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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता संरक्षण के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010' (National Green Tribunal Act, 2010) के अंतर्गत स्थापित 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (NGT) की शक्तियों, अधिकार क्षेत्र और सीमाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) को भारत के संविधान के 'अनुच्छेद 21' के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार के तहत स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार को लागू करने का वैधानिक जनादेश प्राप्त है, और यह अधिकरण सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के कड़े प्रक्रियात्मक नियमों से बंधा नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) द्वारा निर्देशित होता है।
- 2. NGT अधिनियम की धारा 14 के तहत यह प्रावधान किया गया है कि अधिकरण के समक्ष पर्यावरण से जुड़े किसी भी विवाद या आवेदन को उस कारण के उत्पन्न होने की तारीख से 'छह महीने' की अवधि के भीतर दायर किया जाना अनिवार्य है, किंतु अधिकरण के पास यह विवेकाधीन शक्ति (Discretionary Power) है कि वह पर्याप्त कारणों से संतुष्ट होने पर इस अवधि को अधिकतम 'अतिरिक्त साठ दिन' (60 days) तक बढ़ा सकता है।
- 3. 'वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980' और 'जैविक विविधता अधिनियम, 2002' को NGT के वैधानिक क्षेत्राधिकार की पहली अनुसूची (Schedule I) में शामिल किया गया है, किंतु 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006) को इसके क्षेत्राधिकार से पूर्णतः बाहर रखा गया है, जिसके कारण वनवासियों के अधिकारों से जुड़े मामलों की सुनवाई NGT द्वारा नहीं की जा सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत संविधान के अनुच्छेद 21 (स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार) के कार्यान्वयन के लिए की गई थी। NGT सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (CPC) के कड़े नियमों से बाध्य नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर कार्य करता है।
कथन 2 गलत है: NGT अधिनियम की धारा 14 के अनुसार पर्यावरण से जुड़े विवाद को कारण उत्पन्न होने की तारीख से 'छह महीने' के भीतर उठाना अनिवार्य है। हालांकि, अधिकरण इस अवधि को अधिकतम 'अतिरिक्त साठ दिन' (60 days) तक बढ़ा सकता है, किंतु यहाँ ध्यान देने योग्य बात यह है कि अधिनियम में यह कुल समय सीमा (6 महीने + 60 दिन) का प्रावधान है, लेकिन NGT के पास अपीलीय क्षेत्राधिकार (धारा 16) के अंतर्गत भी अलग समय सीमाएँ (जैसे 30 या 90 दिन) होती हैं। मुख्य रूप से धारा 14 के तहत कुल अवधि 6 महीने है और 60 दिन की अतिरिक्त छूट दी जा सकती है, लेकिन वन अधिकार अधिनियम, 2006 को NGT के क्षेत्राधिकार से बाहर रखने के कारण कथन 3 अधिक सटीक और महत्वपूर्ण है। (विस्तृत रूप से, NGT अधिनियम की अनुसूची I में कुल 7 पर्यावरण और वन संबंधी कानूनों को शामिल किया गया है, जिनमें वन अधिकार अधिनियम, 2006 शामिल नहीं है)।
कथन 3 सही है: 'वन अधिकार अधिनियम, 2006' (Scheduled Tribes and Other Traditional Forest Dwellers Act, 2006) को NGT अधिनियम, 2010 की पहली अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णयों के अनुसार, वन अधिकारों के हनन या दावों से संबंधित मामलों की सुनवाई NGT के अधिकार क्षेत्र में नहीं आती है, क्योंकि इसके लिए विशेष वैधानिक तंत्र (ग्राम सभा और जिला स्तरीय समितियाँ) मौजूद हैं। अतः केवल कथन 1 और 3 सही हैं।
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किस सुल्तान ने 1504 ईस्वी में आगरा शहर को अपनी राजधानी बनाया?
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भारतीय और विश्व भूगोल के संदर्भ में, 'भूमध्यसागरीय जलवायु' (Mediterranean Climate) और उससे संबंधित विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूमध्यसागरीय जलवायु मुख्य रूप से महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर 30° से 45° उत्तर और दक्षिण अक्षांशों के बीच पाई जाती है, और इसकी सबसे अनूठी विशेषता शुष्क ग्रीष्मकाल (Dry summers) तथा वर्षा ऋतु का सर्दियों में होना है।
2. इस क्षेत्र में सर्दियों के दौरान वर्षा का मुख्य कारण पछुआ पवनों (Westerlies) का उत्तर की ओर खिसकना है, क्योंकि गर्मियों में यह क्षेत्र व्यापारिक पवनों (Trade Winds) के प्रभाव में आ जाता है जो अपतटीय (Offshore) होने के कारण वर्षा नहीं करती हैं।
3. भूमध्यसागरीय जलवायु वाले क्षेत्रों में खट्टे रसदार फल (Citrus fruits) जैसे कि संतरा, नींबू, अंजीर और अंगूर का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जाता है, जिसके कारण इन क्षेत्रों को दुनिया का 'फल कटोरा' (Orchards of the world) भी कहा जाता है, तथा यहाँ वाइन निर्माण (Viticulture) का कार्य प्रमुखता से किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय इतिहास और राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में, वर्ष 1928 में गठित 'नेहरू रिपोर्ट' (Nehru Report) और उससे संबंधित प्रावधानों के विषय में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नेहरू रिपोर्ट को तैयार करने वाली समिति के अध्यक्ष मोतीलाल नेहरू थे, जबकि इस समिति के सचिव जवाहरलाल नेहरू थे, और इस रिपोर्ट ने ब्रिटिश भारत के लिए एक नए डोमिनियन स्टेटस (Dominion Status) के संविधान का मसौदा तैयार किया था।
2. इस रिपोर्ट में पहली बार भारत के भावी संविधान के लिए 'मौलिक अधिकारों' (Fundamental Rights) की रूपरेखा प्रस्तुत की गई थी, जिसमें वयस्क मताधिकार (Universal Adult Suffrage) और पुरुषों तथा महिलाओं दोनों को समान नागरिक अधिकार प्रदान करने की बात कही गई थी।
3. सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर नेहरू रिपोर्ट ने मुसलमानों के लिए पृथक् निर्वाचक मंडल (Separate Electorate) की मांग को स्वीकार कर लिया था, क्योंकि यह जिन्ना के चौदह सूตรี प्रस्तावों की मुख्य शर्तों के पूरी तरह अनुकूल था।
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भारतीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जैव विविधता के संदर्भ में, 'राष्ट्रीय हरित अधिकरण' (National Green Tribunal - NGT) से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की स्थापना राष्ट्रीय हरित अधिकरण अधिनियम, 2010 के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण, वनों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से संबंधित कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन और मामलों के त्वरित निपटान के लिए की गई थी, और यह सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के अंतर्गत निर्धारित पारंपरिक न्यायिक प्रक्रियाओं और साक्ष्य नियमों का कड़ाई से पालन करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है।
2. अधिकरण की पीठ (Bench) के समक्ष पर्यावरण से संबंधित किसी भी मामले या वाद को दायर करने के लिए वैधानिक समय-सीमा उस तिथि से छह महीने निर्धारित की गई है जिस दिन से पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाला कारण या विवाद पहली बार उत्पन्न हुआ था, हालांकि अधिकरण पर्याप्त कारणों से संतुष्ट होने पर इस अवधि को अधिकतम अतिरिक्त साठ दिन (कुल आठ महीने) तक बढ़ा सकता है।
3. NGT द्वारा पर्यावरण संबंधी मामलों में दिए गए आदेशों, निर्णयों या पुरस्कारों के विरुद्ध अपील सीधे सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में ही दाखिल की जा सकती है, और अधिकरण के निर्णयों को उच्च न्यायालयों (High Courts) की रिट अधिकार क्षेत्र (Writ Jurisdiction) के अधीन चुनौती नहीं दी जा सकती है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'भाग IX' और 'भाग IX-A' के अंतर्गत 'पंचायतों' तथा 'नगरपालिकाओं' से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 73वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 द्वारा संविधान में जोड़ी गई ग्यारहवीं अनुसूची के अंतर्गत पंचायतों को आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय के लिए योजनाएं तैयार करने के संबंध में कुल 29 कार्यात्मक विषय सौंपे गए हैं, तथा इस भाग के प्रावधान देश के सभी राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों पर बिना किसी अपवाद के पूर्ण रूप से अनिवार्य रूप से लागू होते हैं।
2. 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत नगरपालिकाओं के तीन प्रकार - नगर पंचायत, नगर परिषद और नगर निगम - का गठन किया जाता है, तथा प्रत्येक नगरपालिका में वार्ड समितियों (Ward Committees) का गठन उन नगरपालिकाओं के लिए अनिवार्य है जिनकी जनसंख्या दस लाख या उससे अधिक है।
3. पंचायतों और नगरपालिकाओं दोनों के चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण करने तथा मतदाता सूचियों को तैयार कराने की शक्ति राज्य के राज्यपाल द्वारा नियुक्त किए जाने वाले 'राज्य निर्वाचन आयोग' (State Election Commission) में निहित होती है, जिसे हटाने की प्रक्रिया और शर्तें उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान होती हैं।
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