त्वरित लिंक्स
Civil services
5 views
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 161' के अंतर्गत राज्यपाल की 'क्षमादान की शक्ति' (Pardoning Power) तथा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायिक निर्णयों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. संविधान के अनुच्छेद 161 के अनुसार किसी राज्य के राज्यपाल को उस विषय से संबंधित, जिस पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए गए किसी भी व्यक्ति के दंड को क्षमा करने, उसका प्रविलಂಬन (Reprieve), विराम (Respite) या परिहार (Remission) करने अथवा दंडादेश का निलंबन, परिहार या commutation करने की शक्ति प्राप्त है।
- 2. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 'श्रीकांत चंद्रकांत चिपलुकर बनाम महाराष्ट्र राज्य' तथा अन्य ऐतिहासिक मामलों में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्यपाल की क्षमादान की शक्ति की न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) का दायरा अत्यंत सीमित है, और राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह (Aid and Advice) के बिना अपनी स्वतंत्र इच्छा से किसी भी आजीवन कारावास के कैदी की सजा को माफ कर सकते हैं।
- 3. 'राज्य सरकार बनाम एम.पी. प्रीतम सिंह' और 'मैरी विमला बनाम सुंदराथन' जैसे मामलों में न्यायालय ने यह व्यवस्था दी है कि यदि किसी अपराधी को भारतीय दंड संहिता (IPC) के अंतर्गत मृत्युदंड (Death Sentence) की सजा सुनाई गई है, तो ऐसी स्थिति में भी राज्य का राज्यपाल उस मृत्युदंड को क्षमा या commute कर सकता है, क्योंकि राज्यपाल की यह शक्ति राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति (अनुच्छेद 72) के बिल्कुल समकक्ष होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है: अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल की क्षमादान शक्ति उस विषय तक विस्तारित होती है जिस पर राज्य की कार्यकारी शक्ति का विस्तार होता है, किंतु राज्यपाल को मृत्युदंड (Death Sentence) को पूरी तरह से 'क्षमा' (Pardon) करने की शक्ति प्राप्त नहीं है, और न ही वे सैन्य न्यायालय (Martial Law) द्वारा दी गई सजा को माफ कर सकते हैं (मृत्युदंड को क्षमा करने की अनन्य शक्ति केवल राष्ट्रपति के पास अनुच्छेद 72 के तहत होती है)।
कथन 2 गलत है: राज्यपाल की क्षमादान शक्ति मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह (Aid and Advice) के अधीन होती है, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय ने 'मार्न श्रीकांत' और अन्य मामलों में स्पष्ट किया है; राज्यपाल स्वतंत्र रूप से मंत्रिपरिषद की सलाह के बिना अपने विवेक से निर्णय नहीं ले सकते हैं।
कथन 3 गलत है: जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है, राज्यपाल कभी भी मृत्युदंड की सजा को माफ या क्षमा नहीं कर सकते हैं, भले ही अपराध राज्य सूची (State List) के किसी विषय से संबंधित क्यों न हो। इसलिए तीनों कथन गलत हैं।
Related Questions
→
संविधान सभा की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष कौन थे?
→
भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय के 'सलाहकार क्षेत्राधिकार' (Advisory Jurisdiction) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 143 के तहत भारत के राष्ट्रपति को यह अधिकार प्राप्त है कि यदि उन्हें प्रतीत होता है कि विधि या तथ्य का कोई ऐसा प्रश्न उत्पन्न हुआ है जो सार्वजनिक महत्व का है, तो वे उस पर सर्वोच्च न्यायालय की राय मांग सकते हैं, तथा सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति द्वारा भेजे गए ऐसे प्रत्येक प्रश्न पर अपनी राय देना और विधिक परामर्श देना संवैधानिक रूप से अनिवार्य है।
2. 'विशेष संदर्भ संख्या 1 ऑफ़ 2002 (गुजरात दंगा मामला)' तथा अन्य ऐतिहासिक मामलों में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट किया है कि अनुच्छेद 143 के तहत दी गई सर्वोच्च न्यायालय की सलाहकार राय भारत के सभी न्यायालयों के लिए एक बाध्यकारी मिसाल (Binding Precedent) होती है, ठीक वैसे ही जैसे अनुच्छेद 141 के तहत घोषित कानून होते हैं।
3. अनुच्छेद 143(2) के प्रावधानों के तहत, राष्ट्रपति संविधान लागू होने से पहले की किसी संधि, समझौते, प्रसंविदा या अन्य समान दस्तावेजों से उत्पन्न विवादों को सर्वोच्च न्यायालय के पास विचार और सलाह के लिए भेज सकते हैं, और इस विशिष्ट श्रेणी के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के लिए राष्ट्रपति को अपनी राय देना अनिवार्य होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
1858 के एक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या था?
→
भारतीय अर्थव्यवस्था और सामाजिक विकास के संदर्भ में, 'सतत विकास लक्ष्य' (Sustainable Development Goals - SDGs) और उनके कार्यान्वयन के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सतत विकास लक्ष्य (SDGs) वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 'एजेंडा 2030' के एक भाग के रूप में अपनाए गए थे, जिसमें वर्ष 2030 तक प्राप्त किए जाने वाले कुल 17 वैश्विक लक्ष्य और 169 मात्रात्मक एवं गुणात्मक लक्ष्य (Targets) शामिल हैं, और ये लक्ष्य कानूनी रूप से बाल्टी (Legally Binding) प्रकृति के हैं।
2. भारत में सतत विकास लक्ष्यों के राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय, निगरानी और प्रगति के आकलन के लिए 'नीति आयोग' (NITI Aayog) नोडल संस्था है, जो नियमित रूप से 'SDG इंडिया इंडेक्स' जारी करती है, जिसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय मापदंडों के आधार पर रैंक किया जाता है।
3. सतत विकास लक्ष्य 1 (SDG 1) 'गरीबी के सभी रूपों को हर जगह समाप्त करना' से संबंधित है, जबकि लक्ष्य 13 (SDG 13) जलवायु परिवर्तन और उसके प्रभावों से निपटने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आह्वान करता है, तथापि इन लक्ष्यों के वित्तपोषण की पूरी जिम्मेदारी केवल विकसित देशों की है, विकासशील देशों की इसमें कोई घरेलू वित्तीय प्रतिबद्धता नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
→
कांग्रेस की स्थापना के समय भारत का वायसराय कौन था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.