेद 249 के तहत यदि राज्य सभा उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से एक संकल्प पारित कर दे कि राष्ट्रीय हित में यह आवश्यक या expedient है कि संसद राज्य सूची में शामिल किसी विषय पर कानून बनाए, तो संसद संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग के लिए उस विषय पर विधि बना सकती है, और ऐसा संकल्प अधिकतम तीन वर्ष की अवधि तक प्रभावी रह सकता है।
3. यदि समवर्ती सूची (Concurrent List) के किसी विषय पर संसद द्वारा बनाई गई विधि और किसी राज्य के विधानमंडल द्वारा बनाई गई विधि में कोई असंगति (Repugnancy) उत्पन्न होती है, तो संसद की विधि मान्य होगी और राज्य की विधि उस सीमा तक शून्य होगी, भले ही राज्य की विधि को राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति मिली हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
नवरत्न का दर्जा प्राप्त करने वाली भारत की 29वीं कंपनी कौन-सी बनी है?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन' (National Infrastructure Pipeline - NIP) और 'पीएम गति शक्ति' (PM GatiShakti) योजना से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय अवसंरचना पाइपलाइन (NIP) को वर्ष 2019 में वित्त मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक उच्च-स्तरीय कार्यदल की संस्तुतियों के आधार पर लॉन्च किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में सामाजिक और आर्थिक अवसंरचना परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से क्रियान्वित करना है, और इसमें केवल केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएं ही शामिल हैं।
2. 'पीएम गति शक्ति' - राष्ट्रीय मास्टर प्लान (National Master Plan) एक डिजिटल मंच है जो अर्थव्यवस्था के सात प्रमुख इंजनों (सड़क, रेलवे, विमानन, नौवहन, सार्वजनिक परिवहन, जलमार्ग और रसद अवसंरचना) को एक साथ जोड़ता है, ताकि बहु-मोडल कनेक्टिविटी (Multi-modal Connectivity) को बढ़ावा दिया जा सके और लॉजिस्टिक लागत को कम किया जा सके।
3. भारत की संधारणीय अवसंरचना विकास रणनीतियों के तहत, NIP और पीएम गति शक्ति दोनों पहलों में मुख्य रूप से पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों और उच्च कार्बन उत्सर्जन वाली परिवहन प्रणालियों को प्राथमिकता दी गई है, तथा नवीकरणीय ऊर्जा और हरित भवनों जैसे क्षेत्रों को इसके दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XV' के अंतर्गत 'निर्वाचन' (Elections - अनुच्छेद 324 से 329) तथा निर्वाचन आयोग से संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के अनुसार संसद, राज्य के विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के निर्वाचनों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग में निहित है, और मूल संविधान में यह एक बहु-सदस्यीय निकाय था जिसे बाद में 1989 में एकल-सदस्यीय बनाया गया था।
2. मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) को उसके पद से उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति से और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है, जबकि अन्य चुनाव आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की संस्तुति के बिना राष्ट्रपति द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
3. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की सेवा की शर्ते और पदावधि राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित की जाती है, और संविधान ने निर्वाचन आयोग के सदस्यों के लिए कोई निश्चित कार्यकाल या सेवानिवृत्ति की आयु निर्धारित नहीं की है, बल्कि यह संसद द्वारा बनाए गए कानूनों पर निर्भर करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.