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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 142' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय की पूर्ण न्याय करने की शक्ति (Complete Justice) और इसके न्यायिक आयामों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संविधान का अनुच्छेद 142 सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए यह शक्ति देता है कि वह किसी भी ऐसे 'आदेश या डिक्री' को पारित कर सकता है जो उसके समक्ष लंबित किसी भी वाद या मामले में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक हो।
  2. 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 142 के तहत पारित कोई भी आदेश या डिक्री पूरे भारत में प्रवर्तनीय होती है, किंतु संसद या राज्य विधानमंडल विधायी कानून बनाकर इस शक्ति के प्रयोग को सीमित कर सकते हैं।
  3. 3. ऐतिहासिक 'अयोध्या भूमि विवाद' (राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामला) और 'यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन बनाम भारत संघ (भोपाल गैस त्रासदी)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए अनुच्छेद 142 की शक्तियों का व्यापक उपयोग किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142(1) सर्वोच्च न्यायालय को अपनी अधिकारिता का प्रयोग करते हुए ऐसा कोई भी डिक्री पारित करने या आदेश देने की शक्ति देता है जो उसके समक्ष लंबित किसी वाद या मामले में 'पूर्ण न्याय' (Complete Justice) करने के लिए आवश्यक हो। कथन 2 गलत है: अनुच्छेद 142(2) के तहत सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भारत के पूरे राज्यक्षेत्र में किसी भी व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने, दस्तावेजों के प्रकटीकरण या किसी अपमान के लिए जाँच और दंडित करने के संबंध में जो आदेश पारित किए जाते हैं, वे संसद द्वारा बनाई गई किसी विधि के अधीन होते हैं; किंतु 'पूर्ण न्याय' से संबंधित अनुच्छेद 142(1) की शक्तियों को संसद या राज्य विधानमंडल सीधे तौर पर कानून बनाकर प्रतिबंधित या सीमित नहीं कर सकते हैं। यह न्यायालय की एक विशेष संवैधानिक शक्ति है। कथन 3 सही है: सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल गैस त्रासदी मामले (1989) और अयोध्या भूमि विवाद मामले (2019) सहित कई ऐतिहासिक मामलों में 'पूर्ण न्याय' सुनिश्चित करने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का सफलतापूर्वक उपयोग किया है।
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