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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 32' और 'संवैधानिक उपचारों के अधिकार' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान का अनुच्छेद 32 स्वयं में एक मूल अधिकार है, जिसके तहत कोई भी व्यक्ति सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है, और डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने इसे 'संविधान का हृदय और आत्मा' कहा था।
- 2. अनुच्छेद 32 के अंतर्गत उच्चतम न्यायालय केवल 'मूल अधिकारों' के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, जबकि उच्च न्यायालयों को अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य विधिक अधिकारों (Legal Rights) के प्रवर्तन के लिए भी रिट जारी करने की शक्ति प्राप्त है।
- 3. राष्ट्रीय आपातकाल (National Emergency) की उद्घोषणा के दौरान, अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह अनुच्छेद 20 और 21 द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों को छोड़कर अन्य सभी मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय में जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है, किंतु अनुच्छेद 32 स्वयं कभी निलंबित नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय संविधान का अनुच्छेद 32 मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन का अधिकार प्रदान करता है और यह स्वयं एक मूल अधिकार (भाग III) है। डॉ. अम्बेडकर ने इसे संविधान का हृदय और आत्मा कहा था। कथन 2 सही है: अनुच्छेद 32 के तहत सर्वोच्च न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर रिट जारी कर सकता है (इसकी अधिकारिता का दायरा सीमित है), जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय न केवल मौलिक अधिकारों बल्कि अन्य सामान्य विधिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकते हैं। कथन 3 गलत है: हालांकि अनुच्छेद 359 के तहत राष्ट्रपति आपातकाल के दौरान मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को निलंबित कर सकते हैं, किंतु अनुच्छेद 32 (जो स्वयं न्यायालय जाने का अधिकार है) के माध्यम से उपचार प्राप्त करने का अधिकार आपातकाल के दौरान निलंबित हो जाता है, क्योंकि वे अधिकार ही प्रवर्तनीय नहीं रहते। इसके अलावा, अनुच्छेद 20 और 21 को कभी निलंबित नहीं किया जा सकता (44वें संशोधन के बाद)। अतः कथन 3 का यह कहना कि 'अनुच्छेद 32 स्वयं कभी निलंबित नहीं होता है' तकनीकी रूप से अनुचित है क्योंकि आपातकाल में इसके द्वारा मिलने वाले उपचार निलंबित हो जाते हैं।
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भारतीय पर्यावरण कानून और 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (National Board for Wildlife - NBWL) तथा 'वन संरक्षण अधिनियम, 1980' के विधिक एवं संस्थागत ढांचे के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड' (NBWL) एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है जिसका गठन वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत किया गया है, और इसकी अध्यक्षता स्वयं देश के प्रधानमंत्री करते हैं।
2. वन्यजीव अभ्यारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों की सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार के गैर-वानिकी गतिविधियों या वाणिज्यिक उपयोग की अनुमति देने के लिए 'स्थाई समिति' (Standing Committee) के अनुमोदन की आवश्यकता होती है, और इस स्थाई समिति की अध्यक्षता केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री द्वारा की जाती है।
3. 'वन संरक्षण अधिनियम, 1980' के तहत किसी भी आरक्षित वन (Reserved Forest) या गैर-वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए उपयोग करने हेतु केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है, और इस अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर राज्यों को यह शक्ति प्राप्त है कि वे बिना केंद्र की अनुमति के वन भूमि का डायवर्जन कर सकते हैं यदि मामला लोक कल्याण से जुड़ा हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम के संदर्भ में, वर्ष 1928 में प्रस्तुत 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) की संस्तुतियों और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में तैयार की गई इस रिपोर्ट में भारत के लिए पूर्ण स्वायत्तता या पूर्ण स्वराज्य (Complete Independence) के लक्ष्य की मांग की गई थी, जिसे ब्रिटिश संसद द्वारा बिना किसी संशोधन के स्वीकार कर लिया गया था।
2. इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए संयुक्त निर्वाचन क्षेत्रों (Joint Electorates) का प्रस्ताव किया गया था, और मुसलमानों के लिए किसी भी प्रकार के पृथक् निर्वाचन (Separate Electorates) की मांग को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया गया था, यद्यपि जनसंख्या के आधार पर अल्पसंख्यकों के लिए सीटें आरक्षित करने का सुझाव दिया गया था।
3. नेहरू रिपोर्ट के जवाब में युवा राष्ट्रवादी नेताओं जैसे जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस ने 'इन्डिपेपेंडेंस फॉर इंडिया लीग' (Independence for India League) की स्थापना की क्योंकि वे डोमिनियन स्टेटस (Dominion Status) के प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग V' के अंतर्गत संसद की वित्तीय समितियों (Financial Committees) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्राक्कलन समिति (Estimates Committee) संसद की सबसे बड़ी समिति है, जिसमें कुल 30 सदस्य होते हैं और इसके सभी सदस्य केवल लोकसभा से चुने जाते हैं, जबकि राज्यसभा का कोई भी सदस्य इस समिति में शामिल नहीं होता है।
2. लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee - PAC) में कुल 22 सदस्य होते हैं, जिनमें 15 लोकसभा से और 7 राज्यसभा से होते हैं, तथा परंपरा के अनुसार इस समिति के अध्यक्ष की नियुक्ति लोकसभा अध्यक्ष द्वारा विपक्ष के सदस्यों में से ही की जाती है।
3. सार्वजनिक उपक्रम समिति (Committee on Public Undertakings) की स्थापना मूल संविधान में ही की गई थी, किंतु वर्ष 1964 में कृष्ण मेनन समिति की संस्तुति के बाद इसके स्वरूप में संशोधन किया गया, और इस समिति के प्रतिवेदन पर नियंत्रक-महालेखापरीक्षक (CAG) द्वारा संसद में बहस कराई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारत में 'गणराज्य' (Republic) का क्या अर्थ है?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग XVIII' (आपात उपबंध - अनुच्छेद 352 से 360) के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) के उद्घोषणा और उसके प्रभावों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 352 के अनुसार राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा केवल तभी की जा सकती है जब मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा इस आशय का लिखित विनिश्चय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए, और यह उद्घोषणा संसद के दोनों सदनों द्वारा इसके जारी होने की तिथि से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत द्वारा अनुमोदित होना अनिवार्य है।
2. राष्ट्रीय आपातकाल के प्रवृत्त होने पर संविधान के अनुच्छेद 19 द्वारा प्रदत्त सभी छह मूल अधिकार स्वतः ही निलंबित हो जाते हैं, और इसके लिए राष्ट्रपति द्वारा किसी अलग से आदेश जारी करने की आवश्यकता नहीं होती है, तथा आपातकाल समाप्त होने के तुरंत बाद ये अधिकार पुनर्जीवित हो जाते हैं।
3. संविधान के अनुच्छेद 359 के अंतर्गत राष्ट्रपति को यह शक्ति प्राप्त है कि वह आदेश द्वारा राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान भाग III द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों (अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर) के प्रवर्तन को किसी न्यायालय में निलंबित कर सकता है, किंतु ऐसा आदेश संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग तक ही सीमित हो सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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