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भारतीय अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के संदर्भ में, भारत में 'डिजिटल ऋण' (Digital Lending) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विधिक एवं नियामक दिशा-निर्देशों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिजिटल ऋण पर दिशा-निर्देशों के अनुसार, सभी विनियमित संस्थाओं (Regulated Entities - REs) और उनके द्वारा नियुक्त डिजिटल ऋणदाताओं (Lending Service Providers - LSPs) के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि ऋण से संबंधित सभी भुगतानों और संवितरणों का आदान-प्रदान सीधे उधारकर्ता (Borrower) के बैंक खाते और विनियमित संस्था के खाते के बीच ही होना चाहिए, तथा बीच में किसी भी तीसरे पक्ष (Third-party) के पूल खातों या पास-थ्रू खातों का उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित है।
- 2. डिजिटल ऋण देने वाली कंपनियों या ऐप्स (Apps) के माध्यम से उपयोगकर्ताओं के मोबाइल डेटा, संपर्क सूचियों (Contact Lists) और मीडिया फाइलों तक अत्यधिक और अवांछित पहुंच (Excessive Data Harvesting) को रोकने के लिए आरबीआई के नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि ऋणदाताओं को न्यूनतम आवश्यक जानकारी ही एकत्र करनी होगी और वे उपयोगकर्ताओं की अनुमति के बिना उनके फोन की संपूर्ण संपर्क सूची या अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा तक पहुंच प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
- 3. आरबीआई के इन नए विधिक नियमों के तहत, यदि कोई डिजिटल ऋण प्रदाता (LSP) बिना किसी पूर्व सूचना या अनुचित तरीके से ऋण वसूली के लिए उधारकर्ता या उसके संपर्कों को परेशान करता है, तो ऐसी स्थिति में उधारकर्ता के पास केवल दीवानी न्यायालय (Civil Court) में हर्जाने का दावा करने का कानूनी विकल्प होता है, क्योंकि भारतीय रिजर्व बैंक के पास ऐसे मध्यस्थों के खिलाफ प्रत्यक्ष दंडात्मक कार्रवाई करने या उनकी डिजिटल सेवाओं को निलंबित करने का कोई विधिक अधिकार नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी डिजिटल ऋण दिशा-निर्देशों के अनुसार, ऋण का संवितरण (Disbursement) और पुनर्भुगतान (Repayment) सीधे उधारकर्ता के बैंक खाते और विनियमित संस्था (RE) के बीच ही होना चाहिए। किसी भी तीसरे पक्ष (Third-party) के पूल खातों (Pool Accounts) के माध्यम से धन का मार्ग बदलना (Routing) प्रतिबंधित है।
कथन 2 सही है: आरबीआई के नियमों के तहत डेटा गोपनीयता (Data Privacy) को कड़ा किया गया है। डिजिटल ऋणदाताओं को केवल न्यूनतम आवश्यक डेटा ही एकत्र करने की अनुमति है और वे ग्राहकों की संपर्क सूचियों (Contact Lists), मीडिया या अन्य संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा तक अवांछित पहुंच प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
कथन 3 गलत है: आरबीआई के पास विनियमित संस्थाओं और उनके एजेंटों (LSPs) के खिलाफ प्रत्यक्ष विधिक और विनियामक कार्रवाई करने का व्यापक अधिकार है। यदि कोई ऋण प्रदाता उत्पीड़न या अनुचित वसूली प्रथाओं में लिप्त पाया जाता है, तो आरबीआई न केवल उस पर भारी मौद्रिक जुर्माना लगा सकता है, बल्कि उसकी डिजिटल सेवाओं, लाइसेंस या साझेदारी को भी निलंबित या समाप्त कर सकता है। इसके लिए उधारकर्ता केवल सिविल कोर्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि विनियामक स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाती है।
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 352' के अंतर्गत 'राष्ट्रीय आपातकाल' (National Emergency) की उद्घोषणा और उससे संबंधित संवैधानिक प्रावधानों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा संपूर्ण भारत या उसके किसी भाग पर युद्ध, बाह्य आक्रमण या सशस्त्र विद्रोह (Armed Rebellion) के आधार पर की जा सकती है, और मूल संविधान में 'सशस्त्र विद्रोह' शब्द का ही प्रयोग किया गया था जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा जोड़ा गया था।
2. राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा तभी कर सकता है जब संघ के मंत्रिमंडल (Cabinet) द्वारा—जिसमें प्रधानमंत्री और कैबिनेट मंत्री शामिल हैं—लिखित रूप में ऐसा निर्णय राष्ट्रपति को संसूचित किया जाए, और यह संवैधानिक आवश्यकता मूल संविधान में स्वतः विद्यमान थी।
3. राष्ट्रीय आपातकाल की उद्घोषणा को संसद के दोनों सदनों द्वारा उसकी जारी होने की तारीख से एक महीने के भीतर विशेष बहुमत द्वारा अनुमोदित किया जाना अनिवार्य है, और एक बार अनुमोदित होने के बाद यह आपातकाल अधिकतम छह महीने तक प्रवर्तन में रहता है, जिसे संसद की स्वीकृति से अनिश्चित काल तक बढ़ाया जा सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 324' के अंतर्गत स्थापित 'भारत के निर्वाचन आयोग' (Election Commission of India) तथा इसके सदस्यों की स्वतंत्रता और सेवा शर्तों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संविधान के अनुच्छेद 324 के खंड (2) के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा संसद द्वारा बनाए गए किसी विधि के अधीन (और ऐसे विधि के अभाव में मंत्रिपरिषद की सलाह पर) की जाती है, तथा मुख्य चुनाव आयुक्त को उसके पद से उसी रीति और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है जिस रीति और जिन आधारों पर उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
2. अन्य चुनाव आयुक्तों या प्रादेशिक आयुक्तों को मुख्य चुनाव आयुक्त की सिफारिश के बिना राष्ट्रपति द्वारा किसी भी परिस्थिति में उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है, क्योंकि यह प्रावधान चुनाव आयोग के भीतर सामूहिक स्वायत्तता और निर्णय लेने की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य रूप से किया गया है।
3. निर्वाचन आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के बाद उनकी सेवा शर्तों में उनकी नियुक्ति के प्रतिकूल कोई लाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता है, तथा यह संवैधानिक निकाय केवल लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों के लिए ही अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति रखता है, स्थानीय निकायों (पंचायतों और नगर पालिकाओं) के चुनाव इसके क्षेत्राधिकार के अंतर्गत नहीं आते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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सामान्य विज्ञान और पर्यावरण के संदर्भ में, 'ओपन ओशन फर्टिलाइजेशन' (Ocean Fertilization) या 'लौह निषेचन' तकनीक और इसके पर्यावरणीय प्रभावों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय लौह निषेचन एक ऐसी भू-इंजीनियरिंग (Geo-engineering) तकनीक है जिसमें महासागरों के उन क्षेत्रों में जहाँ पोषक तत्वों की प्रचुरता है किंतु फाइटोप्लांकटन (Phytoplankton) की कमी है, कृत्रिम रूप से सूक्ष्म मात्रा में आयरन (लौह) का छिड़काव किया जाता है।
2. इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य फाइटोप्लांकटन के विकास (Bloom) को उत्तेजित करना है, जो प्रकाश संश्लेषण के माध्यम से वायुमंडल से कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) को अवशोषित करते हैं, जिससे वैश्विक तापन को कम करने में सहायता मिल सकती है।
3. यद्यपि यह तकनीक कार्बन को अवशोषित करने में सहायक हो सकती है, किंतु इसके नकारात्मक प्रभावों में महासागरों में ऑक्सीजन की कमी (Ocean Deoxygenation or Dead Zones) और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के प्राकृतिक संतुलन में व्यवधान उत्पन्न होना शामिल है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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किस सुल्तान ने भारत में पहली बार सांकेतिक मुद्रा (Token Currency) का प्रयोग किया था?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किस वर्ष हुई थी?
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