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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना किस वर्ष हुई थी?

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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 28 दिसंबर 1885 को ए.ओ. ह्यूम द्वारा की गई थी।
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चंद्रमा का व्यास पृथ्वी के व्यास का कितना है? भारतीय राजव्यवस्था और संविधान के संदर्भ में, भारतीय संविधान के 'अनुच्छेद 143' के अंतर्गत सर्वोच्च न्यायालय से 'परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति' (Power of President to consult Supreme Court) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति सर्वोच्च न्यायालय से किसी भी प्रश्न (चाहे वह विधि का हो या तथ्य का, जो सार्वजनिक महत्व का हो) पर अपनी राय मांग सकता है, और सर्वोच्च न्यायालय के लिए यह अनिवार्य होता है कि वह ऐसे प्रत्येक मामले में राष्ट्रपति को अपनी राय या परामर्श दे। 2. यदि राष्ट्रपति द्वारा अनुच्छेद 143 के खंड (1) के तहत संविधान पूर्व (Pre-constitution) किसी संधि, समझौते या प्रसंविदा (Covenant) से उत्पन्न विवाद के संबंध में कोई मामला सर्वोच्च न्यायालय को परामर्श के लिए भेजा जाता है, तो सर्वोच्च न्यायालय के लिए अपनी राय देना बाध्यकारी होता है। 3. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 143 के अंतर्गत दी गई सलाह या परामर्श राष्ट्रपति के लिए किसी भी स्थिति में बाध्यकारी (Binding) नहीं होती है, और न ही यह सलाह देश के अन्य अधीनस्थ न्यायालयों या उच्च न्यायालयों के लिए दृष्टांत (Precedent) के रूप में विधिक रूप से बाध्यकारी होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? क्रिप्स मिशन का मुख्य प्रस्ताव क्या था? सुमेलित कीजिए: 1. प्रथम बौद्ध संगीति-राजगृह, 2. द्वितीय बौद्ध संगीति-वैशाली, 3. चतुर्थ बौद्ध संगीति-कश्मीर। सही कूट का चयन करें? भारतीय राजव्यवस्था और भारतीय संविधान के अंतर्गत 'संविधान संशोधन प्रक्रिया' (Article 368) तथा न्यायिक समीक्षा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संसद को संविधान के किसी भी उपबंध में संशोधन करने की शक्ति प्राप्त है, और इस प्रक्रिया का आरंभ केवल संसद के किसी भी सदन में इस प्रयोजन के लिए विधेयक प्रस्तुत करके ही किया जा सकता है, जिसके लिए राष्ट्रपति की पूर्व अनुमति (Prior Recommendation) लेना अनिवार्य होता है। 2. 'केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973)' मामले में उच्चतम न्यायालय की 13 न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने यह अभिनिर्धारित किया था कि संसद को अनुच्छेद 368 के तहत संविधान के मूल ढाँचे (Basic Structure) को छोड़कर किसी भी अन्य हिस्से में संशोधन करने की असीमित शक्ति प्राप्त है, और संविधान संशोधन अधिनियमों को न्यायिक समीक्षा के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है। 3. 'मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980)' मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से स्पष्ट किया कि सीमित संशोधन की शक्ति स्वयं संविधान के मूल ढाँचे का एक अनिवार्य हिस्सा है, और यदि संसद संविधान के अनुच्छेद 368 की शक्तियों का उपयोग करके अपनी संशोधन शक्तियों को अनियंत्रित या असीमित बना लेती है, तो ऐसा संशोधन असंवैधानिक और शून्य घोषित किया जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
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