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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूकंपीय तरंगों' (Seismic Waves) और उनके संचरण के माध्यम से पृथ्वी के आंतरिक भाग की संरचना के अध्ययन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की भाँति कार्य करती हैं और ये केवल ठोस तथा तरल माध्यमों से गुजर सकती हैं, जबकि गैस माध्यम में इनका संचरण पूरी तरह से रुक जाता है।
  2. 2. द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ (Transverse) तरंगें होती हैं जो प्रकाश तरंगों के समान व्यवहार करती हैं, और इनकी एक प्रमुख विशेषता यह है कि ये केवल ठोस माध्यमों से ही गुजर सकती हैं तथा तरल या अर्ध-तरल (Molten) माध्यमों में प्रवेश करते ही विलुप्त हो जाती हैं।
  3. 3. धरातलीय तरंगें (Surface Waves या L-waves) भूकंपीय अधिकेंद्र (Epicenter) पर उद्गम के बाद पृथ्वी की सतह के सहारे यात्रा करती हैं और ये तीनों तरंगों में सबसे अधिक विनाशकारी होती हैं, क्योंकि इनकी आवृत्ति और आयाम बहुत अधिक होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है: प्राथमिक तरंगें (P-waves) अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं जो ठोस, तरल और गैस—तीनों प्रकार के माध्यमों से गुजर सकती हैं, हालांकि तरल और गैसीय माध्यमों में इनकी गति धीमी हो जाती है, किंतु ये रुकती नहीं हैं। कथन 2 सही है: द्वितीयक तरंगें (S-waves) अनुप्रस्थ तरंगें होती हैं जो केवल ठोस माध्यमों से ही गमन कर सकती हैं। ये तरल या पिघले हुए माध्यम (जैसे पृथ्वी का बाहरी क्रोड़) में प्रवेश नहीं कर पातीं, जिससे वैज्ञानिकों को पृथ्वी के आंतरिक भाग के तरल हिस्सों का पता लगाने में मदद मिली है। कथन 3 सही है: धरातलीय तरंगें (Surface Waves / L-waves) भूकंपीय अधिकेंद्र पर प्रकट होने के बाद धरातल के साथ-साथ चलती हैं। ये दीर्घकालिक होती हैं और सबसे अधिक विनाशकारी प्रभाव उत्पन्न करती हैं।
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